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Dowry Free Marriage: सरदारशहर के शिक्षक ने पेश की अनूठी मिसाल, बेटे की शादी में नहीं लिया एक भी रुपया

सरदारशहर के दल्लूसर निवासी शिक्षक गौरीशंकर सिहाग ने अपने पुत्र धीरज का विवाह बिना दहेज के संपन्न कर समाज को प्रेरणा दी है।

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धीरज और उर्मिला

Churu: आज के दौर में जहां शादियां दिखावे और भारी-भरकम दहेज का जरिया बनती जा रही हैं, वहीं जिले के सरदारशहर तहसील के दल्लूसर गांव से एक सुकून देने वाली तस्वीर सामने आई है। शिक्षक संघ शेखावत के वरिष्ठ सदस्य और पूर्व तहसील अध्यक्ष गौरीशंकर सिहाग ने अपने पुत्र धीरज के विवाह को पूरी तरह 'दहेज मुक्त' रखकर समाज के सामने एक गौरवशाली मिसाल पेश की है।

कुप्रथा पर भारी पड़े संस्कार

धीरज का विवाह 10 फरवरी 2026 को भावलदेसर निवासी जुगलाल खोथ की पुत्री उर्मिला के साथ संपन्न हुआ। इस विवाह की खास बात यह रही कि गौरीशंकर सिहाग ने टीके की रस्म से लेकर विदाई तक, किसी भी तरह के लेन-देन या दहेज को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने समाज को यह संदेश दिया कि संस्कारों से सजी शादियां ही समाज की असली पूंजी हैं।

सिहाग परिवार की गौरवशाली परंपरा

दहेज मुक्त विवाह की यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि सिहाग परिवार के लिए यह एक परंपरा बन चुकी है:

  • साल 2018 व 2020: गौरीशंकर सिहाग ने अपनी दो पुत्रियों का विवाह बिना दहेज के किया।
  • साल 2020: एक साथ अपने तीन भतीजों की शादी भी बिना किसी लेन-देन के करवाकर सादगी का परिचय दिया।
  • अब 2026: अपने पुत्र धीरज की शादी को भी इसी रीति से संपन्न कर उन्होंने अपनी प्रगतिशील सोच पर मुहर लगा दी।

समाज में सराहना

पूरे सिहाग परिवार द्वारा एकजुट होकर दहेज रूपी कुप्रथा का त्याग करने की इस पहल की क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है। समाज के प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि अगर हर परिवार ऐसी सोच अपना ले, तो समाज से दहेज का कलंक पूरी तरह मिट सकता है।