
दरभंगा AIIMS का मेन गेट (फोटो - X@RoflGandhi_)
बिहार के दरभंगा में बन रहा AIIMS अस्पताल एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन कंस्ट्रक्शन की स्पीड की वजह से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर उड़ रहे मजाक की वजह से। राजधानी पटना में बने AIIMS के बाद बिहार में बनने वाला यह दूसरा AIIMS है। जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इन तस्वीरों में सिर्फ अस्पताल का मेन गेट दिख रहा है, जिसे लेकर देशभर में लोग तंज कस रहे हैं कि 10 साल बाद भी अस्पताल की जगह सिर्फ गेट ही बन पाया है।
AIIMS दरभंगा प्रोजेक्ट की घोषणा सबसे पहले 2015 में हुई थी। लंबे इंतजार, जमीन विवाद और प्रशासनिक दिक्कतों के बाद केंद्र सरकार ने 15 सितंबर 2020 को इसे औपचारिक रूप से मंजूरी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 नवंबर, 2024 को इसकी नींव रखी। अब एक साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी अब तक जमीन पर सिर्फ मेन एन्ट्रेंस गेट ही दिख रहा है, जिसने सोशल मीडिया यूजर्स को मीम्स बनाने का भरपूर मौका दे दिया।
वायरल पोस्ट में AIIMS दरभंगा की तुलना AIIMS राजकोट और दूसरे राज्यों में बने दूसरे AIIMS से की जा रही है, जहां हॉस्पिटल निर्माण का काम काफी तेजी से पूरा हुआ था। कई यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि AIIMS दरभंगा में कंस्ट्रक्शन की रफ्तार इतनी धीमी क्यों है, खासकर तब जब केंद्र सरकार का दावा है कि उसने 2014 से 19 नए AIIMS को मंजूरी दी है।
हालांकि, कुछ लोग इसे नेगेटिव पब्लिसिटी कह रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि बिहार में सालों से बड़े हेल्थकेयर संस्थानों की कमी रही है और AIIMS दरभंगा के गेट का बनना इस बात का संकेत है कि आखिरकार जमीनी काम शुरू हो गया है।
AIIMS दरभंगा बिहार का दूसरा AIIMS होगा। इसे 187 एकड़ जमीन पर लगभग 1264 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है। पूरा होने पर, इसमें 750 बेड का हॉस्पिटल, 100 MBBS सीटें, 60 नर्सिंग सीटें, 15-20 सुपर-स्पेशियलिटी डिपार्टमेंट और रोरोजाना लगभग 2000 OPD और 1000 IPD मरीजों के इलाज की सुविधा होगी।
इस संस्थान को IIT दिल्ली और IIT रुड़की के सहयोग से डिजाइन किया गया है, और इसकी बाउंड्री वॉल को बाढ़ से सुरक्षा के लिए तटबंध जैसी संरचना के रूप में बनाया गया है। AIIMS दरभंगा से न सिर्फ उत्तरी बिहार के मरीजों को, बल्कि नेपाल और पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों को भी फायदा होने की उम्मीद है। इससे इस क्षेत्र में रोजगार और निवेश के नए अवसर भी पैदा होंगे।
AIIMS दरभंगा के निर्माण में देरी का सबसे बड़ा कारण जमीन का चुनाव और ट्रांसफर रहा है। शुरुआती सालों में, कई जगहों को अनुपयुक्त पाया गया। आखिरकार, शोभन बाईपास पर 187.44 एकड़ जमीन फाइनल की गई, जिसे बिहार सरकार ने अगस्त 2024 में स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंप दिया। इसके बाद, मॉनसून, बिहार विधानसभा चुनाव, हाई-टेंशन पावर लाइनों को शिफ्ट करने, चार-लेन अप्रोच रोड और DPR में लागत बढ़ने जैसी समस्याओं ने प्रोजेक्ट को और धीमा कर दिया।
AIIMS दरभंगा के कार्यकारी निदेशक डॉ. माधवानंद कर का कहना है कि सभी बाधाओं के बावजूद, निर्माण कार्य अब शुरू हो गया है और बिल्डिंग के 2028 के अंत तक तैयार होने की उम्मीद है। हालांकि, मौजूदा स्थिति को देखते हुए, पहला एकेडमिक सेशन 2027 से पहले शुरू होने की संभावना नहीं है।
जहां AIIMS दरभंगा का गेट सोशल मीडिया पर मजाक का विषय बन गया है, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि उत्तरी बिहार के लाखों लोग बेहतर इलाज के लिए अभी भी पटना या दिल्ली जाने को मजबूर हैं। इसलिए, लोगों में AIIMS दरभंगा को लेकर निराशा और उम्मीद दोनों हैं।
एक यूजर ने लिखा, "10 साल बाद, AIIMS दरभंगा का शानदार मेन गेट बन गया है, अब बस इसके अंदर एक छोटा सा अस्पताल बनाना बाकी है।" दूसरे ने लिखा, "प्लानिंग जबरदस्त है। सालों की कड़ी रिसर्च का शानदार नतीजा मिला है। वास्तुकला का यह कमाल देखिए। एक तरफ से (गेट से) एम्बुलेंस अंदर आएंगी, दूसरी तरफ से बाहर जाएंगी। ऐसा शानदार आइडिया कौन सोच सकता था! (बस AIIMS दरभंगा के 2047 के आसपास तैयार होने का इंतजार है)।"
एक यूजर ने लिखा, "आप इसे सिर्फ एक एंट्रेंस गेट समझते हैं..लेकिन असल में मोदी जी ने इस स्ट्रक्चर के अंदर एक बड़ा MRI स्कैनर लगाकर इसे बनाया है.. जो भी इस एंट्रेंस से गुजरेगा, उसका पूरा स्कैन होगा और नतीजे डॉक्टरों को भेजे जाएंगे.. मोदी जी रॉक्स.. दुनिया शॉक्ड।" एक और यूजर ने लिखा, "बिहार के लोगों को बधाई। 10 साल में दरभंगा AIIMS के गेट के खंभे पूरे हो गए हैं। अब बस AIIMS की बिल्डिंग बनानी बाकी है। उसके बाद, डॉक्टरों को हायर करना होगा। फिर, आपका इलाज तुरंत शुरू हो सकता है।"
Published on:
28 Jan 2026 08:36 am
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