
फाइल फोटो पत्रिका
Rajasthan Ram Jal Setu Link Project: पूर्वी राजस्थान के प्यासे कंठों के लिए एक बहुत बड़ी और खुशखबरी वाली खबर सामने आई है। जिस जल संकट को लेकर दशकों से उम्मीदें टिकी थीं, अब उसे दूर करने के लिए 'राम जल सेतु' (ERCP का संशोधित स्वरूप) का काम युद्ध स्तर पर शुरू हो चुका है। जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने खुद बूंदी के गुहाटा गांव पहुंचकर 2330 करोड़ की लागत से बन रहे चंबल जलसेतु (Aqueduct) का निरीक्षण किया। मंत्री के तेवरों से साफ है कि 2028 तक पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों की 'बल्ले-बल्ले' होने वाली है!
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का ब्लूप्रिंट किसी करिश्मे से कम नहीं है। कालीसिंध नदी पर बने नवनेरा बैराज के अतिरिक्त पानी को उठाकर चंबल नदी के ऊपर से एक विशाल जलसेतु के जरिए मेज नदी तक लाया जाएगा। यहाँ से यह पानी मेज बैराज और गलवा बांध होते हुए जयपुर-अजमेर की लाइफलाइन बीसलपुर बांध और ईसरदा बांध को भरेगा। यानी अब मानसून की बेरुखी होने पर भी इन बांधों में पानी कम नहीं होगा।
मंत्री सुरेश सिंह रावत ने बताया कि कोटा की दीगोद तहसील से बूंदी के गुहाटा गांव तक 2.3 किलोमीटर लंबा जलसेतु बनाया जा रहा है। यह महज एक नहर नहीं, बल्कि राजस्थान के दीर्घकालीन जल प्रबंधन का मील का पत्थर है। मई 2025 में शुरू हुए इस काम को जून 2028 तक हर हाल में पूरा करने का लक्ष्य है। खास बात यह है कि यह जलसेतु आम जनता के आवागमन के लिए एक नया रास्ता भी बनेगा।
लगभग 90 हजार करोड़ रुपये की इस 'राम जल सेतु लिंक परियोजना' से 17 जिलों की करीब 3.25 करोड़ आबादी को सीधा फायदा होगा।
Published on:
10 Feb 2026 09:01 am
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