4 जून 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

डूंगरपुर, Jun 04, 2026

Hariyalo Rajasthan Abhiyan : राजस्थान के शिक्षा विभाग का अजीबोगरीब फरमान, संस्थाप्रधान और शिक्षक परेशान

Hariyalo Rajasthan Abhiyan : सरकारी विद्यालयों में पसरे सन्नाटे के बीच शिक्षा विभाग ने एक ऐसा आदेश जारी किया है, जिसने संस्थाप्रधानों और शिक्षकों को परेशान कर दिया है। जानें क्या है मामला?

Hariyalo Rajasthan Abhiyan education department Strange order Principal teacher upset

साबला. स्कूल में पौधरोपण करते शिक्षक व बच्चे। फाइल फोटो पत्रिका

Hariyalo Rajasthan Abhiyan : ग्रीष्मकालीन अवकाश के कारण सरकारी विद्यालयों में पसरे सन्नाटे के बीच शिक्षा विभाग ने एक ऐसा फरमान जारी किया है, जिसने संस्थाप्रधानों और शिक्षकों को चकराकर रख दिया है। एक तरफ स्कूलों में न तो शिक्षक मौजूद हैं और न ही विद्यार्थी, वहीं दूसरी तरफ माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने ‘हरियालो राजस्थान अभियान के तहत गड्ढे खुदवाने का आदेश जारी कर दिया हैं। निदेशालय ने आगामी 20 जून तक हर हाल में पौधरोपण के लिए गड्ढे तैयार करने सहित तमाम व्यवस्थाएं पूरी करने के आदेश दिए हैं। ऐसे में तपती दोपहरी और छुट्टियों के बीच इस काम को समय पर पूरा करना शिक्षकों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।

निदेशक का फरमान, शिक्षक परेशान

राजस्थान के शिक्षा निदेशक सीताराम जाट के अनुसार, वर्ष 2026-27 के तहत चलने वाले इस अभियान के लिए प्रत्येक स्कूल को पौधरोपण का टारगेट तय करना होगा। इसके लिए नोडल अधिकारी बनाने और 20 जून तक अनिवार्य रूप से गड्ढों की खुदाई पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब स्कूल पूरी तरह बंद हैं और शिक्षक-बच्चे अपने घरों पर हैं, तो गड्ढों की खुदाई के लिए जगह का चयन और श्रमदान कौन करेगा? बिना किसी जनशक्ति के संस्थाप्रधानों में इस बात को लेकर भारी संशय है कि वे अकेले इस टारगेट को कैसे हासिल करें।

समय-सीमा बढ़ाने की मांग

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. ऋषिन चौबीसा तथा जिला उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि ‘हरियालो राजस्थान अभियान’ पर्यावरण संरक्षण और हरित राजस्थान के निर्माण की दिशा में एक सराहनीय एवं जनहितकारी पहल है। वर्तमान परिस्थितियों में 20 जून तक गड्ढे तैयार करने की समय-सीमा व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि विद्यालयों में अवकाश होने से शिक्षकों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी संभव नहीं हो पा रही है।

विद्यालयों के पुनः संचालित होने पर शिक्षक, विद्यार्थी, विद्यालय प्रबंधन समितियां तथा स्थानीय समुदाय मिलकर बेहतर योजना और उत्साह के साथ पौधरोपण अभियान को सफल बना सकेंगे।ऐसे में समय बढ़ाना चाहिए।

प्रियंका को संस्कृत में पीएचडी की उपाधि

डूंगरपुर के सागवाड़ा से एक और न्यूज के अनुसार गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय, बांसवाड़ा ने प्रियंका डा. दीपक पंड्या को संस्कृत विषय में पीएचडी विद्या वाचस्पति की उपाधि प्रदान की है। प्रियंका जोशी ने शोध कार्य सेवानिवृत्त आचार्य संस्कृत एवं पूर्व निदेशक, वेद विद्यापीठ एवं वैदिक गुरुकुल जीजीटीयू बांसवाड़ा के प्रो. डा. महेन्द्र प्रसाद सलारिया के निर्देशन में पूर्ण किया।

उनके शोध का विषय ‘भास के नाटकों में जीवन मूल्यों का समीक्षात्मक अध्ययन’ रहा। शोध में उन्होंने महाकवि भास के नाटकों में निहित मानवीय, सामाजिक, नैतिक तथा सांस्कृतिक जीवन मूल्यों का विश्लेषण किया है। महाकवि भास संस्कृत साहित्य के प्रमुख नाटककार हैं और भारतीय साहित्यिक परंपरा में उनकी रचनाओं का महत्वपूर्ण स्थान है।

कमेंट्स

कोई कमेंट नहीं है।

पहले कमेंट करने वाले बनें।

कृपया पक्का करें कि आपका कमेंट हमारे नियमों एवं शर्तों के मुताबिक हो।
ट्रेंडिंग वीडियो

संबंधित खबरें