24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Gen Z में बढ़ रही इम्पल्स बोरोइंग, मिडिल क्लास भी कर्ज के जाल में फंस रहा, देखिए आंकड़े

Personal Loan Borrowers India: लोन लेने वाले 36 फीसदी लोग लाइफस्टाइल खर्चों को पूरा करने के लिए कर्ज ले रहे हैं। मिडिल क्लास और जेन-Z के बीच कर्ज तेजी से बढ़ा है।

3 min read
Google source verification

भारत

image

Pawan Jayaswal

Jan 24, 2026

Personal Loan Borrowers India

जेन-Z भी लोन के जाल में फंस रही है। (PC: AI)

लोन लेना आज के दौर में इतना आसान हो गया है कि लोग हर एक बड़े खर्चे के लिए लोन लेने लगे हैं। बीमारी में खर्चा हो गया तो लोन ले लिया, लैपटॉप मंगवाना है तो लोन ले लिया, ट्रैवल करना है तो लोन ले लिया, घर बनवाना है तो लोन ले लिया, शादी में पैसे कम पड़ गए तो भी लोन ले लिया। क्रेडिट कार्ड का पैसा भी एक तरह का लोन ही है, जिसमें समय पर पेमेंट न करने पर भारी-भरकम ब्याज चुकाना होता है। सिर्फ जरूरतों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने शौक पूरे करने और बिजनेस इन्वेस्टमेंट के लिए भी पर्सनल लोन लिया जा रहा है।

Gen Z के बीच बढ़ रही इम्पल्स बोरोइंग

इम्पल्स बोरोइंग से मतलब बिना किसी प्लानिंग के इमिडिएट इमोशनल नीड, स्ट्रेस या लोन तक आसान पहुंच के चलते लोन ले लेने से है। करीब 25% बोरोअर बिना किसी दूसरे क्रेडिट विकल्प पर विचार किए बिना ही लोन ले लेते हैं। Gen Z में यह आंकड़ा बढ़कर 31% हो जाता है। आज के समय में ब्याज दर से ज्यादा स्पीड, सुविधा और इंस्टेंट एक्सेस मायने रखता है,
जिससे ओवर-बोरोइंग, खराब क्रेडिट स्कोर और लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल स्ट्रेस का खतरा बढ़ गया है।

36% कर्जदार लाइफस्टाइल खर्चों के लिए लेते हैं लोन

आंकड़े बताते हैं कि 48 फीसदी लोग जरूरी कामों या इमरजेंसी नीड के लिए लोन लेते हैं। ईटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, 36 फीसदी लोग लाइफस्टाइल खर्च या शौक पूरे करने लिए लोन लेते हैं। वहीं, 16 फीसदी लोग बिजनेस से जुड़े उद्देश्यों के लिए लोन लेते हैं।

मेडिकल के खर्चे

भारत में हेल्थकेयर की लागत परिवारों पर लगातार भारी पड़ रही है। करीब 11% कर्जदारों ने मेडिकल खर्च चुकाने के लिए पर्सनल लोन लिया। यह आंकड़ा टियर-1 शहरों में बढ़कर 14% हो जाता है। मेडिकल महंगाई दर 12% से 15% सालाना के बीच है। यह एशिया में सबसे ऊंची दरों में से एक है। बड़ी संख्या में लोगों के पास हेल्थ इंश्योरेंस न होने से यह खर्च काफी भारी पड़ता है। वित्त वर्ष 2024 में बीमा कवरेज करीब 40 फीसदी तक सीमित रहा है। इस कारण इलाज का बड़ा खर्च लोगों को अपनी जेब से चुकाना पड़ता है। ऐसे में आपात स्थिति में परिवार अक्सर शॉर्ट-टर्म लोन का सहारा लेते हैं।

मिडिल क्लास के लोग ले रहे सबसे ज्यादा लोन

7.5 से 10 लाख रुपये सालाना कमाने वाले लोग लाइफस्टाइल खर्चों के लिए सबसे ज्यादा लोन लेने वाले वर्ग के रूप में उभरे हैं। इस आय वर्ग के 40% लोग होम रिनोवेशन, व्हीकल अपग्रेड करने या सेलिब्रेशन जैसे कामों के लिए कर्ज लेते हैं।

शादी के लिए भी लिये जा रहे लोन

लोग शादी के लिए भी कर्ज ले रहे हैं। करीब 11% लोग शादी या बड़े समारोहों के लिए लोन लेते हैं। टियर-1 शहरों में यह आंकड़ा 14%, टियर-2 में 10% और टियर-3 में 7% है। कुछ जगह अंतिम संस्कार जैसे सांस्कृतिक दायित्व भी कर्ज लेने की वजह बन रहे हैं।

बिजनेस के लिए लिया जा रहा लोन

अब पर्सनल लोन बिजनेस को सपोर्ट करने का भी बड़ा जरिया बनता जा रहे है। करीब 31% गैर-वेतनभोगी लोग बिजनेस जरूरतों के लिए पर्सनल लोन लेते हैं। वहीं 9% वेतनभोगी लोग साइड बिजनेस, फेमिली बिजनेस या पैशन प्रोजेक्ट्स के लिए पर्सनल लोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह दिखाता है कि उद्यमिता के लिए अनसिक्योर्ड क्रेडिट पर निर्भरता बढ़ रही है।

अवेयरनेस ज्यादा लेकिन समझ कम

98% लोग जानते हैं कि क्रेडिट स्कोर क्या होता है। लेकिन सिर्फ 7% लोग ही यह पूरी तरह समझते हैं कि क्रेडिट स्कोर लोन अप्रूवल और ब्याज दरों को कैसे प्रभावित करता है। केवल 32% लोग नियमित रूप से अपना क्रेडिट स्कोर मॉनिटर करते हैं। अवेयरनेस और समझ के इस अंतर से लोग अपनी पुनर्भुगतान क्षमता से अधिक लोन ले लेते हैं। इससे क्रेडिट स्कोर तो खराब होता ही है, मानसिक तनाव भी काफी बढ़ जाता है।