
प्रतीकात्मक तस्वीर (PC: AI)
Electricity Selling: दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन यानी DERC बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक नई व्यवस्था लागू करने जा रही है, जिससे ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव आ सकता है। अब तक सोलर पैनल लगाने वाले उपभोक्ता केवल डिस्कॉम को अतिरिक्त बिजली बेच सकते थे। नई व्यवस्था के तहत अब वे सीधे अन्य उपभोक्ताओं जैसे उनके पड़ोसियों को भी बिजली बेचकर कमाई कर सकेंगे। दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) ने वर्चुअल नेट मीटरिंग और पीयर टू पीयर पावर ट्रेडिंग के लिए नई गाइडलाइन जारी की है, जिससे राजधानी में डिजिटल बिजली बाजार की शुरुआत होगी।
वर्चुअल नेट मीटरिंग ऐसी व्यवस्था है जिसमें एक स्थान पर स्थापित सोलर प्लांट से पैदा होने वाली बिजली का लाभ कई उपभोक्ताओं को मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी बिल्डिंग में किसी ने या उसमें रहने वाले लोगों के समूह ने साझा रूप से सोलर प्लांट लगाया है, तो उस प्लांट से बनने वाली बिजली को तय हिस्सेदारी के अनुसार बांटा जा सकेगा।
इस व्यवस्था में अगर कोई उपभोक्ता अपनी जरूरत से ज्यादा बिजली ग्रिड में भेजता है, तो उसका क्रेडिट उसके बिल में जोड़ दिया जाएगा। इससे सोलर पैनल लगाने की लागत की भरपाई जल्दी संभव होगी और रिन्यूएबल एनर्जी को भी बढ़ावा मिलेगा।
नई गाइडलाइन के तहत उपभोक्ता आपस में बिजली की खरीद और बिक्री कर सकेंगे, जिसे पीयर टू पीयर पावर ट्रेडिंग कहा जाता है। इस मॉडल में बिजली बेचने वाला और खरीदने वाला दोनों मोबाइल एप के जरिये रेट तय करेंगे। पूरा लेनदेन डिजिटल और पारदर्शी होगा। बिजली खरीदने वाले उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर लगवाना होगा, जबकि बेचने वाले के पास सोलर प्लांट और नेट मीटरिंग की सुविधा होना जरूरी है। इस प्रक्रिया से बिचौलियों की भूमिका कम होगी और उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलेंगे।
इस नई व्यवस्था से सोलर ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और आम उपभोक्ता एक्स्ट्रा पैसा कमा सकेंगे। जो लोग छत पर सोलर पैनल नहीं लगा सकते, वे भी वर्चुअल नेट मीटरिंग के जरिये सस्ती बिजली का लाभ उठा पाएंगे। सरकार का उद्देश्य बिजली उत्पादन को विकेंद्रीकृत करना और उपभोक्ताओं को ऊर्जा क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी देना है। इससे पारंपरिक बिजली वितरण मॉडल में बदलाव आएगा और भविष्य में ऊर्जा बाजार अधिक प्रतिस्पर्धी व डिजिटल बन सकेगा।
Published on:
16 Feb 2026 01:41 pm
बड़ी खबरें
View Allकारोबार
ट्रेंडिंग
