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Good News: 47 करोड़ लागत से देश का पहला ग्लास म्यूज़ियम, कांच उद्योग इतिहास और तकनीक का संगम

फिरोजाबाद में देश का पहला ग्लास म्यूज़ियम आकार ले रहा है, जहां कांच शिल्प के इतिहास, तकनीक और विकास को आधुनिक डिजिटल माध्यमों से प्रदर्शित किया जाएगा। 47 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह भव्य परिसर पर्यटन, शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत का नया केंद्र बनेगा।

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चूड़ियों की नगरी बनेगी विश्व पर्यटन मानचित्र पर खास- फिरोजाबाद में देश का पहला भव्य ग्लास म्यूज़ियम लगभग तैयार (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

चूड़ियों की नगरी बनेगी विश्व पर्यटन मानचित्र पर खास- फिरोजाबाद में देश का पहला भव्य ग्लास म्यूज़ियम लगभग तैयार (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

Yogi Government: कांच उद्योग के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध उत्तर प्रदेश का फिरोजाबाद शहर अब सांस्कृतिक और पर्यटन दृष्टि से भी नई पहचान बनाने जा रहा है। यहां दबरई क्षेत्र में निर्माणाधीन देश का पहला भव्य ग्लास म्यूज़ियम लगभग तैयार हो चुका है। 47 करोड़ रुपये की लागत से 25,700 वर्ग मीटर क्षेत्र में विकसित हो रहे इस आधुनिक म्यूज़ियम का करीब 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यह म्यूज़ियम केवल प्रदर्शनी स्थल नहीं होगा, बल्कि कांच शिल्प के इतिहास, विकास, तकनीक और भविष्य को एक ही छत के नीचे जीवंत अनुभव के रूप में प्रस्तुत करेगा।

कांच की कहानी: परंपरा से तकनीक तक

फिरोजाबाद को लंबे समय से “चूड़ियों की नगरी” कहा जाता है। यहां का कांच उद्योग सदियों पुरानी परंपरा और कारीगरी का प्रतीक है। प्रस्तावित ग्लास म्यूज़ियम इस परंपरा को आधुनिक प्रस्तुति के साथ जोड़ते हुए पर्यटकों को एक अनूठा अनुभव देगा। यहां प्राचीन काल के कांच मनकों, इत्र की शीशियों से लेकर आधुनिक झूमर, सजावटी ग्लासवेयर और डिजाइनर उत्पादों तक के विकास की यात्रा डिजिटल स्टोरीटेलिंग के माध्यम से दिखाई जाएगी। इससे दर्शक यह समझ पाएंगे कि किस तरह कांच मानव सभ्यता के विकास का हिस्सा रहा है।

कांच की दीवारें और ग्लास ब्रिज का आकर्षण

इस म्यूज़ियम की वास्तुकला भी उतनी ही खास होगी जितना इसका विषय। भवन की बाहरी दीवारें पूरी तरह कांच से निर्मित होंगी, जो इसे दूर से ही आकर्षक बनाएंगी। इसके अलावा एक ग्लास ब्रिज बनाया जा रहा है, जो टूरिस्ट इंफॉर्मेशन सेंटर को मुख्य भवन से जोड़ेगा। यह ब्रिज पर्यटकों के लिए रोमांचक अनुभव का केंद्र बनेगा।

एआर-वीआर तकनीक से मिलेगा डिजिटल अनुभव

म्यूजियम की सबसे खास विशेषता होगी यहां स्थापित एआर (Augmented Reality) और वीआर (Virtual Reality) जोन। इस विशेष डिजिटल ज़ोन में बच्चे और शोधार्थी वर्चुअल दुनिया के माध्यम से देख सकेंगे कि कांच कैसे तैयार किया जाता है,आग की भट्टी में कांच कैसे पिघलता है। कारीगर उसे आकार देकर कलाकृति कैसे बनाते हैं। यह अनुभव पारंपरिक शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का उदाहरण बनेगा।

लाइव ग्लास ब्लोइंग डेमोंस्ट्रेशन

पर्यटक केवल डिजिटल अनुभव तक सीमित नहीं रहेंगे। यहां लाइव ग्लास ब्लोइंग डेमोंस्ट्रेशन की व्यवस्था भी की जा रही है। कारीगर पर्यटकों के सामने कांच को गर्म कर फूंक मारकर सुंदर आकृतियां बनाएंगे। इससे लोगों को कांच शिल्प की मेहनत, कौशल और कला का वास्तविक अनुभव मिलेगा।

 तीन मंजिला आधुनिक परिसर

यह म्यूज़ियम एक तीन मंजिला भव्य भवन में विकसित हो रहा है। इसमें शामिल होंगे  ....

  • इंटरएक्टिव डिजिटल गैलरी
  • आधुनिक ऑडिटोरियम
  • सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थल
  • विज्ञान आधारित प्रदर्शनी क्षेत्र

यहां रोशनी, रंग और कांच के संयोजन से विज्ञान की अवधारणाओं को समझाया जाएगा, जिससे यह म्यूज़ियम शैक्षिक पर्यटन का भी बड़ा केंद्र बनेगा।

 ब्रज सर्किट से जुड़ाव

पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इस म्यूज़ियम को ब्रज सर्किट से जोड़ा जा रहा है, जिसमें वृंदावन, नीम करौरी, बटेश्वर और रापरी शामिल हैं। इससे धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के साथ-साथ औद्योगिक और शिल्प पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। जो पर्यटक ब्रज क्षेत्र आते हैं, वे फिरोजाबाद का यह अनूठा स्थल भी देख सकेंगे।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। कारीगरों को नया बाजार मिलेगा। शिल्प उद्योग को वैश्विक पहचान मिलेगी। होटल, परिवहन और स्थानीय व्यापार को फायदा होगा। फिरोजाबाद की पहचान केवल चूड़ियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह शहर एक विश्वस्तरीय सांस्कृतिक पर्यटन गंतव्य बन सकेगा। यह म्यूज़ियम छात्रों, शोधार्थियों और डिजाइनरों के लिए अध्ययन और नवाचार का केंद्र बनेगा। यहां कांच की संरचना, रासायनिक गुण, डिजाइन तकनीक और उत्पादन प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध होगी।

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