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फर्जी दस्तावेजों से कराया नामांतरण, महिला को सात साल की सजा

रतलाम. फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र व शपथ पत्र लगाकर फर्जी तरीके से हाउसिंग बोर्ड में मकान का नामांतरण करवाने वाली महिला लालीबाई पति रामा (65) निवासी संदला को सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव की अदालत ने भादसं की धारा 419 में 3 वर्ष, 467 व धारा 468 में 7- 7 वर्ष व धारा 471 […]

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रतलाम

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Kamal Singh

Feb 14, 2026

चित्तौडग़ढ़ निवासी राजशेखर पिता घनश्याम ने थाना दीनदयाल नगर थाने पर दर्ज कराई थी रिपोर्ट

चित्तौडग़ढ़ निवासी राजशेखर पिता घनश्याम ने थाना दीनदयाल नगर थाने पर दर्ज कराई थी रिपोर्ट

रतलाम. फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र व शपथ पत्र लगाकर फर्जी तरीके से हाउसिंग बोर्ड में मकान का नामांतरण करवाने वाली महिला लालीबाई पति रामा (65) निवासी संदला को सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव की अदालत ने भादसं की धारा 419 में 3 वर्ष, 467 व धारा 468 में 7- 7 वर्ष व धारा 471 में 2 वर्ष की सजा सुनाई है। महिला ने रतनबाई की जगह लालीबाई बनकर हाऊसिंग बोर्ड के मकान की करवा दी थी। निर्णय के समय लालीबाई न्यायालय में उपस्थित नहीं थी। उसका सजा वारंट जारी किया गया है।

अपर लोक अभियोजक समरथ पाटीदार ने बताया 27 जनवरी 2016 को फरियादी राजशेखर पिता घनश्याम निवासी चित्तौडग़ढ़ ने दीनदयाल नगर थाने पर हाऊसिंग बोर्ड के तत्कालीन कार्यपालन यंत्री डीके बाथम, सम्पत्ति कर अधिकारी पवन धबाड़े, कर्मचारी नानालाल बामनिया व मनोहरलाल शर्मा, दलाल रमेश शर्मा, पप्पू शर्मा, अशोक दय्या व लालीबाई (फर्जी महिला) एवं अन्य के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के लिए आवेदन दिया था। उसने बताया था कि दीनदयाल नगर (अमृत सागर) में स्थित मकान नं. डी-232 वर्ष 1992-93 में उनकी नानी कमला बाई पति मोतीलाल उपाध्याय के नाम से खरीदा गया था। 2006 में नानी की मृत्यु होने के बाद उस मकान पर मां रतनबाई पुरोहित का कब्जा था। अशोक दय्या, रमेश शर्मा व हाउसिंग बोर्ड के कर्मचारियों ने मिलकर 11 अप्रेल 2015 को लालीबाई निवासी मिल्लत नगर (फर्जी महिला व फर्जी पता) के साथ मिलकर लालीबाई ने कमला बाई को उसकी माँ बताकर फर्जी शपथ पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र पेश कर धोखाधड़ी करते लालीबाई के नाम करवा लिया। इसके बाग यह मकान 10 सितंबर 2015 को लालीबाई ने कमलेश पिता कैलाश पाटीदार ग्राम मांगरोल को 6 लाख 11 हजार रुपए में बेच दिया। पुलिस ने केस दर्ज कर विवेचना के बाद चालान न्यायालय में पेश किया जहां से उक्त सजा सुनाई गई।

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सभी दस्तावेज फर्जी पाए गए

पुलिस जांच में पाया गया कि कमलाबाई के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र में लालीबाई को उसकी पुत्री बताया। मृत्यु प्रमाण पत्र में जो नंबर दर्ज थे उस नंबर पर जमीलउद्दीन पिता कमरुद्दीन निवासी मिल्लत नगर का नाम नगर निगम में दर्ज था। फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र से फर्जी नामांतरण आवेदन हाउसिंग बोर्ड कार्यालय में लगाया जिसमें लालीबाई के सभी पते फर्जी लिखे हुए थे। फोटो भी फर्जी लगाया गया था, नामांतरण में लगाया गया वोटर आईडी का मिलान निर्वाचन कार्यालय में कराने पर वह भी फर्जी पाया गया। दस्तावेजों में लालीबाई पति रामजी राठौर (तेली) नाम दर्ज था व सभी पते भी फर्जी थे। यही नहीं नामांतरण में गवाह भी फर्जी थे। फर्जी दस्तावेज से लालीबाई के नाम पर मकान का फर्जी नामांतरण भी हाउसिंग बोर्ड से हो गया। नामांतरण होने के दो माह बाद ही लालीबाई ने मकान कमलेश पाटीदार को बेच दिया, जबकि हाउसिंग बोर्ड के नियमानुसार नामांतरण के एक वर्ष तक मकान का विक्रय नहीं किया जा सकता है।

समझौता भी हो गया था

पुलिस द्वारा जांच पूर्ण कर अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय में केस की सुनवाई की दौरान फरियादी राजशेखर व उसकी माता कमलाबाई ने 23 जुलाई 2024 को न्यायालय में लिखित समझौता लालीबाई के पक्ष में पेश कर दिया था।