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मैं तुझे 2 साल से देख रहा हूं… सिर्फ एक काम दलाली, CMS ने अस्पताल में आशा बहुओं पर लगाई पाबंदी

यूपी के एक महिला अस्पताल में आशा बहुओं की दलाली पर सीएमएस ने सख्ती दिखाई है। प्रवेश पर रोक लगते ही अस्पताल में हंगामा शुरू हो गया। सीएमएस और आशा बहुओं की तीखी नोकझोंक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

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आशा को समझाते CMS फोटो सोर्स पत्रिका

आशा को समझाते CMS फोटो सोर्स पत्रिका

उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले के महिला अस्पताल में शुक्रवार को उस समय हंगामा मच गया। जब सीएमएस डॉक्टर देवेंद्र सिंह ने आशा बहुओं पर दलाली के आरोपों के चलते अस्पताल परिसर में उनके प्रवेश पर रोक लगा दी। इस फैसले को लेकर आशा बहुओं और सीएमएस के बीच तीखी बहस हुई। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

गोण्डा जिले के महिला अस्पताल में आशा बहुओं द्वारा कथित तौर पर दलाली करने और प्रसव के लिए आई महिलाओं को निजी अस्पतालों में भेजने के आरोप लंबे समय से सामने आ रहे थे। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए महिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉक्टर देवेंद्र सिंह ने शुक्रवार को बड़ा फैसला लेते हुए आशा बहुओं के अस्पताल परिसर में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी।

सीएमएस आशा बहुओं के बीच तीखी नोकझोंक का वीडियो वायरल

सीएमएस के इस आदेश के बाद अस्पताल परिसर में माहौल तनावपूर्ण हो गया। आशा बहुएं अस्पताल पहुंचीं और फैसले का विरोध करने लगीं। इस दौरान सीएमएस और आशा बहुओं के बीच जमकर नोकझोंक हुई। बहस इतनी बढ़ गई कि आशा बहुओं ने सीएमएस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। उनके फैसले को वापस लेने की मांग की। कुछ आशा बहुओं ने इस मामले को प्रधानमंत्री तक ले जाने की धमकी भी दी। हंगामे के दौरान किसी ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया। जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और महिला अस्पताल की व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

सीएमएस बोले- सीएमएस आशा बहुए मरीज का करवाती शोषण

इस पूरे मामले पर सीएमएस डॉक्टर देवेंद्र सिंह ने स्पष्ट कहा कि आशा बहुओं का काम केवल रेफर किए गए मरीजों और प्रसव पीड़ित महिलाओं को अस्पताल तक लाना और भर्ती कराना है। इसके बाद उन्हें वापस लौट जाना चाहिए। आरोप है कि कुछ आशा बहुएं पूरे दिन अस्पताल में रुककर मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में भेजती हैं। जिससे मरीजों का शोषण होता है। इसी वजह से अस्पताल परिसर में उनका प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है। फिलहाल इस फैसले के बाद महिला अस्पताल में स्थिति सामान्य है। लेकिन मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।