
देहरादून नगर निगम
Irregularities In The Municipal Corporation : नगर निगम खुद कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है, दूसरी तरफ निगम के आउटसोर्स कर्मचारी सरकारी अफसरों और नेताओं के आवास में काम कर रहे हैं। ये मामला देहरादून नगर निगम का है। यहां पूर्व नगर आयुक्त के आवासों पर भी नगर निगम के कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। निगम के विभिन्न अनुभागों में आउटसोर्स के माध्यम से 363 कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। इनमें 140 सफाई कर्मचारी हैं। जबकि इनके अलावा डेटा एंट्री ऑपरेटर और अन्य पदों पर 223 कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। बताया जा रहा रहा है कि निगम के ढांचे में आउटसोर्स के सौ पद ही स्वीकृत हैं। निगम ने भी अपने आदेश में इस बात का जिक्र किया है कि वर्तमान में नगर निगम द्वारा कंपनी के माध्यम से आउटसोर्स सृजित पद के सापेक्ष अधिक कर्मचारी तैनात हैं। बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि निगम में सौ आउटसोर्स कर्मचारियों के पद स्वीकृत होने के बावजूद निगम ने दोगुने से भी अधिक कर्मचारी किस आधार पर भर्ती कर लिए। अब नगर आयुक्त नमामी बंसल ने 56 आउटसोर्स कर्मचारियों को बाहर करने आदेश जारी किया है। सूची सार्वजनिक होते ही अनुभागों में हड़कंप मच गया है। नगर आयुक्त के मुताबिक, वार्डों में पार्कों के रख रखाव, सुरक्षा के लिए नए कर्मचारियों को भर्ती किया जाना है। जिन अनुभागों में जरूरत से ज्यादा कर्मचारी रखे गए हैं। वहां से कर्मचारियों को हटाने के आदेश जारी किए हैं।
देहरादून नगर निगम के चार कर्मचारी पूर्व मंत्री के आवास पर सेवारत हैं। हालांकि इन्हें फिलहाल नहीं हटाया गया है। एक कर्मचारी उच्च अधिकारी के आवास पर भी तैनात हैं। सवाल उठ रहा है क्या इन कर्मचारियों को भी हटाया जाएगा। शासन में नियुक्त एक अफसर के आवास पर एक कर्मचारी, पूर्व नगर आयुक्त के आवास पर तैनात एक कर्मचारी, शहरी विकास निदेशालय में सेवाएं दे रहे सात कर्मचारी, राजनीतिक दल के कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी के अलावा लोक निर्माण अनुभाग से 12, भूमि अनुभाग से 8, रिकॉर्ड से दो, फ्यूल स्टोर से तीन, जोनल कार्यालयों से पांच, विधि अनुभाग से दो, स्वास्थ्य से दो, कर अनुभाग से 4, वर्कशॉप से 4 और अन्य जगहों से 11 कर्मचारी हटाने का निर्णय लिया गया है।
नगर निगम अनुबंधित कंपनी आरके एसोसिएट्स के माध्यम से तैनात आउटसोर्स कर्मचारियों को प्रतिमाह न्यूनतम 12 हजार रुपये से लेकर अधिकतम बीस हजार रुपये वेतन का भुगतान कर रहा है। नगर निगम हर महीने आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन पर करीब 85 लाख रुपये खर्च करता है। सवाल उठ रहा है कि यदि निगम को जरूरत ही नहीं थी तो इन कर्मचारियों को क्यों और कैसे भर्ती किया गया।
Published on:
28 Jan 2026 11:00 am

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