
खेत के ऊपर तानी गई नेट और निगरानी करता सीसीटीवी कैमरा। फोटो पत्रिका
भदेसर (चित्तौड़गढ़)। मेवाड़ की धरा पर इन दिनों अफीम के खेतों में सफेद फूलों की चादर बिछी है। फसल अपने पूरे यौवन पर है, लेकिन इस 'सफेद सोने' की चमक ने किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है। फसल को चोरों, आवारा पशुओं और नशेड़ी तोतों से बचाने के लिए किसानों ने अब पारंपरिक तरीकों को छोड़कर हाईटेक सुरक्षा घेरा तैयार कर लिया है।
होड़ा क्षेत्र के किसान उदयलाल माली अब घर बैठे अपने खेत की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने खेत की मेड़ पर सोलर पैनल और सीसीटीवी कैमरे इंस्टॉल किए हैं। तकनीक ऐसी कि अगर रात के अंधेरे में कोई परिंदा भी खेत की तरफ फटकता है, तो उदयलाल के मोबाइल पर तुरंत अलर्ट का सायरन बज उठता है। उदयलाल गर्व से कहते हैं अबे दरपणी की वात री, मोबाइल में सब दीके है।
इंसानों से ज्यादा खतरा उन नशेड़ी तोतों से है, जो अफीम के डोडे से दूध चुराने के आदी हो चुके हैं। बंसीजी का खेड़ा के भैरूलाल धाकड़ बताते हैं कि ये तोते अब शोर से भी नहीं डरते। इनसे निपटने के लिए किसानों ने पूरे खेत के ऊपर सफेद और हरी प्लास्टिक की जालियों का हवाई किला तान दिया है। हालांकि इसमें प्रति बीघा हजारों का अतिरिक्त खर्च आ रहा है, लेकिन बेशकीमती उपज बचाने के लिए यह किसानों की मजबूरी बन गई है।
पंचदेवला के किसान घनश्याम धाकड़ का कहना है कि बेमौसम बारिश के डर के बीच अब लुवाई-चीरा का समय नजदीक है। अफीम सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि किसान की सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक है। यही कारण है कि किसान परिवारों ने अब घरों को छोड़ खेतों में ही अस्थाई आशियाना बना लिया है।
धरातल: नीलगायों और आवारा पशुओं को रोकने के लिए लोहे की मजबूत फेंसिंग।
मध्य घेरा: इंसानी घुसपैठ भांपने के लिए मोशन सेंसर और सीसीटीवी कैमरों की नजर।
आकाश: तोतों के हवाई हमलों को नाकाम करने के लिए बारीक नेट कवर (जाली)।
Published on:
17 Jan 2026 04:26 pm
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