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Budget 2026: भारत को तीसरी बड़ी इकोनॉमी बनाने पर फोकस होगा बजट, क्या कर्ज बनेगा चुनौती? देखिए ये आंकड़े

Budget 2026: पिछले 12 साल में देश पर कर्ज 53 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 185 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है। वहीं, इस अवधि में बजट का साइज 15 लाख करोड़ से बढ़कर 50.65 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है।

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भारत

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Pawan Jayaswal

Jan 23, 2026

Budget 2026

बजट में जीडीपी ग्रोथ बढ़ाने पर फोकस होगा। (PC: AI)

Budget 2026: दुनिया की तमाम मौजूदा चुनौतियों के बीच आगामी एक फरवरी को पेश होने वाला देश का अगले साल का बजट भारत को दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की नींव रख सकता है। बदलती वैश्विक व्यवस्था, महाशक्तियों को सिर्फ अपनी चिंता (प्रोटेक्शनिज्म) की प्रवृत्ति और टैरिफ को कूटनीतिक हथियार बनाने की अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की नई नीति (टैरिफ टेरर) के बावजूद भारत 2025 में 4.18 लाख करोड़ डॉलर की इकोनॉमी के साथ दुनिया की चौथी अर्थव्यवस्था बन गया है।

अगले तीन बजट बेहद अहम

सूत्रों के अनुसार, 2030 तक जर्मनी को पीछे छोड़ तीसरी अर्थव्यवस्था बनने के लिए अगले तीन बजट बेहद अहम हैं जिसकी पहली झलक आगामी बजट में दिखाई दे सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट में इकोनॉमी को समृद्ध करने वाले कारकों को पोषित करने के इंतजाम करने के साथ ही आत्मनिर्भरता व निर्यात को बढ़ाने पर जोर हो सकता है। सूत्रों ने बताया कि अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार के सामने देश के समग्र कर्ज को काबू में लाने की बड़ी चुनौती है, जो इसी साल मार्च तक 185 लाख करोड़ से बढ़कर 196 से 200 लाख करोड़ तक जा सकता है। हालात यह है कि सालाना करीब 12 लाख करोड़ रुपए कर्ज का ब्याज चुकाने में खर्च हो रहे हैं।

कर्ज बना मुसीबत, कम करना चुनौती

भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी तो आ रही है लेकिन इसके साथ ही देश पर बढ़ता कर्ज बड़ी चुनौती बना हुआ है। पिछले 12 साल में देश पर कर्ज 53 लाख करोड़ से 185 लाख करोड़ पार हो चुका है। इससे कर्ज और ब्याज चुकाने का बोझ इकोनॉमी की रफ्तार में बाधा बन सकता है। भारत विश्व बैंक से कर्ज लेने में दुनिया में अव्वल है, जबकि दुनिया के टॉप कर्जदारों में सातवें नंबर पर है। हालांकि, अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली जैसे देश कर्ज में भारत की तुलना में बहुत ज्यादा कर्जदार हैं। आगामी बजट में इस समस्या से निपटने के उपाय दिख सकते हैं।

ग्रोथ इंजन की रफ्तार के लिए इंतजाम जरूरी

पिछले 12 साल में केंद्र सरकार का बजट आकार 15 लाख करोड़ से बढ़कर 50.65 लाख करोड़ रुपये पार कर गया है। इस साल बजट आकार 10% बढ़ोतरी के साथ करीब 54 लाख करोड़ तक जा सकता है। बीते दस साल में भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी ने दुनिया को चौंकाया है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा ग्रोथ इंजन की रफ्तार को बढ़ाने के लिए बजट के जरिए उपाय करने और उन्हें जमीन पर उतारना जरूरी है। सरकार आइटी, निर्माण, रक्षा उत्पादन, आधारभूत ढांचा व कृषि सहित लगभग हर क्षेत्र पर फोकस कर रही है। ऐसे में आने वाले बजट में इन क्षेत्रों की बाधाएं दूर करने व प्रोत्साहन देने के इंतजाम किए जा सकते हैं।