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TCS Salary Drop: 5 साल बाद 25,000 से घटकर 22,800 हुई सैलरी, क्या खतरे में है आपका भी IT करियर?

TCS Salary Drop News: 5 साल के अनुभव के बाद 25,000 से गिरकर 22,800 पर आई सैलरी। जानिए क्यों घटा कर्मचारी का इन-हैंड पे और खराब रेटिंग्स के साथ-साथ अपस्किलिंग न करना उसे कितना महंगा पड़ा।

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भारत

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Rahul Yadav

Jan 14, 2026

TCS Salary Drop

TCS Salary Drop News (Image: Gemini)

TCS Salary Drop: सोचिए, आपने किसी बड़ी कंपनी में 5 साल से ज्यादा वक्त बिताया हो और जब आप अपनी पे-स्लिप देखें, तो पता चले कि आपकी इन-हैंड सैलरी बढ़ने के बजाय पहले से भी कम हो गई है। सुनकर झटका लगा न? लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit (r/developersIndia) पर एक जावा डेवलपर ने जब अपनी आपबीती सुनाई, तो पूरे IT सेक्टर में एक नई बहस छिड़ गई।

यह कहानी सिर्फ एक कर्मचारी की नहीं है, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए एक सबक है जो IT सेक्टर में कदम तो रखते हैं, लेकिन अपस्किलिंग (Upskilling) की रफ्तार को नजरअंदाज कर देते हैं।

क्या है पूरा मामला?

मुंबई के रहने वाले इस कर्मचारी ने साल 2020 में एक टियर-3 कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) जॉइन की थी। तब उसकी शुरुआती इन-हैंड सैलरी 25,000 रुपये थी। लेकिन आज यानी जनवरी 2026 में, साढ़े पांच साल बाद उसकी टेक-होम सैलरी गिरकर 22,800 रुपये रह गई है।

अमूमन 5 साल के अनुभव के बाद IT प्रोफेशनल्स की सैलरी दोगुनी या तिगुनी हो जाती है, लेकिन यहां मामला बिल्कुल उल्टा रहा।

दो नावों की सवारी पड़ी भारी

इस कर्मचारी ने खुद स्वीकार किया कि करियर की शुरुआत में उसका ध्यान कोडिंग या नई तकनीक सीखने पर नहीं था। वह नौकरी के साथ-साथ सरकारी परीक्षाओं की तैयारी में लगा रहा। नतीजा यह हुआ कि ऑफिस के प्रोजेक्ट्स में उसकी परफॉरमेंस लगातार गिरती गई। उसे लगातार 'C' और 'D' रेटिंग्स मिलीं।

IT कंपनियों में 'C' और 'D' रेटिंग का मतलब है कि आप कंपनी की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर रहे। इसके बाद उसे PIP (Performance Improvement Plan) में डाल दिया गया। हालांकि उसकी नौकरी बच गई, लेकिन उसकी सैलरी और अप्रेजल (Appraisal) पूरी तरह फ्रीज कर दिए गए।

आखिर सैलरी कम कैसे हो गई? (Variable Pay का खेल)

अब सवाल उठता है कि सैलरी घट कैसे सकती है? दरअसल, IT कंपनियों में सैलरी के दो मुख्य हिस्से Fixed Pay और Variable Pay होते हैं।

परफॉरमेंस लिंक्ड इंसेंटिव: जब आपकी रेटिंग गिरती है, तो कंपनी आपका वेरिएबल पे (जो परफॉरमेंस पर आधारित होता है) काट लेती है।

टैक्स और स्टैच्यूटरी डिडक्शन: जैसे-जैसे साल बीतते हैं, टैक्स नियमों या प्रोविडेंट फंड (PF) के योगदान में बदलाव होने से इन-हैंड सैलरी पर असर पड़ता है। अगर आपकी बेसिक सैलरी नहीं बढ़ रही है और डिडक्शन बढ़ रहे हैं, तो घर आने वाला पैसा कम होना स्वाभाविक है।

लो सैलरी बनी नई नौकरी में रोड़ा

दुखद बात यह है कि अब जब उस कर्मचारी ने अपनी गलती सुधारने के लिए जावा बैकएंड डेवलपर के तौर पर स्किल्स सीख लिए हैं, तब भी उसे नई नौकरी नहीं मिल रही। उसने बताया कि जब वह इंटरव्यू के बाद अपना सैलरी स्लिप दिखाता है, तो HR यह देखकर हैरान रह जाते हैं कि 5 साल के अनुभव पर सैलरी इतनी कम क्यों है। कई बार तो बैकग्राउंड चेक के दौरान ही ऑफर वापस ले लिए जाते हैं।

इस खबर से आपको क्या सीखना चाहिए?

अगर आप भी IT सेक्टर में हैं या करियर शुरू कर रहे हैं, तो इन 3 बातों का गांठ बांध लें।

शुरुआती साल सबसे कीमती हैं: करियर के शुरुआती 2-3 सालों में स्किल्स पर ध्यान दें। अगर आप किसी और चीज (जैसे सरकारी नौकरी) की तैयारी करना चाहते हैं, तो यह सुनिश्चित करें कि आपके ऑफिस का काम प्रभावित न हो।

रेटिंग को हल्के में न लें: बड़ी IT कंपनियों में 'C' और 'D' रेटिंग आपकी ग्रोथ को कई सालों के लिए पीछे धकेल सकती है।

मार्केट वैल्यू का ध्यान रखें: हमेशा चेक करते रहें कि आपके अनुभव के हिसाब से मार्केट में क्या मांग है। अगर आपकी सैलरी मार्केट रेट से बहुत कम है, तो यह आने वाले समय में आपके करियर के लिए 'रेड फ्लैग' बन सकता है।

TCS का यह मामला हमें याद दिलाता है कि टेक्नोलॉजी की दुनिया में अगर आप दौड़ नहीं रहे हैं, तो आप पीछे छूट रहे हैं। यहां अनुभव सिर्फ सालों से नहीं, बल्कि स्किल्स से गिना जाता है।