
प्रियांक खरगे
बेलगावी. कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा के चोरला घाट मार्ग पर अक्टूबर में हुई 400 करोड़ रुपए की कथित लूट अब केवल अपराध की घटना नहीं रही, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। आरोप है कि गोवा से बेलगावी की ओर जा रहे दो ट्रकों में 2000 रुपए के अमान्य नोट भरे थे, जिन्हें हाईजैक कर लूट लिया गया। इस सनसनीखेज मामले ने राज्य और केंद्र की राजनीति में तीखा तूफान खड़ा कर दिया है।
ताजा घटनाक्रम में एक ऑडियो क्लिप सामने आई है, जिसमें महाराष्ट्र के उद्यमी किशोर और जयेश के बीच बातचीत दर्ज है। इसमें कथित तौर पर एक "गुजरात के बड़े राजनेता" की मध्यस्थता का उल्लेख है। इससे यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या यह धन किसी गुजरात के राजनेता का था या नोट बदलने के अवैध कारोबार से जुड़ा हुआ था।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा नेता और विधान परिषद में विपक्ष के नेता छलवादी नारायणस्वामी ने आरोप लगाया कि यह पैसा कांग्रेस का था और कर्नाटक को कांग्रेस का एटीएम बना दिया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री सदानंद गौड़ा ने भी इस बयान का समर्थन करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार राज्य में धन इकट्टा कर अन्य चुनावों में भेज रही है। वहीं मंत्री भैरती सुरेश ने पलटवार करते हुए पूछा कि क्या नोटों पर कांग्रेस लिखा हुआ था?
ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री प्रियांक खरगे ने केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर नकदी की आवाजाही के बावजूद खुफिया एजेंसियां क्या कर रही थीं? गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा—तीनों भाजपा शासित राज्य हैं, फिर भी यह खेप सीमा पार कैसे कर गई? उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को तो छोटे-छोटे मुद्दों की जानकारी रहती है, लेकिन इतनी बड़ी नकदी की आवाजाही पर केंद्र सरकार की आंखें बंद क्यों थीं? क्या अमित शाह सो रहे थे?
बेलगावी जिला प्रभारी मंत्री सतीश जारकीहोली ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र पुलिस हमारे साथ सहयोग नहीं कर रही है। वहीं गृह मंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने कहा कि मामले में कई स्तरों पर भ्रम है और कर्नाटक पुलिस महाराष्ट्र पुलिस के संपर्क में है। फिलहाल कर्नाटक में एफआईआर दर्ज नहीं हुई है, लेकिन तीनों राज्यों की पुलिस मिलकर जांच कर रही है।
इस बीच भाजपा नेताओं ने दावा किया कि कांग्रेस कर्नाटक को "एटीएम" की तरह इस्तेमाल कर रही है और यहां से अन्य राज्यों के चुनावों के लिए धन भेजा जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने इसे सिरे से नकारते हुए भाजपा पर ही सवाल खड़े किए हैं कि भाजपा शासित राज्यों की सीमाओं से इतनी बड़ी नकदी कैसे गुजर गई।
कुल मिलाकर, चोरला घाट की यह 400 करोड़ रुपए की कथित लूट अब केवल अपराध की घटना नहीं रही, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन गई है। "गुजरात के राजनेता" की पहचान और धन का असली मालिक कौन था—यही सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
Published on:
27 Jan 2026 08:43 pm
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