
एनसीडीआरसी ने स्पष्ट किया कि बिना खाताधारक की गलती निकली रकम बैंक को 10 दिन में लौटानी होगी। (AI Generated Image)
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने कहा है कि यदि खाताधारक की गलती या लापरवाही नहीं होने के बावजूद अगर बैंक खाते से रकम निकाली गई है तो दस दिन में रकम वापस करना बैंक की जिम्मेदारी है। शीर्ष उपभोक्ता आयोग ने भारतीय रिजर्व बैंक के 2017 के सर्कुलर के प्रावधानों को स्पष्ट करते हुए यह फैसला दिया है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस एपी शाही, सदस्य भरत कुमार पांड्या की पीठ ने एक मामले में महिला खाताधारक के हक मे फैसला देते हुए राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के फैसले के खिलाफ बैंक की अपील खारिज कर दी।
गौरतलब है कि इंडसइंड बैंक की बेंगलूरु निवासी खाताधारक सरोजा ने उपभोक्ता फोरम में शिकायत की थी कि उनके खाते और एफडी को मिलाकर कुल 9 लाख 52 हजार रुपए की अवैध निकासी की गई। इस मामले में पहले जिला उपभोक्ता फोरम और फिर राज्य उपभोक्ता फोरम ने महिला के हक में फैसला दिया था।
पीठ ने कहा कि अपीलकर्ता बैंक ऐसा साक्ष्य पेश करने में विफल रहा कि खाताधारक ने ओटीपी किसी अनजान के साथ साझा की थी। ऐसे में मौजूदा मामला आरबीआई सर्कुलर के क्लॉज 6(ए) के तहत आता है, जो खाताधारक की 'शून्य देयता' निर्देशित करता है। पीठ ने कहा कि बैंक की यह जिम्मेदारी है कि जब खाताधारक की कोई लापरवाही नहीं हो तो वह खाते से गायब रकम 10 कार्य दिवसों में वापस करें। हम राज्य उपभोक्ता आयोग और जिला उपभोक्ता आयोग के निष्कर्ष से सहमत हैं कि बैंक सेवा में कमी का दोषी है।
Published on:
14 Jan 2026 04:07 am
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