31 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भारत ने 10 साल में कर दिया कमाल, सालाना 10 फीसदी बढ़ी किसानों की कमाई, नीति आयोग की एक रिपोर्ट में दावा

नीति आयोग सदस्य रमेश चंद की रिपोर्ट के अनुसार किसानों की आय दोगुनी हुई। जानिए कैसे नवाचार, पशुपालन और एमएसपी में बढ़ोतरी ने खेती को बनाया लाभ का सौदा। छोटे किसानों की सफलता और बड़े किसानों की चुनौतियों पर विशेष रिपोर्ट।

3 min read
Google source verification
Farmer

किसान की प्रतीकात्मक तस्वीर: पत्रिका

देश के किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य सरकार ने हासिल कर लिया है। इसमें बीते 10 साल में सालाना 10 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है। वर्ष 2015 के मुकाबले 2024 तक यह 126 फीसदी बढ़ चुकी है। यह दावा नीति आयोग सदस्य रमेश चंद ने अपनी एक रिपोर्ट में किया है। यह वृद्धि विनिर्माण और अर्थव्यवस्था के बाकी क्षेत्रों से बेहतर है। 'विकसित भारतÓ (2047 तक) का सपना देख रहे देशवासियों के लिए यह रिपोर्ट एक खुश-खबर है।

रमेश चंद ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि खेती के साथ पशुपालन के दम पर वर्ष 2023 में किसानों की आय 2016 के मुकाबले 107 फीसदी बढ़ चुकी थी। देश को 30 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने और प्रति व्यक्ति आय 12 लाख रुपए सालाना (उच्च आय वर्ग देशों के समकक्ष) करने के लिए आठ फीसदी की जीडीपी ग्रोथ रेट चाहिए। इसमें कृषि की बड़ी भूमिका है। भारत का 46 फीसदी कार्य-बल आज भी इससे रोजगार पा रही है।

छोटे किसानों ने सूझबूझ से बदली अपनी किस्मत

केस स्टडी-1: बिचौलिए हटे तो पहले ही साल 8 करोड़ का ट्रांजेक्शन
कोटा जिले के सांगोद क्षेत्र के लक्ष्मीपुरा गांव के किसान महावीर शर्मा खेती के दम पर करोड़पति बन गए हैं। महावीर ने एक कंपनी की स्थापना कर किसानों को जोड़ा और पहले ही वर्ष में आठ करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन किया। यह पहल किसानों को सीधे बाजार से जोडऩे, उचित मंडी भाव दिलाने और पारदर्शी खरीद-बिक्रीी व्यवस्था लागू करने में अहम भूमिका निभा रही है। मंडी भाव की जानकारी, पारदर्शी खरीद प्रणाली व डिजिटल रेकॉर्ड, समय पर भुगतान की व्यवस्था कराई जा रही है। हर किसान को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोडऩे, प्रोसेसिंग, स्टोरेज और ब्रांडिंग की सुविधा पर काम किया जा रहा है।

केस स्टडी-2: जैविक खेती से खुली प्रगति की राह
कोटा के सांगोद निवासी रविंद्र मेहता ने बीते दस वर्ष में पूरी तरह जैविक खेती को अपनाया। जैविक खेती के साथ गन्ने की खेती शुरू की। जैविक गन्ने से गुड़ तैयार कर उसे पैकिंग के साथ बेचने लगे। धान की खेती भी जैविक तरीके से की। आधुनिक तकनीक 'पॉली हाउसÓ को अपनाया, जिसमें खीरे की फसल लहलहा रही है। इनके खेत में किसानों की आय दोगुनी होने का दावा झलकता है। सरकारी प्रोत्साहन, आधुनिक तकनीक और जैविक उत्पादों ने उनकी आय के साथ आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाइयां दी हैं। आज उनके पास शानदार घर, कार और सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।

बड़े किसान असंतुष्ट, कहा- दावे कागजों तक सीमित

केस स्टडी-3: वास्तविक आय में कोई बढ़ोतरी नहीं
श्रीगंगानगर जिले की सादुलशहर तहसील के चक महाराजका के किसान अमृतपाल सिंह संधू का कहना है कि वह करीब 100 बीघा भूमि पर खेती करते हैं, लेकिन खेती अब लाभ का सौदा नहीं रह गई है। खाद, बीज, स्प्रे, बुवाई-बिजाई, सिंचाई, फसल कटाई और निकासी के साथ ही मजदूरी पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। किसान की आय कागजों में भले ही बढ़ी दिखाई दे, लेकिन हकीकत में खर्चा भी उसी अनुपात में बढ़ गया हैं। इसी कारण वास्तविक आय में कोई बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है। आज भी एमएसपी के अनुरूप कृषि जिंसों के दाम नहीं मिल रहे, जिससे आर्थिक स्थिति कमजोर बनी हुई है।

इसलिए हुआ यह कमाल

  • कीमत किसानों के फेवर में : बीते कृषि उत्पादों की कीमतें गैर कृषि उत्पादों से ज्यादा तेजी से बढ़ीं। 2008 में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 850 और गेहूं का 1000 रुपए के करीब था। 2025-26 में यह 2369 और 2425 के स्तर पर पहुंच चुका है। यानी करीब ढाई गुना वृद्धि।
  • बेहतर तकनीक : नई तकनीकों से सिंचित क्षेत्र बढ़ रहा है। ई-नाम से लेकर ड्रोन जैसे पहल और सोलर पंप के लिए पीएम कुसुम योजनाओं ने खेती को पहले से काफी आसान बनाया है।
  • खेती में विविधता : किसानों ने अपनी मेहनत और सोच के संगम से फल, मसालों से लेकर पशु व मछली पालन को अपनाना शुरू कर दिया है। इससे उनकी आय बढ़ी है। इन उत्पादों से उनकी आय बढ़ रही है।

दो-तीन से पांच-सात हजार तक…

राजस्थान के करौली स्थित निसूरा के भरत सिंह गुर्जर ने कहा, हम किसानों की आय में बढ़ोतरी हुई है पहले सरसों, गेहूं, चना दो-तीन हजार रुपए में बिकते थे अभी पांच से सात हजार रुपए में बिकने लगे हैं। कृषि यंत्रों पर भी अनुदान मिलने लगा है। पाइपलाइन फव्वारा आदि पर भी सब्सिडी मिलने लगी है। सरकार खेतों की तारबंदी के लिए भी अनुदान दे रही है।

नवाचार से बढ़ाई आमदनी

कटराथल के कानसिंह ने कहा, जब तक खेती में नवाचार नहीं होगा तब तक आमदनी नहीं बढ़ सकती है। दस साल पहले गेहूं 800 से 1200 रुपए क्विंटल बेचते थे। गौ खाद आधारित फसलों से आमदनी बढ़ गई है। अब वहीं गेहूं पांच हजार रुपए क्विंटल तक बेच रहे है। यदि इन्हीं गेंहू से दलिया और आटा तैयार करके बेचेंगे तो आमदनी 20 गुणा तक बढ़ सकती है।

छोटे किसानों की चुनौतियां बाकी

उदयपुरवाटी के प्रेमसुख काजला ने कहा, सरकार के प्रयासों से आय बढ़ी है, किसानों के रहन-सहन का स्तर बढ़ गया है। खेती-किसानी हाइटेक होने लगी है। लेकिन छोटे और सीमांत किसानों के लिए चुनौतियां अभी बाकी हैं। खेती में नवाचारों से फायदा मिलने लगा है। भंडारण, प्रोसेसिंग और सिंचाई की सुविधाएं बढऩे पर किसानों की आय सच में दोगुनी से भी आगे जा सकती है।

Story Loader