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होली पर 122 साल बाद चंद्रग्रहण :  होलिका दहन की तिथि पर ज्योतिषों के दो मतों से बढ़ा संशय

Holi 2026 : 122 साल बाद इस बार होली पर खग्रास चंद्रग्रहण का साया पड़ रहा है। इसी के चलते ज्योतिषों में होलिका दहन की तिथि को लेकर दो मत सामने आ रहे हैं। कुछ ज्योतिष दो मार्च जबकि कुछ तीन मार्च को होलिका दहन को शुभ बता रहे हैं।

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Due to the lunar eclipse, astrologers have different opinions regarding the date of Holika Dahan this year

उत्तराखंड में इन दिनों होली की धूम मची हुई है

Holi 2026 : होली पर अबकी 122 साल बाद चंद्रग्रहण लग रहा है। चंद्रहण और भद्रा के कारण होली की तिथि को लेकर ज्योतिषियों के अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। बता दें कि उत्तराखंड में चीर बंधन के साथ एकादशी पर 27 फरवरी को होली की शुरुआत हो गई थी। राज्य के पर्वतीय इलाकों में इन दिनों होली की धूम मची हुई है। महिलाओं और पुरुषों की अलग-अलग टोलियां घर-घर पहुंचकर होली गायन कर रही हैं। गांव-गांव शहर-शहर होली के रंगों में सराबोर हो चुका चुका है। इसी बीच अब होलिका दहन की तिथि पर ज्योतिषियों  के भिन्न-भिन्न मत सामने आ रहे हैं। जागेश्वर धाम के ज्योतिष पंडित भैरव भट्ट और पंडित खीमानंद भट्ट के मुताबिक फाल्गुन पूर्णिमा दो मार्च की शाम 5:55 बजे 3 मार्च को शाम 5:07 बजे तक रहेगी। तीन मार्च को दोपहर 3:20 से शाम 6:47 बजे तक चंद्रग्रहण रहेगा। यह चंद्रग्रहण भारत में भी दृष्य रहेगा। इसी के चलते इसका सूतककाल भी मान्य होगा। ग्रहण से नौ घंटे पहले ही सूतककाल शुरू हो जाएगा। यानी कि सूतककाल सुबह 9:19 बजे शुरु हो जाएगा। इस बार 3 मार्च को चंद्रग्रहण का विशेष संयोग बन रहा है। करीब 122 साल पहले वर्ष 1904 में होली के दिन ऐसा ही चंद्रग्रहण देखा गया था। इसे खगोल विज्ञान और ज्योतिष दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं दूसरी ओर होलिका दहन की तिथि को लेकर ज्योतिषों के दो मतों से संशय भी बढ़ रहा है।

तीन मार्च को होलिका दहन पर ये मत

ज्योतिष भैरव दत्त भट्ट के अनुसार तीन मार्च को सूर्योदय से संध्या तक पूर्णिमा तिथि रहेगी। प्रदोष काल में भी पूर्णिमा का प्रभाव रहेगा। चंद्रग्रहण शाम 6:47 बजे समाप्त हो जाएगा। उनके अनुसार ग्रहण खत्म होने के बाद होलिका दहन करना शुभ रहेगा। उस समय भद्रा का प्रभाव भी नहीं रहेगा। 2 मार्च को शाम 5:55 बजे से भद्रा लग जाएगी। इस दिन चंद्रमा सिंह राशि में होंगे और भद्रा का निवास पृथ्वी में रहेगा। भद्रा के समय होलिका दहन अशुभ माना जाता है। उनके अनुसार तीन मार्च को सुबह 5:31 बजे तक भद्रा रहेगी। इसलिए इस दौरान होलिका दहन नहीं हो सकता है। ऐसे में 3 मार्च की शाम ग्रहण समाप्ति के बाद होलिका दहन-पूजा पाठ शुभ रहेगा। उनके अनुसार तीन मार्च को होलिका दहन के अगले दिन चार मार्च को होली (छलड़ी) मनाई जाएगी।

दो मार्च को दहन का ये तर्क

बदरीनाथ धाम के ज्योतिषाचार्य भुवन उनियाल के मुताबिक दो मार्च की शाम 6:22 बजे से 8:53 बजे तक होलिका दहन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस दौरान यद्वपि भद्रा है, लेकिन वह पुच्छ में है। उन्होंने अर्द्धरात्रि के बाद या तीन मार्च को होलिका दहन को उचित नहीं बताया है। उन्होंने कहा कि तीन मार्च को प्रतिपदा नहीं होने और चंद्रग्रहण होने के कारण विभूति धारणम नहीं हो पाएगा। उन्होंने कहा कि चार मार्च को ही छलेड़ी, धुलेड़ी और विभूति धारणम हो पाएगा। उन्होंने कहा कि तीन मार्च को खग्रास चंद्रग्रहण लगेगा। चंद्रग्रहण शाम 3:20 बजे से चंद्रग्रहण 6:47 बजे तक रहेगा। ग्रहण लगने के समय भारतवर्ष में चंद्रोदय नहीं होगा। भारत में शाम 6:17 बजे चंद्रमा के दर्शन होंगे। तब तक खग्रास चंद्रग्रहण लगभग समाप्त हो चुका होगा। तब केवल पूर्वी भारत जैसे असम, अरुणाचल और मिजोरम आदि राज्यों में थोड़ा पूर्ण चंदग्रहण दिख सकता है। गुजरात आदि राज्यों तक पहुंचने तक चंद्रग्रहण समाप्त हो चुका होगा।