
विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने नगर निगम ग्वालियर की तत्कालीन उपयंत्री वर्षा मिश्रा के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार के मामले में अहम आदेश पारित किया है। न्यायालय ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) द्वारा प्रस्तुत अंतिम प्रतिवेदन (खात्मा रिपोर्ट) को इस स्तर पर स्वीकार करने से इनकार करते हुए मामले में पुनः विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने कहा कि जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत खात्मा रिपोर्ट अधूरी प्रतीत होती है और सभी आवश्यक पहलुओं की गहराई से जांच नहीं की गई है। प्रकरण में आरोप था कि पार्क संधारण कार्यों के भुगतान के एवज में रिश्वत मांगी गई। ट्रैप कार्रवाई, वॉइस रिकॉर्डिंग, ट्रांसक्रिप्ट, गवाहों के बयान और दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद कोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंची कि केवल एक पक्ष के शपथ-पत्र और सीमित साक्ष्यों के आधार पर मामले का पटाक्षेप करना न्यायोचित नहीं है। पत्रिका ने ईओडब्ल्यू की खात्मा रिपोर्ट पर सवाल खड़े करते हुए खबर प्रकाशित की थी। ज्ञात है कि फरवरी 2023 को अनूप यादव ने 15000 रुपए की रिश्वत लेते हुए वर्षा मिश्रा को नगर निगम मुख्यालय के सामने ट्रैप कराया था। जांच के बाद ईओडब्ल्यू ने खात्मा रिपोर्ट कर दी।जिन बिंदुओं पर दोबारा जांच के निर्देश दिए गए
- जांच अपूर्ण और एकपक्षीय पाई गई। कोर्ट ने माना कि ईओडब्ल्यू ने सभी तथ्यों और परिस्थितियों की समग्र जांच नहीं की और जल्दबाजी में क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी।
- वास्तविक रिश्वत मांगकर्ता कौन था, यह स्पष्ट नहीं है। यह तय नहीं किया गया कि रिश्वत की मांग वर्षा मिश्रा ने की या किसी अन्य व्यक्ति ने। इस बिंदु पर जांच अधूरी रही।
- ठेकेदार व उप-ठेकेदार की भूमिका की ठीक से जांच नहीं की है। मुख्य ठेकेदार और कथित उप-ठेकेदार (शिकायतकर्ता) के बीच वास्तविक संबंध, अधिकार और भूमिका की गहराई से पड़ताल नहीं की गई।
- बिल भुगतान प्रक्रिया की जिम्मेदारी तय नहीं की गई। यह स्पष्ट नहीं किया गया कि बिल किस स्तर पर तैयार हुआ, किस अधिकारी ने जांच/अनुमोदन किया
भुगतान रोकने या आगे बढ़ाने का अधिकार किसके पास था।
- व्हाट्सएप चैट, ट्रांसक्रिप्ट और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का समुचित विश्लेषण नहीं किया। शिकायतकर्ता द्वारा पेश
कॉल रिकॉर्डल वॉइस रिकॉर्डिंग की ट्रांसक्रिप्ट, व्हाट्सएप चैट की फॉरेंसिक और तथ्यात्मक जांच अधूरी पाई गई।
- रिश्वत मांग की मंशा की जांच नहीं। यह जांचा ही नहीं गया कि रिश्वत मांगने का इरादा था या नहीं, बातचीत में पैसों की मांग स्पष्ट रूप से उभरती है या नहीं।
-कोर्ट ने कहा कि यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी अन्य अधिकारी/कर्मचारी ने या किसी निजी व्यक्ति ने भ्रष्ट आचरण किया, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई तय की जाए।
- कोर्ट ने माना कि पूरे मामले को केवल एक आरोपी तक सीमित कर देना, जबकि रिकॉर्ड में अन्य लोगों की भूमिका उभरती है, न्यायसंगत नहीं।
Published on:
06 Feb 2026 11:18 am
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