
रुपये में लगातार गिरावट। फोटो: एआइ
शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया 12 पैसे टूटकर 92.37 प्रति डॉलर के इंट्राडे लो पर पहुंच गया। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 92.33 पर खुला फिर और कमजोर होता चला गया। गुरुवार को भी रुपया 24 पैसे गिरकर 92.25 पर बंद हुआ था, जो अब तक का सबसे कमजोर क्लोजिंग स्तर है। इस हफ्ते रुपया 92.528 तक भी फिसल चुका है।
रुपये की इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण है वैश्विक क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल। ब्रेंट क्रूड 4.99 फीसदी चढ़कर 96.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के हेड ऑफ ट्रेजरी अनिल कुमार भंसाली के मुताबिक ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को संकट सुलझने तक स्थायी रूप से बंद करने का ऐलान किया है, जिससे तेल की सप्लाई पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।
डॉलर इंडेक्स 99.77 पर ट्रेड कर रहा था, जो छह प्रमुख करेंसी के मुकाबले डॉलर की मजबूती दर्शाता है। यूरोपीय और एशियाई ये सभी करेंसियां डॉलर के सामने कमजोर पड़ी हैं। भंसाली का कहना है कि RBI की दखलंदाजी न होती तो रुपया 93.00 तक जा सकता था।
घरेलू बाजार में भी माहौल नकारात्मक रहा। बीएसई सेंसेक्स 900 अंक से ज्यादा टूटकर 75,117.81 पर आ गया, जबकि निफ्टी फिफ्टी 23,325.45 पर करीब 313 अंक नीचे थी। फॉरन इंस्टीट्युशनल इंवेस्टर्स (FII) ने गुरुवार को 7,049.87 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची, जिसने बाजार की धारणा को और कमजोर किया।
बिजनेस के नजरिए से देखें तो कमजोर रुपया, महंगा तेल और FII की निकासी यह तिहरी मार है। इससे इंपोर्ट बिल बढ़ेगा, पेट्रोल-डीजल की कीमतें दबाव में आएंगी और महंगाई और भड़क सकती है। फरवरी में रिटेल इन्फ्लेशन पहले ही 2.74% से बढ़कर 3.21% हो चुकी है, जिसकी वजह खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतें बताई गई हैं।
Published on:
13 Mar 2026 12:30 pm
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