चित्तौड़गढ़, May 31, 2026

कदमाली बांध चित्तौड़गढ़, पत्रिका फोटो
Dam Renovation Project Rajasthan: चित्तौड़गढ़ जिले के किसानों के लिए खुशखबर है। पिछले 22 वर्षों से रख-रखाव और बजट के अभाव में जर्जर हो रहे जिले के 11 बांधों का अब जल्द ही कायाकल्प होने वाला है। वर्ष 2003 में पंचायतीराज विभाग को सौंपे गए इन बांधों को जलसंसाधन विभाग ने वापस ले लिया है।
राज्य सरकार ने इन 11 बांधों की मरम्मत और जीर्णोद्धार के लिए 30 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया है। इन बांधों के जीर्णोद्धार के बाद जिले की 1899 हेक्टेयर सूखी जमीन को सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिल सकेगा। विधायकों की अनुशंसा पर जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने स्वीकृति जारी की है।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2003 में सरकार ने 300 हेक्टेयर से कम सिंचाई क्षमता वाले छोटे बांधों की देखरेख का जिम्मा पंचायतीराज विभाग को सौंप दिया था। मंशा यह थी कि स्थानीय स्तर पर बांधों का प्रबंधन बेहतर होगा, लेकिन तकनीकी विशेषज्ञता और पर्याप्त बजट की कमी से यह बांध धीरे-धीरे जर्जर होते चले गए।
नहरें टूट गईं, पाल कमजोर हो गई और भराव क्षमता कम होने लगी। आखिरकार, बांधों की इस बदहाली को देखते हुए वर्ष 2025 में जिले के 50 बांधों को पंचायतीराज विभाग से वापस जलसंसाधन विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया। अब पहले चरण में 11 बांधों के कायाकल्प की पटकथा तैयार हो चुकी है।
चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभानसिंह आक्या के विधानसभा क्षेत्र के भड़किया बांध, गुणेर बांध, बरखेडी बांध, दहीखेडा 4 बांधों के लिए 10 करोड़ रुपए, विधायक अर्जुनलाल जीनगर की अनुंशसा पर कपासन विधानसभा क्षेत्र के करजिया बांध, रायपुरिया बांध, उसरोल बांध, जाशमा-द्वितीय, मुंगाना कुल 5 बांधों के लिए 10 करोड़ रुपए, विधायक डॉ. सुरेश धाकड़ की अनुशंसा पर बेगूं विधानसभा क्षेत्र के कदमाली व नाहरगढ़ बांध के लिए दस करोड़ रुपए की स्वीकृति जारी हुई है।
इस पूरे प्रोजेक्ट में सबसे अनोखा और आधुनिक प्रयोग कदमाली बांध पर होने जा रहा है। पारंपरिक रूप से बांधों से पानी खेतों तक पहुंचाने के लिए नहरों का निर्माण किया जाता है, जिसमें पानी का एक बड़ा हिस्सा रिसने और वाष्पीकरण के कारण बर्बाद हो जाता है। जलसंसाधन विभाग ने इस बार पुरानी लीक से हटकर सोचने का फैसला किया है।
कदमाली बांध पर अब टूटी-फूटी नहरों की मरम्मत पर पैसा बर्बाद नहीं किया जाएगा। इसके बजाय, यहां आधुनिक फ्वारा पद्धति विकसित की जाएगी, जो सोलर से चलेगी। इससे न केवल पानी की हर एक बूंद का सही उपयोग होगा, बल्कि कम पानी में दोगुनी जमीन को सींचा जा सकेगा। यह कदम भविष्य की जलसंकट की चुनौतियों से निपटने में मील का पत्थर साबित होगा।
| क्रमांक | बांध का नाम | संभावित सिंचाई क्षेत्र (हेक्टेयर) |
|---|---|---|
| 1 | कदमाली | 144 |
| 2 | बरखेड़ी | 276 |
| 3 | भडकिया | 106 |
| 4 | दही खेड़ा | 137 |
| 5 | गुणेल | 264 |
| 6 | जाशमा | 2174 |
| 7 | मुंगाना | 175 |
| 8 | रायपुरिया | 138 |
| 9 | करजिया | 102 |
| 10 | नाहरगढ़ | 227 |
| 11 | उसरोल | 156 |
| कुल | 11 बांध | 3,899 हेक्टेयर |
डीपीआर तैयार की जा रही है
पंचायतीराज से जलसंसाधन विभाग केा हस्तातंरित हुए 11 बांधों के जीर्णाेद्वार व मरम्मत के लिए 30 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली है। डीपीआर तैयार की जा रही है, स्वीकृति मिलते है निविदा की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। कदमाली बांध पर सोलर से संचालित फव्वारा सिंचाई पद्धति का निर्माण किया जाएगा। इन बांधों की मरम्मत से करीब 1899 हेक्टयर में सिंचाई होगी ।
राधेश्याम जाट, अधिशाषी अभियंता, जलसंसाधन विभाग चित्तौड़गढ़
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Published on: 31 May 2026 10:44 am

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