
प्रतीकात्मक तस्वीर (PC: AI)
Union Budget 2026 Tax Standard Deduction: केंद्रीय बजट 2026 को लेकर मिडिल क्लास और सैलरीड टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत की उम्मीद थी। खास तौर पर इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव और स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ने की चर्चा पहले से चल रही थी। हालांकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में इनकम टैक्स स्लैब में किसी भी तरह के बदलाव का ऐलान नहीं किया, जिससे नई टैक्स व्यवस्था और पुरानी टैक्स व्यवस्था दोनों ही पहले जैसी बनी रहीं।
बजट 2026 में नई टैक्स व्यवस्था के तहत इनकम टैक्स स्लैब को बिना बदलाव जारी रखा गया है। इस व्यवस्था में कम टैक्स रेट का फायदा मिलता है, लेकिन ज्यादातर डिडक्शन और छूट उपलब्ध नहीं हैं। नई टैक्स व्यवस्था उन टैक्सपेयर्स के लिए फायदेमंद मानी जाती है, जिनकी सैलरी स्ट्रक्चर सिंपल है और जो होम लोन, इंश्योरेंस या सेविंग आधारित डिडक्शन का ज्यादा उपयोग नहीं करते। करीब 7 लाख से 12 लाख रुपये तक की सालाना सैलरी वालों के लिए नई टैक्स व्यवस्था ज्यादा आसान मानी जा रही है, वहीं इसके उपयोग के कई मामलों में टैक्स सेविंग भी साबित होती है।
पुरानी टैक्स व्यवस्था में भी बजट 2026 के तहत कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत विभिन्न डिडक्शन और छूट हैं, जैसे 80C, 80D, होम लोन इंटरेस्ट और एचआरए। जिन टैक्सपेयर्स की सालाना आय 12 लाख रुपये से ज्यादा है और जो निवेश, इंश्योरेंस और होम लोन के जरिए डिडक्शन का पूरा लाभ उठाते हैं, उनके लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था अब भी ज्यादा फायदेमंद बनी हुई है।
टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार 7 लाख रुपये तक की आय वालों को नई टैक्स व्यवस्था में टैक्स छूट का पूरा लाभ मिलता है। 7 से 10 लाख रुपये की सैलरी वाले टैक्सपेयर्स को अपनी डिडक्शन क्षमता के आधार पर दोनों में तुलना करनी चाहिए। वहीं 10 से 15 लाख या उससे अधिक सैलरी वालों के लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था, अगर पर्याप्त निवेश और डिडक्शन हैं, तो टैक्स बचाने में मददगार साबित होती है।
Published on:
02 Feb 2026 05:18 pm

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