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40 की उम्र में जा रही लोगों की नौकरी, कॉरपोरेट दुनिया में बढ़ रहा यह खतरा

कॉरपोरेट इंडिया में 40 की उम्र प्रोफेशनल्स के लिए नई चुनौती बन रही है। अनुभव की अनदेखी, युवा प्राथमिकता और कॉस्ट कटिंग ने जॉब मार्केट की दिशा बदल दी है।

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भारत

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Thalaz Sharma

Jan 20, 2026

layoffs in india at 40

प्रतीकात्मक तस्वीर (PC: AI)

भारत में कॉरपोरेट सेक्टर लंबे समय से युवा टैलेंट और तेज ग्रोथ को प्राथमिकता देता रहा है। तकनीक आधारित कंपनियों, स्टार्टअप्स और कॉस्ट कटिंग मॉडल ने कर्मचारियों की नियुक्ति की सोच को बदला है। इसी बदलाव के बीच अब एक नई और चिंताजनक सच्चाई सामने आ रही है कि 40 की उम्र पार करते ही कई प्रोफेशनल्स के लिए करियर की रफ्तार धीमी पड़ने लगती है। इतने समय का अनुभव जो कभी ताकत माना जाता था, अब कई मामलों में लागत की चुनौती के रूप में देखा जाने लगा है।

अनुभव से बोझ तक

40 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते कर्मचारी से नेतृत्व, स्थिरता और रणनीतिक सोच की उम्मीद की जाती है। लेकिन कई कंपनियों में यही अनुभव महंगा और कठोर मान लिया जाता है। इतनी उम्र लेने के बाद कंपनियां ऐसे कर्मचारियों को हायर करना कम कर देती हैं और प्रमोशन को भी धीमा कर दिया जाता है। वहीं, युवाओं को हाई पोटेंशियल कहकर आगे बढ़ाया जाता है, जबकि सीनियर को ओवरक्वालिफाइड या अनफिट कहकर नजरअंदाज किया जाता है।

युवा बन रहे बेहतर विकल्प

कॉरपोरेट दुनिया में ज्यादा उम्र को सुस्त और बोझ माना जाने लगा है, जबकि 20 से 30 की उम्र के युवाओं को एक बेहतर विकल्प के रूप में देखा जाता है। कंपनियां कम सैलरी, ज्यादा घंटे काम और तेजी से सीखने की क्षमता को प्राथमिकता देती हैं। इसका असर यह होता है कि 40 की उम्र के प्रोफेशनल्स धीरे धीरे सिस्टम से बाहर धकेले जाने लगते हैं।

कैसा हो गया करियर का ट्रेंड?

लिंक्डइन की रिपोर्ट के अनुसार 60 फीसदी प्रोफेशनल्स बार-बार इंडस्ट्री और अपना रोल बदल रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद वे इस बदलाव के साथ तालमेल नहीं बैठा पा रहे हैं। हालांकि, जो कंपनियां लर्निंग और अपस्किलिंग में निवेश करती हैं, वहां रिटेंशन यानी कर्मचारियों का ठहराव और परफॉर्मेंस बेहतर देखा जाता है। वहीं, इसके उलट जहां अनुभव को लागत माना जाता है, वहां निर्णय प्रक्रिया कमजोर हो जाती है और नेतृत्व का संकट गहरा हो जाता है।