भारत, May 29, 2026

Income Tax में डिडक्शन के नियमों में बदलाव AY 2025-26 से शुरु हो गए है। (PC: Pexels)
Tax Deduction: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने टैक्सपेयर्स के लिए ऑनलाइन ITR फाइलिंग शुरू कर दी है। अब टैक्सपैयर्स ई-फाइलिंग पोर्टल से एक्सेल यूटीलिज को डाउनलोड करके और उनको ऑफलाइन भरने के बाद डिजिटली अपलोड भी कर सकते हैं। इसी बीच टैक्सपेयर्स को यह जानना जरूरी है कि असेसमेंट ईयर 2025-26 से इनकम टैक्स के कई सेक्शन में डिडक्शन क्लेम करने के नियम बदले हैं। ऐसे में आपको सही जानकारी पता होना जरूरी है।
छूट पाने के लिए अब सिर्फ अमाउंट लिखना ही काफी नहीं है, बल्कि पॉलिसी नंबर से लेकर लोन अकाउंट नंबर तक कई अतिरिक्त जानकारियां देना अनिवार्य है। जो टैक्सपेयर इन बदलावों से अनजान हैं, उनका रिटर्न अटक सकता है या इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस आ सकता है।
पहले सेक्शन 80C के तहत डिडक्शन क्लेम करने के लिए सिर्फ निवेश की राशि बताना पर्याप्त था। लेकिन अब AY 2025-26 से टैक्सपेयर को दो अतिरिक्त जानकारियां देना जरूरी है। पहला- डिडक्शन के लिए एलिजिबल अमाउंट और दूसरा- पॉलिसी नंबर या डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर। यानी अगर आपने LIC, PPF में निवेश किया है और डिडक्शन लेना चाहते हैं तो संबंधित पॉलिसी या डॉक्यूमेंट का नंबर फॉर्म में दर्ज करना होगा।
सेक्शन 80CCD(1) या 80CCD(1B) के तहत डिडक्शन लेने वाले टैक्सपेयर्स को अब निवेश की राशि के साथ-साथ अपना PAN नंबर भी ITR फॉर्म में दर्ज करना होगा। यह बदलाव AY 2025-26 से लागू है। नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS में निवेश की गई राशि पर टैक्स से राहत के लिए इस सेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है।
सेक्शन 80D के तहत मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर डिडक्शन क्लेम करने वालों को तीन जानकारियां अनिवार्य रूप से भरनी होंगी। पहली- बीमा कंपनी का नाम, दूसरी- पॉलिसी नंबर और तीसरी- हेल्थ इंश्योरेंस की राशि। यह नियम AY 2025-26 से प्रभावी है और इसे नजरअंदाज करने पर डिडक्शन रिजेक्ट हो सकता है।
होम लोन पर डिडक्शन लेने वाले टैक्सपेयर के लिए भी नियम सख्त हुए हैं। सेक्शन 80E, 80EE, 80EEA और 80EEB के तहत डिडक्शन क्लेम करने के लिए सात जानकारियां देना अनिवार्य होगा- किससे लोन लिया, बैंक या संस्था का नाम, लोन अकाउंट नंबर, लोन स्वीकृति की तारीख, कुल लोन राशि, मौजूदा बकाया राशि और ब्याज की राशि।
दिव्यांगता से जुड़े सेक्शन 80DD और 80U में सबसे ज्यादा बदलाव किए गए हैं। इन सेक्शन में क्लेम करने से पहले Form 10 IA फाइल करना अनिवार्य है। उसका नंबर और फाइलिंग की तारीख ITR फॉर्म में दर्ज करनी होगी।
साथ ही डिडक्शन क्लेम करने के लिए अब छह जानकारियां देना जरूरी होंगी, जिनमें शामिल हैं- दिव्यांगता की प्रकृति, दिव्यांगता का प्रकार, डिडक्शन की राशि, Form 10 IA का नंबर, आश्रित का PAN और आश्रित का आधार नंबर।
ऐसे टैक्सपेयर जिनको HRA नहीं मिलता, लेकिन किराए पर रहते हैं और सेक्शन 80GG के तहत डिडक्शन लेना चाहते हैं, उन्हें पहले Form 10BA अनिवार्य रूप से फाइल करना होगा। इसके बाद ITR फॉर्म के सेक्शन 80GG में उस फॉर्म का नंबर दर्ज करना होगा। यह नियम AY 2025-26 से लागू है।
Published on: 29 May 2026 12:44 pm


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