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दो घंटे से रो-रोकर किया था परेशान…इसलिए दबा दिया गला, मां ने की बेटी की हत्या

Innocent Murder: एमपी के छिंदवाड़ा की दिल दहला देने वाली वारदात, ढाई साल की बेटी रो रही थी, इसलिए मां ने कर दी उसकी हत्या, एक्सपर्ट्स से जानें मां क्यों बन गई हैवान?

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innocent Murder chhindwara

chhindwara news: हत्यारन मां...(photo:patrika)

Innocent Murder: एमपी के थाना चांद क्षेत्र के ग्राम परसगांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक मां ने अपनी ढाई वर्षीय मासूम बेटी की गला घोंटकर हत्या कर दी। उसका कहना है कि उसकी ढाई साल की बेटी मंजिता रो रही थी। वो उसे लगातार परेशान कर रही थी। ऐसे में उसकी मां ने उसकी गला घोंटकर उसे हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया। ये खुलासा खुद मृतक बच्ची की मां ने पुलिस के सामने किया। पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

पोस्टमार्टम में हुआ गला दबने से मौत का खुलासा

बच्ची की मौत(innocent Murder) के बाद जब उसका पोस्टमार्टम कराया गया, तब जो रिपोर्ट आई उसने पुलिस के होश उड़ा दिए। रिपोर्ट से पता चला की बच्ची की हत्या गला दबाकर की गई थी। खुलासा होने के बाद पुलिस ने आरोपी मां को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है। जहां से उसे जिला अस्पताल से जेल भेज दिया गया है।

यहां पढ़ें पूरा मामला

यह पूरा घटनाक्रम 10 जनवरी का है। जबजिले के रामदास चौरिया निवासी परसगांव ने थाना चांद में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी ढाई साल की बेटी मंजिता चौरिया की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। पूछताछ करने पर संगीता चौरिया (35) ने अपराध स्वीकार कर लिया। उसने बताया कि बच्ची के रो-रोकर उसे लगातार परेशान कर रही थी, जिससे वह तनाव और गुस्से में आ गई। और उसने रुमाल से गला घोंटकर फिर अपने हाथों से गला दबाकर उसकी हत्या की।

मां क्यों बन गई हैवान... जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी, मनोचिकित्सक-

'एक मां का अपने ही बच्चे की जान लेना सामान्य मानसिक अवस्था में लगभग असंभव होता है। यह घटना इस ओर संकेत करती है कि उस समय मां की मानसिक स्थिति गंभीर रूप से असंतुलित रही होगी। मनोचिकित्सकीय दृष्टि से ऐसे मामलों में अक्सर गंभीर अवसाद, तीव्र चिड़चिड़ापन, आवेश नियंत्रण का टूटना या अस्थायी साइकोटिक अवस्था पाई जाती है। लगातार तनाव, नींद की कमी, सामाजिक समर्थन का अभाव और पारिवारिक दबाव व्यक्ति की सहनशीलता को पूरी तरह समाप्त कर सकते हैं। ऐसे में बच्ची का रोना-चिल्लाना उसे असहनीय मानसिक बोझ की तरह महसूस हो सकता है।'

Dr Satyakant Trivedi'यह समझना जरूरी है कि यह केवल क्रूरता का मामला नहीं, बल्कि गंभीर मानसिक बीमारी का संकेत हो सकता है। ऐसी घटनाओं में दंड के साथ-साथ अनिवार्य मनोचिकित्सकीय मूल्यांकन और उपचार अत्यंत आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियां रोकी जा सकें।'