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दंतेवाड़ा, May 29, 2026

Dantewada Heritage: दंतेवाड़ा की धरती से निकला इतिहास का खजाना, संस्कृति मंत्रालय की बड़ी खोज

Chhattisgarh Historical Discoveries: ज्ञानभारतम् मिशन के तहत दंतेवाड़ा जिले में ऐतिहासिक सफलता मिली है। व्यापक सर्वेक्षण के दौरान कई महत्वपूर्ण प्राचीन शिलालेख और दुर्लभ पांडुलिपियां खोजी गई हैं, जो बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पहचान देंगी।

Dantewada Heritage

ज्ञानभारतम् मिशन की बड़ी सफलता (photo source- Patrika)

Dantewada Heritage: भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ज्ञानभारतम् मिशन के तहत छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। जिले में व्यापक सर्वेक्षण के दौरान कई अत्यंत महत्वपूर्ण प्राचीन शिलालेख और दुर्लभ पांडुलिपियां खोजी गई हैं। ये खोजें बस्तर क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास, प्राचीन लिपियों और समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को नए सिरे से परिभाषित करने में मील का पत्थर साबित होंगी।

Dantewada Heritage: ’प्राचीन शिलालेखों और पांडुलिपियों ने खोले बस्तर के गौरवशाली अतीत के द्वार’

वन एवं जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर दंतेवाड़ा जिला प्रशासन की पूरी टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक बहुत बड़ी पहल है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को अपनी ऐतिहासिक जड़ों को गहराई से समझने का अवसर मिलेगा।

’शिक्षकों और अधिकारियों की टीम कर रही है जमीनी सर्वे’

दंतेवाड़ा कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के निर्देशन में जिले में इस मिशन का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। जिला नोडल अधिकारी एवं एसडीएम के नेतृत्व में मास्टर ट्रेनर्स, विकासखंड स्तरीय नोडल अधिकारियों और संकुल स्तर के शिक्षकों की एक विशेष टीम लगातार जिले के ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों का गहन सर्वेक्षण कर रही है।

’सर्वेक्षण में अब तक मिलीं ये बहुमूल्य धरोहरें’

सर्वेक्षण दल को अब तक कुल 5 प्राचीन शिलालेख और 2 महत्वपूर्ण पांडुलिपियां प्राप्त हो चुकी हैं, जिनमें समलूर का शिव मंदिर में 11वीं शताब्दी का एक दुर्लभ तेलुगु शिलालेख और इसी कालखंड का एक देवनागरी शिलालेख मिला है। इसके अलावा मंदिर परिसर से ही 18वीं से 20वीं शताब्दी के मध्य की देवनागरी लिपि में लिखित एक प्राचीन पांडुलिपि भी बरामद हुई है।

बारसूर का मामा-भांजा मंदिर ऐतिहासिक दृष्टि से प्रसिद्ध इस मंदिर से 1060 से 1068 ईस्वी कालखंड का एक बेहद महत्वपूर्ण तेलुगु शिलालेख मिला है। दंतेश्वरी मंदिर (दंतेवाड़ा) में 13वीं शताब्दी के प्रारंभिक काल के दो प्राचीन शिलालेख मिले हैं। इन शिलालेखों की खास बात यह है कि इनमें तेलुगु और देवनागरी, दोनों ही लिपियों का मिश्रित प्रयोग देखने को मिलता है।

Dantewada Heritage: ’बस्तर की ऐतिहासिक महत्ता’

ये नई कड़ियां इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि बस्तर क्षेत्र प्राचीन काल से ही ज्ञान, लिपि, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं का एक वैश्विक केंद्र रहा है। आंवराभाटा क्षेत्र में एक बेहद दुर्लभ ताड़पत्र पांडुलिपि मिली है। प्रारंभिक आकलनों के अनुसार यह करीब 150 से 300 वर्ष पुरानी है और इसमें ओडिया लिपि का उपयोग किया गया है।

वर्तमान में जिला प्रशासन द्वारा इन सभी अमूल्य ऐतिहासिक धरोहरों के वैज्ञानिक संरक्षण, डिजिटलाइजेशन, दस्तावेजीकरण और आगे के गहन अध्ययन के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। ज्ञानभारतम् मिशन के इन प्रयासों से दंतेवाड़ा का छिपा हुआ गौरवशाली इतिहास अब दुनिया के सामने आ रहा है।

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