
दमोह में कविताएं सुनाएंगे हरिओम पवार
Damoh- देश-प्रदेश के लोगों को बुंदेलखंड की संस्कृति से रूबरू होने का मौका मिलनेवाला है। यहां के दमोह जिले में नोहटा स्थित नोहलेश्वर मंदिर परिसर में नोहलेश्वर महोत्सव इस वर्ष ज्यादा भव्यता के साथ मनाया जाएगा। प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने बताया कि इस 5 दिवसीय महोत्सव का शुभारंभ सीएम मोहन यादव करेंगे। इस महोत्सव में कला, संस्कृति, साहित्य एवं भक्ति संगीत जगत की ख्यातनाम हस्तियां अपनी प्रस्तुतियां देंगी। कवि सम्मेलन में हरिओम पवार भी आएंगे और सुप्रसिद्ध गायक कैलाश खेर भी महोत्सव में अपनी प्रस्तुति देंगे।
नोहलेश्वर महोत्सव 11 से 15 फरवरी तक चलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इसका शुभारंभ करेंगे। संस्कृति विभाग द्वारा बुंदेलखंड की धार्मिक आस्था के केंद्र पर होने जा रहे समूचे आयोजन को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रहीं हैं। यहां आने वाले प्रदेश और देश के श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए स्थानीय प्रशासन तैयारी में जुटा हुआ है।
राज्य मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने बताया कि नोहलेश्वर महोत्सव में प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर जहां भक्ति गीत प्रस्तुत करेंगे, वहीं भगवान भोलेनाथ के शिव तांडव नृत्य, शास्त्रीय नृत्य, जय श्रीराम नृत्य नाटिका आदि मनभावन प्रस्तुतियां भी होंगी। अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में हरिओम पवार, जानी बैरागी जैसे विख्यात राष्ट्रीय कवि रचना पाठ करेंगे। समापन समारोह में प्रसिद्ध भजन गायिका आशा वैष्णव प्रस्तुति देंगी।
नोहलेश्वर महोत्सव की शुरुआत 2 वर्ष पूर्व की गई थी। राज्य के संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने बताया कि इस वर्ष महोत्सव की भव्यता और बढ़ाई जा रही है। नोहलेश्वर महोत्सव में हॉट एयर बलून जैसी रोमांचक गतिविधियां भी होंगी।
राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि हमारा प्रयास है कि महोत्सव के माध्यम से प्रदेश और देश में बुंदेलखंड की विशेष पहचान बने। उन्होंने लोगों से इस आयोजन में शामिल होकर बुंदेलखंड की कला संस्कृति से रूबरू होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आस्था के साथ ही महोत्सव समूचे परिवार के लिए मनोरंजन का केंद्र भी होगा।
मध्यप्रदेश का बुंदेलखंड इलाका अपने गौरवशाली इतिहास और समृद्धशाली परंपराओं के लिए समूचे भारत में अलग पहचान रखता है। बुंदेलखंड की शौर्य गाथाएं और सांस्कृतिक कला कौशल का वर्णन देश के साहित्यकारों, कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से बखूबी किया है। यहां की संस्कृति आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है।
Updated on:
30 Jan 2026 03:25 pm
Published on:
30 Jan 2026 03:08 pm

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