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भारत, May 30, 2026

AI के खर्चे से कंपनियों के छूट रहे पसीने, प्रोडक्टिविटी की बजाय साफ हो रही कमाई, अब ले रहीं यू-टर्न

Artificial Intelligence News: एआई से उत्पादकता बढ़ाने की दौड़ अब कंपनियों पर भारी पड़ रही है। कई वैश्विक कंपनियां बढ़ते टोकन बिल और अनियंत्रित उपयोग से परेशान हैं। कुछ ने लाइसेंस बंद किए, कुछ ने रणनीति बदल ली है।

Artificial Intelligence

Artificial Intelligence से कंपनियों का खर्च बढ़ रहा है। (PC: AI)

AI Spending: एआई पर बढ़ता खर्च अब बड़ी कंपनियों की नींद उड़ाने लगा है। जिस तकनीक को लागत घटाने और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने का जरिया माना जा रहा था, वही कई कंपनियों के लिए करोड़ों-अरबों डॉलर का नया खर्च बनती जा रही है। हालात ऐसे हैं कि कुछ कंपनियां AI पर ब्रेक लगाने, प्लान बदलने और यहां तक कि इंजीनियरों को दोबारा नौकरी पर रखने को मजबूर हो गई हैं। कंपनियां एआई टूल्स पर इतना पैसा खर्च कर रही हैं कि कई जगह बजट हाथ से निकलता जा रहा है।

हालत यह है कि कुछ बड़े कॉरपोरेट्स को खर्च कम करने के लिए अपने एआई इस्तेमाल पर लगाम लगानी पड़ रही है। एक कंपनी ने सिर्फ एक महीने में Anthropic के Claude AI पर 50 करोड़ डॉलर खर्च कर दिए। वजह बेहद साधारण थी। कंपनी ने कर्मचारियों के लिए कोई यूज लिमिट तय नहीं की थी। हजारों कर्मचारी लगातार जटिल काम एआई से करवाते रहे और खर्च का मीटर बिना रुके चलता रहा।

सालभर का बजट 4 महीने में खत्म

रिपोर्ट्स के मुताबिक, Microsoft ने बढ़ते टोकन खर्च की वजह से क्लाउड कोड के कुछ लाइसेंस रद्द कर दिए। वहीं उबर ने दावा किया कि उसने साल 2026 के लिए तय किया गया AI बजट सिर्फ चार महीनों में ही खत्म कर दिया। एआई इंडस्ट्री में अब सबसे ज्यादा चर्चा "टोकन बिल" की हो रही है। टोकन दरअसल AI मॉडल की वह यूनिट है, जिसके आधार पर कंपनियों से शुल्क लिया जाता है। जितना ज्यादा इस्तेमाल, उतना ज्यादा खर्च। समस्या यह है कि कई कंपनियां अभी तक यह तय ही नहीं कर पाई हैं कि AI पर किया जा रहा खर्च वास्तव में कितना फायदा दे रहा है।

बचत के बजाय खर्च बढ़ा रहा एआई

Uber, Microsoft, Commonwealth Bank of Australia, GitHub, Cursor, Klarna और Duolingo जैसी कई वैश्विक कंपनियों ने एआई खर्च को लेकर अपनी रणनीति में बदलाव किया है। कहीं कीमतों के प्लान बदले गए हैं, कहीं उपयोग सीमित किया गया है और कहीं लागत बचाने के लिए अलग रास्ते अपनाए गए हैं। ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की एक रिपोर्ट ने भी चिंता को बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल एआई कंपनियों के लिए बचत से ज्यादा खर्च पैदा कर रहा है। अनुमान है कि 2029 तक दुनिया भर में AI पर पूंजीगत निवेश 4.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। इसमें से करीब 2.6 ट्रिलियन डॉलर सिर्फ हार्डवेयर पर खर्च होंगे।

क्या है टोकनमैक्सिंग?

इस बीच टेक इंडस्ट्री में एक नया शब्द तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, "टोकनमैक्सिंग"। इसका मतलब है AI का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करना। विशेषज्ञों का कहना है कि कई कर्मचारी साधारण कामों के लिए भी बड़े-बड़े दस्तावेज अपलोड कर रहे हैं, अनावश्यक जानकारी वाले लंबे प्रॉम्प्ट लिख रहे हैं या AI एजेंट्स को लगातार लूप में चला रहे हैं। इससे टोकन की खपत तेजी से बढ़ रही है।

कुछ मामलों में लोग AI से मौसम जैसी सामान्य जानकारी भी पूछ रहे हैं। यही वजह रही कि Meta और Amazon को अपने आंतरिक AI उपयोग लीडरबोर्ड तक बंद करने पड़े, ताकि कर्मचारी सिर्फ ज्यादा इस्तेमाल दिखाने की होड़ में न लग जाएं। अब कंपनियां समझ रही हैं कि सिर्फ टोकन खर्च बढ़ना सफलता का पैमाना नहीं हो सकता। असली सवाल यह है कि AI से कारोबार को कितना फायदा मिल रहा है।

सेल्सफोर्स लाया नया पैमाना

सेल्सफोर्स ने इसी सोच के तहत "एजेंटिक वर्क यूनिट" (AWU) नाम का नया पैमाना अपनाया है। कंपनी का कहना है कि वह यह देखती है कि एआई ने वास्तव में कौन सा काम पूरा किया, जैसे किसी ग्राहक की शिकायत सुलझाना, मार्केटिंग लीड का मूल्यांकन करना या बिक्री का सौदा पूरा कराना।

24 गुना बढ़ सकता है टोकन यूज

गोल्डमैन सैश का अनुमान है कि 2026 से 2030 के बीच वैश्विक टोकन उपयोग 24 गुना बढ़कर हर महीने 120 क्वाड्रिलियन टोकन तक पहुंच सकता है। हालांकि, टोकन की कीमतें भविष्य में काफी सस्ती होने की उम्मीद हैं, लेकिन इससे कुल खर्च कम होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। Gartner का कहना है कि आने वाले एजेंटिक AI मॉडल मौजूदा चैटबॉट्स की तुलना में एक काम पूरा करने के लिए 5 से 30 गुना ज्यादा टोकन खर्च कर सकते हैं।

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