
अजित पवार ने पुणे आईटी हब व ऑटोमोबाइल उद्योग का सपना संजोया था। (प्रतीकात्मक फोटो: AI)
Ajit Pawar vision: महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar) केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक 'इकोनॉमिक विजनरी' के रूप में जाने जाते थे। उनका साफ तौर पर मानना था कि महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था (FDI Maharashtra) को $1 ट्रिलियन (करीब 1 लाख करोड़) तक ले जाने का रास्ता पुणे और बारामती की औद्योगिक गलियों से होकर गुजरता है। आंकड़ों के अनुसार, अजित पवार ने पुणे को 'डेट्रायट ऑफ द ईस्ट' (Pune IT Hub) और बारामती को 'नेक्स्ट सिलिकॉन वैली' (Baramati Development) बनाने के लिए जो खाका खींचा, उसने राज्य के औद्योगिक भूगोल को बदल दिया।
कॉमर्शियल टीवी चैनल्स की रिपोर्ट्स के अनुसार, अजित पवार ने पुणे के चाकण, तलवड़े और हिंजवड़ी क्षेत्रों में विदेशी निवेश (FDI) लाने के लिए व्यक्तिगत रूप से प्रयास किए।
आंकड़ों में प्रभाव: आज पुणे भारत के कुल ऑटोमोबाइल उत्पादन का लगभग 25-30% हिस्सा संभालता है। अजित पवार के कार्यकाल के दौरान यहां फॉक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज़ और टाटा मोटर्स जैसे दिग्गजों ने अपने प्लांट का विस्तार किया था।
ईवी (EV) क्रांति: अजित पवार ने पुणे को इलेक्ट्रिक व्हीकल हब बनाने के लिए विशेष 'ईवी पॉलिसी' को बढ़ावा दिया। उनके विजन के कारण ही महाराष्ट्र भारत का पहला ऐसा राज्य बना, जहां इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सबसे बड़ा इको सिस्टम तैयार हुआ।
अजित पवार ने बारामती को केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित न रखते हुए, इसे तकनीकी रूप से भी सक्षम बनाने पर जोर दिया।
इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर: महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) के आंकड़ों के मुताबिक, बारामती में 1,500 एकड़ से अधिक भूमि को औद्योगिक क्लस्टर के रूप में विकसित किया गया। यहां पियाजियो (Piaggio) और फेरेरो (Ferrero) जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का आना अजित दादा के वैश्विक संपर्कों का परिणाम था।
आईटी विजन: पुणे के आईटी हब (हिंजवड़ी) के सैचुरेशन को देखते हुए, वे बारामती में 'स्मार्ट आईटी पार्क' विकसित करना चाहते थे। उनका लक्ष्य था कि पुणे की आईटी कंपनियों का विस्तार बारामती तक हो, जिससे स्थानीय युवाओं को 'वर्क फ्रॉम होम' और 'वर्क नियर होम' के अवसर मिलें।
विभिन्न कमर्शियल वेबसाइट्स के डेटा के अनुसार, अजित पवार के नेतृत्व में 'मैग्नेटिक महाराष्ट्र' जैसे सम्मेलनों के माध्यम से पुणे रीजन में:
$50 बिलियन से अधिक का निवेश प्रस्तावित और क्रियान्वित किया गया।
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 10 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा हुए।
बुनियादी ढांचे के लिए (जैसे पुणे मेट्रो, रिंग रोड और पुरंदर एयरपोर्ट) ₹1 लाख करोड़ से अधिक के फंड का आवंटन सुनिश्चित कराया।
मराठा चैम्बर ऑफ कॉमर्स (MCCIA): "अजित पवार ने हमेशा 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' पर जोर दिया। वे एक ऐसे नेता थे जो मंत्रालय में बैठ कर नहीं, बल्कि फील्ड पर जाकर उद्योगों की समस्याओं का समाधान करते थे।"
आईटी प्रोफेशनल्स: पुणे के टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि दादा के विजन के बिना पुणे का आईटी एक्सपोर्ट आज के स्तर (₹1.5 लाख करोड़ सालाना) पर नहीं पहुंच पाता।
अजित पवार के निधन के बाद पुरंदर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और पुणे रिंग रोड जैसे प्रोजेक्ट्स के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है। ये दोनों प्रोजेक्ट्स पुणे और बारामती को वैश्विक लॉजिस्टिक्स मैप पर लाने के लिए अनिवार्य थे। अब यह देखना होगा कि नई लीडरशिप इन 'मल्टी-बिलियन डॉलर' प्रोजेक्ट्स को कितनी तेजी से आगे बढ़ाती है।
अजित पवार की सोच का एक विशेष पहलू यह था कि उन्होंने औद्योगिक विकास के मामले में कभी राजनीतिक मतभेदों को आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने केंद्र सरकार के साथ मिल कर कई केंद्रीय योजनाएं पुणे में लागू कराईं, जिससे राज्य को दोहरा लाभ मिला।
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Published on:
28 Jan 2026 06:27 pm
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