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ग्वालियर, May 24, 2026

पुराने दोस्तों से चैटिंग, इंस्टाग्राम बना कलह का केंद्र

कभी अपनों को करीब लाने का दावा करने वाला मोबाइल फोन, अब हंसते-खेलते परिवारों को उजाडऩे का सबसे बड़ा विलेन बनकर उभरा है। जब दंपती के रिश्ते से विश्वास की डोर कमजोर होती है, तो घर कलह

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ग्वालियर. कभी अपनों को करीब लाने का दावा करने वाला मोबाइल फोन, अब हंसते-खेलते परिवारों को उजाडऩे का सबसे बड़ा विलेन बनकर उभरा है। जब दंपती के रिश्ते से विश्वास की डोर कमजोर होती है, तो घर कलह का अखाड़ा बन जाता है। पड़ाव स्थित महिला थाने के परिवार परामर्श केंद्र में पहुंच रहे मामले इसी कड़वी हकीकत को बयां कर रहे हैं। यहां पहुंचने वाले हर 10 में से 3 से अधिक मामले केवल एक-दूसरे पर शक और मोबाइल की वजह से उपजे विवादों के हैं।

परिवार परामर्श केंद्र के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। अकेले अप्रेल महीने में ही यहां 168 नए मामले दर्ज किए गए। इनमें से लगभग 35 प्रतिशत मामले शुद्ध रूप से शक के हैं। काउंसलर्स के अनुसार, विवाद की शुरुआत मोबाइल के इस्तेमाल से होती है। पार्टनर का देर रात तक ऑनलाइन रहना, पुराने दोस्तों से चैङ्क्षटग करना या अपना फोन छिपाना—ये ऐसी छोटी बातें हैं जो देखते ही देखते मारपीट और घरेलू ङ्क्षहसा का रूप ले लेती हैं। कुछ मामलों में तो दंपती एक-दूसरे के खिलाफ मोबाइल स्क्रीनशॉट और चैङ्क्षटग के सबूत लेकर थाने पहुंच रहे हैं। अब पति का किसी महिला मित्र से या पत्नी का किसी पुराने दोस्त से सामान्य बात करना भी एक-दूसरे को नागवार गुजर रहा है।

यह वजह आई रही सामने

काउंसङ्क्षलग के दौरान यह भी सामने आया है कि हर बार झगड़े की वजह गंभीर नहीं होती। कई बार विवाद मेकअप के सामान या घर के बजट जैसी मामूली बातों पर शुरू होता है। उदाहरण के तौर पर, पति की आय कम होने के बावजूद पत्नी की महंगी फरमाइशें या पति द्वारा खर्च में कटौती करना विवाद को जन्म देता है। लेकिन इन छोटी बातों को ’जहर’ बनाने का काम करता है दोनों पार्टनर्स का ईगो (अहंकार)।

70% मामलों में फिर हुई सुलह: काउंसलर

इन बिखरते रिश्तों के बीच परिवार परामर्श केंद्र उम्मीद की एक बड़ी किरण भी है। काउंसलर अर्चना शर्मा बताती हैं कि जब रिश्ते में बच्चे शामिल होते हैं और विवाद की वजह सिर्फ शक या नासमझी होती है, तो उसे बचाने के लिए पूरा जोर लगाया जाता है। काउंसङ्क्षलग की पहली सिङ्क्षटग में तो पति-पत्नी एक-दूसरे की तरफ देखते तक नहीं, लेकिन 3 से 4 मुलाकातों के बाद जब सच सामने आता है और गलतफहमियां दूर होती हैं, तो 60 से 70 प्रतिशत मामलों में दंपती दोबारा साथ रहने को तैयार हो जाते हैं। सुलह के बाद भी उनकी निगरानी की जाती है ताकि दोबारा विवाद न हो।

केस-1….इंस्टाग्राम बना आफत

बहोड़ापुर निवासी एक महिला का आरोप था कि उसके इंस्टाग्राम चलाने और दोस्तों से बात करने पर पति शक करते थे। बात इतनी बढ़ी कि महिला मायके चली गई। काउंसङ्क्षलग के बाद दोनों ने स्वीकार किया कि संवाद की कमी थी और अब वे साथ हैं।

केस-2….सैलरी और सजना

सिटी सेंटर निवासी एक युवक की सैलरी 12 हजार थी, जबकि पत्नी केवल मेकअप के लिए 6 हजार मांगती थी। इस आर्थिक दबाव ने घर में युद्ध छेड़ दिया। काउंसलर ने जब दोनों को घर की हकीकत और जिम्मेदारी समझाई, तब जाकर मामला शांत हुआ।

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