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दुनिया की तमाम मौजूदा चुनौतियों के बीच आगामी एक फरवरी को पेश होने वाला देश का अगले साल का बजट भारत को दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की नींव रख सकता है। बदलती वैश्विक व्यवस्था, महाशक्तियों को सिर्फ अपनी चिंता (प्रोटेक्शनिज्म) की प्रवृत्ति और टैरिफ को कूटनीतिक हथियार बनाने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई नीति (टैरिफ टैरर) के बावजूद भारत 2025 में भारत 4.18 लाख डॉलर की इकॉनामी के साथ दुनिया की चौथी अर्थव्यवस्था बन गया है।
जानकार सूत्रों के अनुसार 2030 तक जर्मनी को पीछे छोड़ तीसरी अर्थ-व्यवस्था बनने के लिए अगले तीन बजट बेहद अहम हैं जिसकी पहली झलक आगामी बजट में दिखाई दे सकती है। सूत्रों और विशेषज्ञों का मानना है कि बजट में इकोनॉमी को समृद्ध करने वाले कारकों को पोषित करने के इंतजाम करने के साथ आत्मनिर्भरता व निर्यात को बढ़ाने पर जोर हो सकता है। सूत्रों ने बताया कि अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार के सामने देश के समग्र कर्ज को काबू में लाने की बड़ी चुनौती है जो आने वाले बजट में 185 लाख करोड़ से बढ़कर 196 से 200 लाख करोड़ तक जा सकता है। हालात यह हैं कि सालाना करीब 12 लाख करोड़ रुपए कर्ज का ब्याज चुकाने में खर्च हो रहे हैं।
पिछले 12 साल में केंद्र सरकार का बजट आकार 15 लाख करोड़ से बढक़र से 50.65 लाख करोड़ पार कर गया है। इस साल बजट आकार 10 फीसदी बढ़ोतरी के साथ करीब 54 लाख करोड़ तक जा सकता है। बीते दस साल में भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी ने दुनिया को चौंकाया है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा ग्रोथ इंजन की रफ्तार को बनाए रखने, बल्कि बढ़ाने, के लिए बजट के जरिए उपाय करने और उन्हें जमीन पर उतारना जरूरी है। सरकार आईटी, निर्माण, रक्षा उत्पादन, आधारभूत ढांचा व कृषि सहयोगी सहित लगभग हर क्षेत्र पर फोकस कर रही है। ऐसे में आने वाले बजट में इन क्षेत्रों की बाधाएं दूर करने व प्रोत्साहन देने के इंतजाम किए जा सकते हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी तो आ रही है लेकिन देश पर बढ़ता कर्ज बड़ी चुनौती बना हुआ है। पिछले 12 साल में देश पर कर्ज 53 लाख करोड़ से 185 लाख करोड़ पार हो चुका है। इससे कर्ज व ब्याज चुकाने का बोझ इकोनॉमी रफ्तार में बाधा बन सकता है। भारत विश्व बैंक से कर्ज लेने में दुनिया में अव्वल है, जबकि दुनिया के टॉप कर्जदारों में सातवें नंबर पर है। अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली जैसे देश कर्ज में भारत की तुलना में बहुत ज्यादा कर्जदार हैं। आगामी बजट में इस समस्या से निपटने के उपाय दिख सकते हैं।
ट्रंप टैरिफ के कारण इस बार के बजट पर निगाहें हैं। ट्रंप टैरिफ के बाद भारत ने व्यापार व निर्यात के लिए नए क्षेत्र खोले हैं और कुल निर्यात पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है लेकिन निर्यात क्षेत्र में असमंजस जरूर है। बजट में संभावित उपायों से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
| वित्तीय वर्ष | बजट (लाख करोड़) | कुल कर्ज (लाख करोड़) | सालाना उधारी भुगतान (लाख करोड़) | सालाना सिर्फ ब्याज (लाख करोड़) |
|---|---|---|---|---|
| 2025-26 | 50.65 | 185.94 | 15.86 | 12.76 |
| 2024-25 | 48.20 | 172.00 | 15.69 | 11.37 |
| 2023-24 | 44.43 | 155.13 | 17.86 | 10.63 |
| 2022-23 | 39.44 | 139.00 | 17.55 | 09.40 |
| 2021-22 | 37.93 | 161.02 | 15.84 | 08.05 |
| 2020-21 | 30.42 | 94.02 | 07.96 | 07.08 |
| 2019-20 | 26.98 | 86.07 | 07.03 | 06.25 |
| 2018-19 | 24.42 | 76.09 | 06.24 | 05.82 |
| 2017-18 | 21.46 | 69.03 | 05.94 | 05.30 |
| 2016-17 | 19.75 | 64.06 | 05.35 | 04.80 |
| 2015-16 | 17.77 | 57.09 | 05.55 | 04.56 |
| 2014-15 | 16.81 | 55.87 | 05.31 | 04.27 |
| 2013-14 | 15.59 | 53.01 | 05.02 | 03.74 |
अर्थशास्त्री प्रो, राम त्रिपाठी ने कहा, बजट वही अच्छा माना जाता है जो देश के भविष्य की प्रगति का उपाय करे और बड़े वर्ग को राहत महसूस कराए। बजट में वैश्विक परिस्थितियों, अमेरिकी टैरिफ से आयात-निर्यात पर असर को ध्यान में रखकर अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने के इंतजाम हो सकते हैं। भारत को रक्षा बजट बढ़ाना चाहिए, भारत की प्रगति की जो रफ्तार है, वो भी अहम चरण में है। इसलिए उसका संतुलन भी जरूरी है। कर्ज पर नियंत्रण बड़ी चुनौती है।
Published on:
23 Jan 2026 02:36 am
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