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Investment Tips: 2026 में निवेशक जान लें शेयर बाजार के तीन अहम फैक्टर

2026 में शेयर मार्केट के लिए तीन ताकतों और कई मिथकों के बारे में बताया गया है, जिसमें मार्केट को घरेलू मजबूती, वैश्विक अनिश्चितता और अनपेक्षित घटनाएं आकार देंगी। निवेशकों के मिथक और शॉर्ट टर्म सोच बाजार में अस्थिरता बढा सकते हैं।

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भारत

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Thalaz Sharma

Jan 12, 2026

share market 3 factors

प्रतीकात्मक तस्वीर (PC: AI)

2026 की शुरुआत वैश्विक बाजार के लिए असमंजस और तेज उतार-चढाव के माहौल में हुई है। बीते कुछ वर्षों में इक्विटी मार्केट ने तेज रिटर्न दिए हैं, लेकिन इसके साथ जोखिम और शॉर्ट टर्म सोच भी बढ़ी है, जिससे निवेश व्यवहार में अस्थिरता दिख रही है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार एडलवाइस म्यूचुअल फंड की एमडी और सीईओ राधिका गुप्ता ने 2026 को लेकर बाजार से जुड़े मिथकों, निवेशकों की मानसिकता और तीन अहम ताकतों पर बात की है, जो आने वाले समय में शेयर मार्केट की चाल तय कर सकते हैं।

घरेलू अर्थव्यवस्था से बाजार को सहारा

राधिका गुप्ता के मुताबिक 2026 में पहला और सबसे मजबूत फैक्टर भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था है। उनका मानना है कि देश के भीतर मांग, सरकारी खर्च और आम लोगों की भागीदारी बाजार को स्थिर बनाए रखने में मदद कर रही है। म्यूचुअल फंड SIP के जरिए हर महीने आने वाला पैसा बाजार में गिरावट के समय भी संतुलन बनाए रखता है। इसी वजह से हाल के वर्षों में बाजार में बड़ी गिरावट कम देखने को मिली।

दुनिया भर की अनिश्चितता बनी चुनौती

दूसरा बड़ा फैक्टर वैश्विक हालात से जुड़ा है। दुनिया के कई हिस्सों में आर्थिक और राजनीतिक तनाव अब भी खत्म नहीं हुए हैं। व्यापार से जुड़े विवाद, जियोपॉलिटिकल तनाव और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के फैसले 2026 में भी बाजार पर असर डाल सकते हैं। राधिका गुप्ता मानती हैं कि अब वैश्विक घटनाएं केवल खबरों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि सीधे तौर पर शेयर बाजार में हलचल पैदा कर रही हैं। यही कारण है कि विदेशी संकेतों पर निवेशकों की प्रतिक्रिया पहले से ज्यादा तेज हो गई है।

अनजानी घटनाएं और निवेशकों के भ्रम

तीसरा और सबसे अहम फैक्टर वे अनजानी घटनाएं हैं, जिनका अंदाजा पहले से नहीं लगाया जा सकता। राधिका गुप्ता इन्हें ‘अननोन अननोन’ कहती हैं, यानी ऐसी घटनाएं जो अचानक होती हैं और बाजार को तुरंत प्रभावित करती हैं। इसके साथ ही वह निवेशकों को कुछ आम गलतफहमियों से दूर रहने की बात भी कहती हैं। जैसे हर साल बहुत ज्यादा रिटर्न की उम्मीद करना या बार-बार निवेश बदलना। उनके अनुसार शेयर बाजार में लंबे समय में 11 से 12 प्रतिशत का रिटर्न सामान्य माना जा सकता है, जबकि कोविड के बाद मिला ज्यादा रिटर्न असाधारण था।