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स्कूल से ही नौकरी की तैयारी! 9वीं और 11वीं क्लास में वोकेशनल विषय पढ़ना जरुरी, कौन-कौन से होते हैं वोकेशनल कोर्स?

UP Board: नए ढांचे के तहत हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के सिलेबस में वोकेशनल विषय जोड़े जाएंगे। कक्षा 9वीं में छात्र अपनी सामान्य पढ़ाई के साथ एक व्यावसायिक विषय चुनेंगे। यही विषय आगे चलकर उनके स्किल डेवलपमेंट की नींव बनेगा।

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लखनऊ

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Anurag Animesh

Jan 18, 2026

UP Board Vocational Education Mandatory

School Students(AI Image-ChatGpt)

UP Board Vocational Education Mandatory: उत्तर प्रदेश के स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों के लिए आने वाला समय पढ़ाई के तरीके को पूरी तरह बदलने वाला है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) ने साफ कर दिया है कि अब पढ़ाई सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगी। शैक्षणिक सत्र 2026 से कक्षा 9वीं और 11वीं में वोकेशनल यानी व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य किया जाएगा। यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की सोच से जुड़ा है, जहां जोर इस बात पर है कि छात्र पढ़-लिखकर सिर्फ डिग्रीधारी न बनें, बल्कि काम के हुनर भी सीखें।

UP Board: क्या बदलेगा स्कूलों में?

नए ढांचे के तहत हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के सिलेबस में वोकेशनल विषय जोड़े जाएंगे। कक्षा 9वीं में छात्र अपनी सामान्य पढ़ाई के साथ एक व्यावसायिक विषय चुनेंगे। यही विषय आगे चलकर उनके स्किल डेवलपमेंट की नींव बनेगा।
कक्षा 11वीं में पहुंचते-पहुंचते छात्रों को अपनी रुचि के अनुसार किसी खास ट्रेड या कौशल को चुनने का मौका मिलेगा, ताकि वे उसमें गहराई से सीख सकें। इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए शिक्षकों को खास ट्रेनिंग दी जाएगी।

UP Board Vocational Subjects: इन विषयों की होगी पढ़ाई

बोर्ड जिन क्षेत्रों को शामिल करने की तैयारी कर रहा है, वे सीधे रोजगार से जुड़े हैं। इनमें आईटी और डिजिटल स्किल्स, हेल्थ से जुड़े कोर्स, कृषि और ऑर्गेनिक खेती, इलेक्ट्रॉनिक्स और रिपेयरिंग, टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी जैसे ऑप्शन छात्रों के सामने होंगे। इसका फायदा यह होगा कि अगर कोई छात्र आगे कॉलेज तक नहीं भी जा पाता, तो उसके पास ऐसा हुनर होगा जिससे वह खुद का काम शुरू कर सके या नौकरी पा सके।

UP Board: मार्कशीट में भी जुड़ेगा नंबर

वोकेशनल विषय सिर्फ नाम के लिए नहीं होंगे। इनके नंबर भी मार्कशीट में जुड़ेंगे। बोर्ड ग्रेडिंग और क्रेडिट सिस्टम में भी बदलाव करने जा रहा है। स्कूलों में लैब और वर्कशॉप बनाई जाएंगी, ताकि बच्चे सिर्फ किताब न पढ़ें, बल्कि मशीन, टूल और असली काम के जरिए सीखें।