26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

दंतेवाड़ा की बुधरी ताती को पद्मश्री पुरस्कार, अबूझमाड़ और दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में जलाई शिक्षा–स्वास्थ्य की मशाल, जानिए उनके बारे में..

Padma Awards 2026: अबूझमाड़ और दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण व नशा मुक्ति के लिए समर्पित दंतेवाड़ा की बुधरी ताती को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा..

2 min read
Google source verification
budhari tati, Padmashree Award

दंतेवाड़ा की बुधरी ताती को पद्मश्री पुरस्कार ( Photo - Patrika )

Padma Awards 2026: बस्तर अंचल के लिए यह गर्व का क्षण है। दंतेवाड़ा जिले के हीरानार गांव की रहने वाली समाजसेवी बुधरी ताती ( Budhari Tati ) को भारत सरकार ने पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की है। दशकों तक अबूझमाड़ और दूरस्थ वनांचल इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और नशामुक्ति के लिए किए गए उनके अथक प्रयासों के बाद अब उन्हें पद्मश्री से नवाजा जाएगा।आइए जानते हैं उनके बारे में..

संघर्षों के बीच शुरू हुई बदलाव की यात्रा

वर्ष 1986 में बुधरी ताती ने दंतेवाड़ा के हीरानार गांव से समाज सेवा की राह पकड़ी। उस दौर में यह इलाका शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से बेहद पिछड़ा हुआ था। संसाधनों की कमी, अशिक्षा और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। ग्रामीणों को शिक्षा से जोड़ना, समाज में जागरूकता फैलाना और लोगों को एकजुट करना उनका उद्देश्य रहा। उनके निरंतर प्रयासों से आज क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर सोच में सकारात्मक बदलाव नजर आने लगा है।

महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष जोर

बुधरी ताती ने आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बचत, स्वरोजगार और समूह गतिविधियों को बढ़ावा दिया। उन्होंने महिलाओं को आर्थिक मजबूती का महत्व समझाया और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही नशामुक्ति अभियान के तहत वे गांव-गांव पहुंचीं और परिवारों से संवाद कर नशे के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया। उनका मानना रहा है कि समाज में स्थायी परिवर्तन तभी संभव है, जब परिवार खुद बदलाव की पहल करे।

किराए के मकान से शुरू हुआ छात्रावास, आज बन चुका मिसाल

अपने कार्यों को और मजबूत करने के लिए बुधरी ताती ने नागपुर स्थित वनवासी कल्याण आश्रम से प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उन्होंने रायपुर और जगदलपुर में रहकर अनुभव हासिल किया। जगदलपुर के भनपुरी क्षेत्र में उन्होंने किराए के मकान में एक छोटे छात्रावास की शुरुआत की, जो आगे चलकर “रानी दुर्गावती छात्रावास” के नाम से जाना गया। इस छात्रावास से जुड़े कई विद्यार्थी आज डॉक्टर, शिक्षक और विभिन्न सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं।

पद्मश्री समाज की सेवा का सम्मान

पद्मश्री मिलने पर प्रतिक्रिया देते हुए बुधरी ताती ने कहा कि यह सम्मान उनका व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे समाज का है। उन्होंने बताया कि अबूझमाड़ और दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में वर्षों तक की गई सेवा को यह पहचान मिली है। उनके अनुसार, उनके द्वारा शिक्षित बच्चे आज समाज में सकारात्मक भूमिका निभा रहे हैं, यही उनकी सबसे बड़ी सफलता है।

दंतेवाड़ा की इस समर्पित समाजसेवी को मिला पद्मश्री पुरस्कार उन सभी लोगों के प्रयासों को सम्मान देता है, जो कठिन परिस्थितियों में भी वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और जागरूकता की रोशनी फैलाने में जुटे हुए हैं।

सम्मान मिलने से मैं समाज की आभारी हूं: बुधरी ताती

दंतेवाड़ा जिला के गीदम से करीब दस किमी दूर हीरानार गांव है। इस गांव की निवासी बुधरी ताती को रविवार की दोपहर मोबाइल पर एक संदेश आया कि आप को भारत सरकार ने पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना है। वे कुछ समझ पाती इससे पहले ही काल डिस्कनेक्ट हो गया। लेकिन इसके बाद लगातार उनका मोबाइल घनघनाने लगा। बुधरी ताती ने बताया कि जब लोगों ने उन्हें बधाई व शुभकामनाएं देना शुरू कर दिया तब पता चला कि उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री के लिए चयनित किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जो सम्मान दिया है व समाज को दिया है, समाज से जो सम्मान मिला है उसके लिए मैं समाज की आभारी हूं।