
पॉवेल का कहना है कि उनपर दबाव बनाया जा रहा है। (PC: AI)
अमरीका में लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच एक अभूतपूर्व टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। अमरीका के रिजर्व बैंक यानी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल और राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के बीच लंबे समय से जारी मतभेद अब कानूनी टकराव का रूप ले चुका है। पॉवेल ने सार्वजनिक रूप से पुष्टि की है कि न्याय विभाग ने उनके विरुद्ध आपराधिक जांच शुरू करते हुए ग्रैंड जूरी का समन जारी किया है।
यह कानूनी कार्रवाई पॉवेल द्वारा जून 2025 में सीनेट बैंकिंग समिति के समक्ष दी गई गवाही से संबंधित है। जहां न्याय प्रशासन इसे निगरानी और गवाही की सत्यता से जोड़ रहा है, वहीं चेयरमैन पॉवेल ने इसे सीधे तौर पर 'संस्थागत ब्लैकमेल' करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जांच न तो प्रशासनिक लापरवाही से जुड़ी है और न ही फेडरल रिजर्व के बुनियादी ढांचे के नवीनीकरण से। बल्कि इसका वास्तविक उद्देश्य मौद्रिक नीतियों पर नियंत्रण प्राप्त करना है।
पॉवेल का तर्क है कि यह आपराधिक जांच राष्ट्रपति द्वारा ब्याज दरों में कटौती के लिए बनाए जा रहे दबाव का परिणाम है। उन्होंने एक गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़ा किया है: क्या अमरीकी केंद्रीय बैंक साक्ष्य और आर्थिक डेटा के आधार पर स्वतंत्र निर्णय लेगा, या फिर नीतिगत दरें राजनैतिक धमकियों से निर्धारित होंगी?
किसी भी प्रकार के दबाव के आगे झुकने से इनकार करते हुए पॉवेल ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यद्यपि वे कानून का सम्मान करते हैं, किंतु वे इस पद पर सीनेट द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी और जनहित की रक्षा के लिए अडिग रहेंगे। यह टकराव न केवल अमरीकी डॉलर की साख को प्रभावित कर सकता है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का माहौल भी पैदा कर रहा है।
Updated on:
13 Jan 2026 11:25 am
Published on:
13 Jan 2026 11:24 am
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