
सोर्स: nirahua Facebook
"मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखो से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है।"
यह पंक्तियां भोजपुरी सिनेमा के एक्टर और भाजपा नेता दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' पर सटीक बैठती हैं। आज निरहुआ का जन्मदिन है। इस मौके पर हम आपको बताते हैं कोलकाता की झुग्गियों से संसद तक का सफर तय करने वाले निरहुआ की कहानी।
निरहुआ की नींव कोलकाता की एक झुग्गी में पड़ी। उनके पिता एक साधारण नौकरीपेशा इंसान थे। साल में एक बार जब वे कृष्ण जन्माष्टमी पर मंच पर गाते, तो नन्हे दिनेश की आंखों में बड़े सपने पलते थे। पिता चाहते थे कि बेटा बैंक में कैशियर बने, जिसके लिए दिनेश ने बीकॉम भी किया। लेकिन जब घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ी और पिता ने 60 साल की उम्र में दोबारा कमाने के लिए मुंबई जाने की बात कही, तो दिनेश का स्वाभिमान जाग उठा। उन्होंने कहा, "अब आपकी उम्र नहीं है पापा, अब कहीं जाना होगा तो हम जाएंगे।"
निरहुआ का असली नाम दिनेश लाल यादव है। फिल्मों में आने से पहले उन्होंने स्टेज शोज के जरिए खूब नाम कमाया। इन्हीं शोज़ के दौरान उनके जीवन से जुड़े कई रोचक और विवादित किस्से सामने आए।
एक बार उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में आयोजित स्टेज शो के दौरान दर्शकों में मौजूद एक शख्स से निरहुआ की बहस हो गई। पहले यह नोक-झोंक तक सीमित रही, लेकिन देखते-देखते मामला हाथापाई में बदल गया।
बताया जाता है कि उस शख्स ने मंच पर ही निरहुआ का कॉलर पकड़ लिया। इसके बाद निरहुआ ने भी खुद को संभालने के बजाय पलटवार किया और दोनों के बीच जमकर हंगामा हुआ। मौके पर मौजूद लोगों ने किसी तरह मामला शांत कराया। उस लड़ाई के बाद प्रोग्राम बंद हो गया। निरहुआ के भाई ने उस पूरी लड़ाई को गंभीरता से लिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह के तुम्हारे तेवर हैं, वो यहां के लिए ठीक नहीं है, तुम मुंबई जाओ।
निरहुआ के गायिकी के शुरुआती दिन कांटों भरे थे। एक समय ऐसा था जब दिल्ली की म्यूजिक कंपनी ने उन्हें तवज्जो नहीं दी। जेब में पैसे कम थे, इसलिए रिजर्वेशन टिकट कैंसिल कराकर वे दिल्ली से बनारस 'जनरल बोगी' में फर्श पर अखबार बिछाकर घर लौटे। लेकिन जब 'निरहुआ सटल रहे' एल्बम आया, तो उसने इतिहास रच दिया। रातों-रात वे स्टार बन गए। जिस टीम के साथ वे मीलों पैदल चलते थे, वही टीम बाद में उनके साथ चार्टर्ड प्लेन में शो करने विदेश जाने लगी।
निरहुआ बॉलीवुड अभिनेत्री करिश्मा कपूर के इस कदर दीवाने थे कि एनसीसी कैंप की ट्रेनिंग छोड़कर उनकी फिल्म देखने भाग गए, जिसके लिए उन्हें सैकड़ों दंड-बैठक लगानी पड़ीं। घर की दीवारों पर देवी-देवताओं की तस्वीरों के बगल में करिश्मा के पोस्टर लगाने पर पिता ने उनकी खूब पिटाई भी की। यही जुनून फिल्म 'निरहुआ हिंदुस्तानी' के रूप में सामने आया।
निरहुआ को राजनीति में लाने का श्रेय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जाता है। 2019 में आजमगढ़ से अखिलेश यादव के खिलाफ चुनाव हारने के बाद 2022 के उपचुनाव में वे जीतकर संसद पहुंचे।
हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में आजमगढ़ सीट पर उन्हें फिर से अखिलेश यादव से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। इस हार के बाद उनका एक पुराना इंटरव्यू जबरदस्त वायरल हुआ था, जिसमें एंकर ने पूछा था कि क्या हारने पर वे मुंबई लौट जाएंगे? तो निरहुआ ने बड़े तेवर में कहा था...
"सबसे पहले तो मैं ये बताता हूं कि मुझे हराने वाला कोई पैदा नहीं हुआ, क्योंकि मैं स्वतंत्र आदमी हूं। मेरी विचारधारा स्वतंत्र है, मैं किसी का गुलाम नहीं हूं।"
अपनी को-स्टार आम्रपाली दुबे के साथ उनके रिश्ते पर भी हमेशा चर्चा होती रही है। जब उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य के सामने उन्हें 'अर्धांगिनी' कह दिया, तो हंगामा मच गया। बाद में उन्होंने सफाई दी कि वे सिर्फ अपनी फिल्मों के संदर्भ में बात कर रहे थे, क्योंकि पर्दे पर वे दर्जनों बार पति-पत्नी की भूमिका निभा चुके हैं।
Updated on:
02 Feb 2026 10:08 am
Published on:
02 Feb 2026 07:38 am

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