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भारत, Jun 02, 2026

Cancer Injection: कैंसर का नया ट्रिपल-एक्शन इंजेक्शन, 11 देशों के ट्रायल में 15 मरीजों के ट्यूमर पूरी तरह हुए खत्म

Cancer Breakthrough: कैंसर रिसर्च में बड़ी सफलता। एमिवेंटामैब इंजेक्शन ने ट्रायल में कई मरीजों के ट्यूमर खत्म किए। जानिए कैसे काम करती है यह नई दवा।

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कैंसर के ट्यूमर पर असर दिखाने वाले नए इंजेक्शन की प्रतीकात्मक तस्वीर (photo- chatgtp)

Cancer Treatment: कैंसर रिसर्च की दुनिया से एक बड़ी और राहत देने वाली खबर आई है। डॉक्टरों के एक इंटरनेशनल ट्रायल में सामने आया है कि एक नए ट्रिपल-एक्शन इंजेक्शन ने उन मरीजों के ट्यूमर को भी खत्म कर दिया है, जिन पर कीमोथेरेपी और बाकी सारी दवाएं बेअसर हो चुकी थीं।

लंदन के इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर रिसर्च (ICR) के प्रोफेसर केविन हैरिंगटन ने बताया कि यह उन मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण है, जिनके पास इलाज का कोई और रास्ता नहीं बचा था। इस रिसर्च के नतीजे दुनिया के सबसे बड़े कैंसर सम्मेलन (ASCO) में पेश किए गए हैं।

एक इंजेक्शन और तीन तरह से इलाज

इस नई दवा का नाम एमिवेंटामैब (Amivantamab) है, जिसे जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी ने बनाया है। यह दवा कैंसर की गांठ (ट्यूमर) पर एक साथ तीन तरीकों से काम करती है। यह कैंसर सेल्स को बढ़ाने वाले खास प्रोटीन (EGFR) को रोक देती है। कैंसर कोशिकाएं अक्सर चालाकी से दवा के असर से बचने के लिए जो दूसरा रास्ता चुनती हैं, यह इंजेक्शन उसे भी ब्लॉक कर देता है। यह मरीज के शरीर की अंदरूनी ताकत को एक्टिव करता है ताकि शरीर खुद कैंसर से लड़ सके।

सबसे अच्छी बात यह है कि इसे ग्लूकोज की बोतल (ड्रिप) की तरह चढ़ाने की जरूरत नहीं होती। यह त्वचा के नीचे लगने वाला एक छोटा सा इंजेक्शन है, जिसे मरीज ओपीडी (OPD) में जाकर भी लगवा सकते हैं।

क्या रहे ट्रायल के नतीजे?

दुनिया के 11 देशों में हेड एंड नेक (सिर और गर्दन) कैंसर के 102 मरीजों पर यह ट्रायल किया गया। ये वो मरीज थे जिनका कैंसर आखिरी स्टेज पर था। नतीजों ने डॉक्टरों को हैरान कर दिया। 43 मरीजों के ट्यूमर का साइज या तो बहुत छोटा हो गया या वो पूरी तरह गायब हो गए। 15 मरीजों के शरीर से ट्यूमर का नामोनिशान बिल्कुल खत्म हो गया।

मरीजों को इस इंजेक्शन से दर्द और सूजन में बहुत जल्दी आराम मिला। आमतौर पर सिर और गर्दन के जिस कैंसर (HPV-negative) को सबसे जिद्दी और लाइलाज माना जाता है, यह दवा उस पर भी असरदार साबित हुई है। अब फेफड़ों, पेट और दिमाग के कैंसर के लिए भी इसके 60 से ज्यादा ट्रायल्स चल रहे हैं।

साइड इफेक्ट्स बहुत कम

हर तीन हफ्ते में दिए जाने वाले इस इंजेक्शन के साइड इफेक्ट्स (दुष्प्रभाव) बहुत हल्के देखे गए। 10 में से सिर्फ 1 मरीज को ही किसी परेशानी की वजह से इलाज रोकना पड़ा, बाकी मरीजों पर इसका कोई बुरा असर नहीं पड़ा। डॉक्टरों का मानना है कि इस तकनीक से आने वाले समय में हर साल हजारों कैंसर मरीजों की जान बचाई जा सकेगी।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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