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मुंबई, Jun 03, 2026

कैदी नंबर 71 बनीं ट्विशा शर्मा की सास खुद दे चुकी 39 दोषियों को सजा, रौब और रुतबा अब भी नहीं हुआ कम

Twisha Sharma Death News: ट्विशा शर्मा मौत मामले में अब लगातार खुलासे हो रहे हैं। हाल ही में ट्विशा की सास गिरिबाला को भी जेल भेजा गया है।

Twisha Sharma Accused Husband Samarth Singh Admitted to Jail Hospital

Twisha Sharma Accused Husband Samarth Singh Admitted to Jail Hospital

Twisha Sharma Death News: ट्विशा शर्मा मौत मामले ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस केस में सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम की हो रही है, वह है पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह। एक समय अदालत में जिनके फैसलों को अंतिम मानकर लोग सम्मान से सिर झुकाते थे, आज वही न्यायपालिका की पूर्व अधिकारी जांच एजेंसियों के सवालों का सामना कर रही हैं। इस मामले ने न सिर्फ एक चर्चित परिवार को सुर्खियों में ला दिया है बल्कि न्यायिक गलियारों में भी कई पुरानी यादें ताजा कर दी हैं।

अनुशासित जज के तौर पर किया काम

गिरिबाला सिंह का नाम मध्य प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था में लंबे समय तक एक सख्त और अनुशासित जज के रूप में लिया जाता रहा। भोपाल जिला अदालत में उनकी पहचान ऐसे अधिकारी की थी जो गंभीर आपराधिक मामलों में कठोर रुख अपनाने के लिए जानी जाती थीं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने हत्या, महिला अपराध और पॉक्सो जैसे संवेदनशील मामलों में कई महत्वपूर्ण फैसले सुनाए।

न्यायिक अभिलेखों के मुताबिक, भोपाल में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में कार्य करते हुए उनके सामने बड़ी संख्या में आपराधिक मुकदमे आए। इनमें कई मामलों में आरोपियों को दोषी ठहराया गया। हत्या के मामलों में भी उन्होंने कड़े निर्णय दिए, जिसके कारण कानून व्यवस्था से जुड़े लोगों के बीच उनकी अलग पहचान बनी।

39 दोषियों को सुनाई सजा

प्रधान जिला न्यायाधीश बनने से पहले भी गिरिबाला सिंह ने अपर सत्र न्यायाधीश के रूप में लंबा कार्यकाल बिताया था। इस दौरान उन्होंने अनेक गंभीर मामलों की सुनवाई की और कई अभियुक्तों के खिलाफ फैसले दिए। विशेष रूप से बच्चों के खिलाफ अपराधों से जुड़े मामलों में उनका रुख बेहद सख्त माना जाता था। यही वजह रही कि न्यायिक सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका नाम अदालतों और कानूनी हलकों में सम्मान के साथ लिया जाता रहा। उन्होंने करीब 39 दोषियों को सजा सुनाई।

अधिकारी-कर्मचारी सम्मान में होते हैं खड़े

भोपाल जिला अदालत से जुड़े कई कर्मचारियों और वकीलों का कहना है कि गिरिबाला सिंह का व्यक्तित्व बेहद प्रभावशाली था। अदालत परिसर में उनके आने की सूचना मिलते ही पूरा स्टाफ सतर्क हो जाता था। कोर्ट रूम में उनकी मौजूदगी अनुशासन का प्रतीक मानी जाती थी। कई लोग बताते हैं कि न्यायिक अधिकारी और कर्मचारी उन्हें देखते ही सम्मान में खड़े हो जाते थे।

कैदी नंबर 71 बनीं गिरिबाला सिंह

लेकिन ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के बाद हालात पूरी तरह बदल गए। जिस महिला ने वर्षों तक अदालत में न्याय की कुर्सी संभाली, आज वही खुद एक चर्चित आपराधिक जांच का हिस्सा बन गई हैं। जांच एजेंसियों की कार्रवाई और न्यायिक हिरासत के बाद उन्हें कैदी नंबर 71 के रूप में दर्ज किया गया है। यह घटनाक्रम लोगों को हैरान कर रहा है क्योंकि कुछ समय पहले तक उनका नाम सख्त फैसलों और न्यायिक अनुशासन के लिए जाना जाता था।

ट्विशा शर्मा की मौत को लेकर जांच अभी जारी है और एजेंसियां हर पहलू की पड़ताल कर रही हैं। इस बीच गिरिबाला सिंह का न्यायिक रिकॉर्ड फिर चर्चा में है। एक ओर उनके समर्थक उनके लंबे सेवा कार्यकाल और न्यायिक उपलब्धियों का उल्लेख कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियां मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी हैं।

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