
Property tax Gwalior MP(photo:patrika file)
MP News Property tax on notarized properties: सरकारी और घोषित आबादी की जमीन पर वर्षों से काबिज होकर नगर निगम की सुविधाओं का उपयोग कर रहे करीब 70 हजार लोगों से अब संपत्तिकर वसूली का रास्ता साफ हो गया है। करीब 10 साल की लंबी देरी के बाद नगर निगम ने आखिरकार वह कदम उठा लिया है, जिसकी मांग लगातार उठती रही थी। निगमायुक्त संघ प्रिय के आदेश के बाद अब नोटरी संपत्तिधारकों की विशेष आइडी बनाकर उनसे संपत्तिकर वसूला जाएगा।
गौरतलब है कि जुलाई 2016 में तत्कालीन मेयर-इन- काउंसिल ने इस संबंध (mp news corporation will be recovered Property tax on notarized properties) में संकल्प पारित किया था। इसके बाद वर्तमान परिषद ने भी तीन बार 2023,2024 व 2025 में ठहराव पारित किए, लेकिन फाइलें वर्षों तक धूल खाती रहीं। हाल ही में हुई निगम परिषद की बैठक में सभापति मनोज सिंह तोमर द्वारा निगमायुक्त को भी निर्देश दिए थे और इसके बाद आयुक्त ने परिषद के ठहराव और विधि राय लेकर यह निर्णय लिया। इस हिसाब से यह संकल्प का पालन पूरे एक दशक बाद शुरू होने जा रहा है।
निगम सीमा में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो सरकारी, निजी या घोषित आबादी क्षेत्र की जमीन पर काबिज होकर वर्षों से निवास कर रहे हैं। ये लोग पेयजल, सीवर, सड़क, स्ट्रीट लाइट जैसी सभी नगर निगम सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं, लेकिन बड़ी आबादी अब तक संपत्तिकर की जद से बाहर थी।
अधिकारियों द्वारा लंबे समय तक यह तर्क दिया जाता रहा कि टैक्स रसीद के आधार पर काबिज लोग कोर्ट में मालिकाना हक का दावा कर सकते हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संपत्तिकर आइडी या नामांतरण स्वामित्व का प्रमाण नहीं होता। इसके बावजूद वसूली न होने से निगम को हर साल लाखों- करोड़ों के राजस्व का नुकसान हो रहा था। जबकि निगम एक्ट में भूमि या भवन के किसी अधिभोगी यानी काबिज से भी संपत्तिकर वसूलने का प्रविधान है।
निगमायुक्त द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि नोटरी संपत्तियों की रसीद पर 'काबिज' शब्द अनिवार्य रूप से अंकित किया जाएगा। जिन नोटरी संपत्तियों की आइडी पहले से बनी है, उनसे 1994 से लंबित और वर्तमान दोनों तरह का संपत्तिकर वसूला जाएगा। वहीं जिनकी आइडी अब तक नहीं बनी है, उनकी नई नोटरी 'काबिज' आइडी तैयार की जाएगी।
नई आइडी निर्माण के लिए काबिज संपत्तिधारक को शपथ पत्र, बिजली या पानी का बिल, समग्र आइडी, मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड, भवन का फोटो, पटवारी रिपोर्ट, क्षेत्रफल की जानकारी सहित पंचनामा और भवन आधिपत्य से जुड़े दस्तावेज (नोटरी आदि) प्रस्तुत करने होंगे। जिन संपत्तिधारकों (mp news corporation will be recovered Property tax on notarized properties) की आइडी बनी हुई है, लेकिन उनकी मृत्यु हो चुकी है, उनके वारिसों के नाम काबिज के रूप में दर्ज कर आइडी अपडेट की जाएगी।
निगम के रिकॉर्ड में शहर में कुल 3.49 लाख संपत्तियां दर्ज हैं। इनमें से करीब 70 हजार संपत्तियां केवल नोटरी के आधार पर बसी हैं। इसके अलावा 50 हजार खाली ह्रश्वलॉट और 20 हजार व्यावसायिक संपत्तियां हैं। निगम अब तक केवल 1.90 लाख संपत्तियों से ही 75 करोड़ रुपए का टैक्स वसूल पाया है।
इस फैसले से जहांग्वालियरनगर निगम की आय में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है, वहीं यह भी उजागर हो गया है कि कई सालों तक नियमों को जानबूझकर ठंडे बस्ते में रखा गया। नोटरी वाली शहर में करीब 70 हजार संपत्तियां है, ऐसे में निगम को इनसे 70 करोड़ वसूलने की उम्मीद है। ऐसे में अब देखना होगा कि निगम इस आदेश को जमीनी स्तर पर कितनी सख्ती से लागू करता है या यह फैसला भी कागजों तक ही सिमट कर रह जाएगा।
नोटरी वाली संपत्तियों से संपत्ति कर वसूलने की लंबे समय से प्रयास चल रहे थे। मैंने न्यायालय व परिषद के ठहराव और विधि राय लेकर नोटरी वाले संपत्तियों के स्वामी से अब वसूली का निर्णय लिया है। इससे निश्चित ही निगम की आय काफी बढ़ेगी। -संघप्रिय, आयुक्त नगर निगम
तीन ठहराव में और पूर्व में भी नोटरी वाली संपत्तियों से टैक्स वसूली और आईडी को लेकर निर्देश दिए गए थे। अब नोटरी वाली संपत्तियों से भी वसूली होने से निगम की जरूर आय बढ़ेगी।
-मनोज सिंह तोमर, सभापति नगर निगम
Published on:
15 Jan 2026 10:27 am
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