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चूरू, May 07, 2026

Irrigation Innovation : अब सूरज उगते ही चलने लगे खेत, सौर ऊर्जा बनी किसानों की ताकत 

इससे खरीफ और रबी दोनों सीजन की फसलों में उत्पादन बढ़ा है और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों की सफलता अब अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।

सादुलपुर. तहसील क्षेत्र में सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई प्रणाली (Solar Energy Based Irrigation System) किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। जहां पहले किसान वर्षा आधारित बारानी खेती पर निर्भर थे, वहीं अब सोलर संयंत्रों की मदद से सालभर सिंचाई संभव हो रही है। इससे खरीफ और रबी दोनों सीजन की फसलों में उत्पादन बढ़ा है और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों की सफलता अब अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।

बदला समय, बदली खेती की नजीर
गांव ढाणी खुडानी निवासी किसान प्रेम कुमार ने नवंबर 2025 में अपनी 2.70 हेक्टेयर असिंचित भूमि पर सोलर संयंत्र स्थापित किया और स्प्रिंकलर प्रणाली से सिंचाई शुरू की। अब उन्हें खरीफ सीजन में करीब 75 हजार रुपए और रबी में 1.85 लाख रुपए तक आय हो रही है। पहले वे वर्षा आधारित खेती करते थे, जिसमें खरीफ से 50-60 हजार रुपए और रबी में औसतन 15 हजार रुपए की आय ही हो पाती थी। वर्तमान में वे सालाना करीब 2 लाख रुपए तक मुनाफा कमा रहे हैं।

इसी गांव के किसान उम्मेद सिंह ने नवंबर 2024 में उद्यानिकी विभाग की प्रेरणा से सोलर संयंत्र लगवाया। पहले उनकी 2.50 हेक्टेयर भूमि पर वर्षा आधारित खेती होती थी, जिससे खरीफ में करीब 40 हजार और रबी में मात्र 10 हजार रुपए आय होती थी। सोलर संयंत्र लगने के बाद खरीफ में 70 हजार और रबी में 85 हजार रुपए तक आय होने लगी। वर्ष 2024-25 और 2025-26 में रबी सीजन की आय बढ़कर 1.65 लाख रुपए तक पहुंच गई। कुल आय में करीब 1.40 लाख रुपए की बढ़ोतरी हुई है।

किसानों ने बताया सफलता का राज
दोनों किसानों ने बताया कि उद्यानिकी विभाग के सहायक कृषि अधिकारी ने उन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर मार्गदर्शन किया। साथ ही उन्नत बीज चयन, बीज उपचार, पौध संरक्षण, संतुलित खाद-उर्वरक उपयोग और वैज्ञानिक सिंचाई प्रबंधन अपनाने की सलाह दी। इन सफल प्रयोगों को देखकर आसपास के किसान भी सोलर संयंत्र अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं, जिससे आधुनिक तकनीक का प्रसार होने के साथ किसानों की सोच में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।

इनका कहना है
रेतीली दोमट भूमि में सौर ऊर्जा आधारित फव्वारा सिंचाई अत्यंत प्रभावी साबित हो रही है। आने वाले समय में इस मॉडल से किसानों की आय में और वृद्धि की संभावना है। राजवीर सिंह मितड़, सहायक कृषि अधिकारी, उद्यानिकी विभाग, सादुलपुर

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