भारत, Jun 06, 2026

Apollo Micro Systems के शेयर ने 1 साल मे अच्छा रिटर्न दिया है। (PC: AI)
Defence Stocks: पिछले एक साल में डिफेंस सेक्टर ने निवेशकों को ऐसा रिटर्न दिया है कि कई लोगों की नजरें इसी सेक्टर पर टिक गई हैं। कुछ शेयरों ने तो मानो रॉकेट की रफ्तार पकड़ ली। लेकिन शेयर बाजार में एक पुरानी कहावत है, "जो ऊपर तेजी से जाता है, उसकी जांच और भी गहराई से करनी चाहिए।" यही सवाल आज दो चर्चित डिफेंस कंपनियों पर खड़ा होता है। Apollo Micro Systems और Sigma Advanced Systems। दोनों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिए हैं, लेकिन क्या दोनों की बुनियादी कहानी भी उतनी ही मजबूत है जितनी इनके शेयरों की चाल?
डिफेंस सेक्टर की बात करें तो अपोलो माइक्रो सिस्टम्स अब कोई छोटा नाम नहीं रह गया है। कंपनी मिसाइल, नौसेना प्रणालियों, अंतरिक्ष परियोजनाओं और सुरक्षा उपकरणों के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तैयार करती है। सरकार की आत्मनिर्भर भारत नीति का फायदा भी इसे मिल रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि कंपनी की ग्रोथ केवल कागजों पर नहीं, बल्कि कारोबार में भी दिखाई देती है।
FY21 में कंपनी की बिक्री करीब 203 करोड़ रुपये की थी, जो FY26 में बढ़कर 904 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इसी दौरान EBITDA 39 करोड़ रुपये से बढ़कर 218 करोड़ रुपये हो गया है। मुनाफे में तो और भी तेज उछाल देखने को मिला। कंपनी का शुद्ध लाभ 10 करोड़ रुपये से बढ़कर 107 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
हाल के महीनों में कंपनी को कई अहम मंजूरियां और ऑर्डर भी मिले हैं। मिसाइल, टॉरपीडो और अन्य रक्षा उपकरणों के निर्माण से जुड़ी लाइसेंसिंग ने कंपनी की संभावनाओं को और मजबूत किया है।
Apollo की सबसे बड़ी चुनौती उसका कारोबार नहीं, बल्कि उसकी वैल्यूएशन है। जून 2021 में जो शेयर करीब 12 रुपये के आसपास था, वह जून 2026 में 400 रुपये से ऊपर पहुंच गया। पांच साल में 3,000 फीसदी से ज्यादा की तेजी और सिर्फ एक साल में 120 फीसदी से अधिक का उछाल किसी भी शेयर को महंगा बना सकता है। कंपनी का PE रेश्यो करीब 130 गुना तक पहुंच चुका है, जबकि डिफेंस सेक्टर का औसत इससे काफी नीचे है। इसका मतलब है कि बाजार आने वाले कई वर्षों की शानदार ग्रोथ को पहले ही कीमत में शामिल कर चुका है।
इसके अलावा प्रमोटर्स के कुछ शेयर गिरवी हैं। कंपनी का वर्किंग कैपिटल साइकिल भी लंबा है और हाल के वर्षों में फ्री कैश फ्लो दबाव में रहा है। हालांकि, यह कमजोर कारोबार की कहानी नहीं है। यह ऐसी कंपनी है जिसका कारोबार बढ़ रहा है, लेकिन शेयर की कीमत उम्मीदों से काफी आगे निकल चुकी है।
सिग्मा एडवांस्ड सिस्टम्स की कहानी Apollo से बिल्कुल अलग है। यह कंपनी पहले दूसरे कारोबारों में सक्रिय थी, लेकिन बाद में डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर की ओर मुड़ी। पिछले एक साल में इसके शेयर ने 400 फीसदी से ज्यादा की छलांग लगाई है। यहीं से निवेशकों को थोड़ा रुककर सोचना चाहिए। कंपनी ने FY26 में 268 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दिखाया, जो पहली नजर में शानदार लगता है। लेकिन गहराई से देखें तो तस्वीर अलग है। ऑपरेटिंग स्तर पर कंपनी का प्रदर्शन अभी पूरी तरह मजबूत नहीं कहा जा सकता। मुनाफे का बड़ा हिस्सा एक बार मिलने वाली आय से आया था। यानी मुख्य कारोबार से होने वाली कमाई अभी शुरुआती दौर में है।
डिफेंस कारोबार में बदलाव के बाद कंपनी को नए ऑर्डर मिलने शुरू हुए हैं। हाल की कुछ तिमाहियों में बिक्री में तेज उछाल दिखाई दिया है। इसके अलावा दो घटनाओं ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। पहली, प्रमोटर हिस्सेदारी एक तिमाही में 35 फीसदी से बढ़कर 71 फीसदी हो गई। दूसरी, कंपनी को 107 करोड़ रुपये के आसपास का एक बड़ा निर्यात ऑर्डर मिला। यही वजह है कि बाजार को लग रहा है कि कंपनी का नया डिफेंस मॉडल आगे चलकर मजबूत कमाई दे सकता है।
उम्मीदें बड़ी हैं, लेकिन कारोबार अभी शुरुआती मोड़ पर है। कंपनी का टर्नअराउंड केवल कुछ तिमाहियों पुराना है। यानी निवेशक भविष्य की कमाई पर दांव लगा रहे हैं, न कि लंबे समय से साबित हो चुके प्रदर्शन पर। अगर ऑर्डर समय पर पूरे हुए और कमाई बढ़ती रही तो कहानी मजबूत हो सकती है। लेकिन अगर अपेक्षित गति नहीं मिली तो शेयर पर दबाव भी आ सकता है।
दोनों कंपनियां डिफेंस सेक्टर की मजबूत थीम का हिस्सा हैं। लेकिन दोनों की स्थिति अलग है। अपोलो के पास मजबूत कारोबार, बढ़ती बिक्री और बड़ी ऑर्डर बुक है। चिंता केवल ऊंची वैल्यूएशन को लेकर है। वहीं, सिग्मा में ग्रोथ की संभावना ज्यादा है, लेकिन जोखिम भी उतना ही बड़ा है, क्योंकि कंपनी का नया कारोबार मॉडल अभी खुद को पूरी तरह साबित नहीं कर पाया है।
डिफेंस सेक्टर का लंबी अवधि का नजरिया अभी भी मजबूत दिखाई देता है। सरकार का फोकस घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर है और कंपनियों को लगातार नए अवसर मिल रहे हैं। लेकिन अब खेल केवल घोषणाओं का नहीं है। आने वाली तिमाहियों में असली परीक्षा ऑर्डर डिलीवरी, बिक्री वृद्धि और मुनाफे की होगी। जिन निवेशकों ने पहले से अच्छा रिटर्न कमाया है, उनके लिए धैर्य जरूरी है। वहीं नए निवेशकों को केवल शेयर की तेजी देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए।
(डिस्क्लेमर: यह न्यूज आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमभरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)
Published on: 06 Jun 2026 05:34 pm

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