
बूंदी. बजट पूर्व परिचर्चा करते व्यापारी व दुकानदार।
बूंदी. शहर के प्रमुख दुकानदारों और व्यापारियों के साथ बजट पूर्व परिचर्चा आयोजित की गई, जिसमें स्थानीय व्यापार की स्थिति, चुनौतियों और आगामी बजट से अपेक्षाओं पर मंथन हुआ। दुकानदारों ने सरकार से टैक्स में राहत देने के साथ ही व्यापार शुरू करने के दौरान कागजी कार्रवाई का सरलीकरण करने का भी आग्रह किया। बजट केवल बड़े उद्योगों तक सीमित न रहे, बल्कि छोटे और मध्यम व्यापारियों की वास्तविक समस्याओं को प्राथमिकता दें। साथ ही सुरक्षा, ऑनलाइन व्यापार, सफाई, जीएसटी प्रक्रिया को आसान बनाने सहित कई मुद्दों पर सुझाव भी दिए।
जीएसटी लागू होने के बाद कर व्यवस्था में पारदर्शिता तो आई है, लेकिन छोटे व्यापारियों के लिए रिटर्न भरने की प्रक्रिया, तकनीकी दिक्कतें और बार-बार बदलते नियम परेशानी का कारण बन रहे हैं। उन्होंने मांग की कि बजट में जीएसटी अनुपालन को सरल बनाया जाए, छोटे व्यापारियों के लिए जुर्माने में राहत दी जाए और प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएं।
राजेश बहेडिय़ा, इलेक्ट्रॉनिक व्यापारी
थोक स्तर पर बढ़ती कीमतें और सीमित मार्जिन के कारण किराना दुकानदारों की आय पर असर पड़ रहा है। साथ ही, बिजली बिल और किराए की बढ़ती दरें भी चिंता का विषय हैं। उन्होंने बजट में वाणिज्यिक बिजली दरों में रियायत, छोटे दुकानदारों के लिए ब्याज मुक्त या कम ब्याज दर पर ऋण और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की मांग की।
तेजस छाजेड़, किराना व्यापारी
ऑनलाइन व्यापार और बड़े रिटेल ब्रांड्स से मिल रही प्रतिस्पर्धा का मुद्दा उठाया। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भारी छूट देकर ग्राहकों को आकर्षित करते हैं, जिससे स्थानीय दुकानों का व्यापार प्रभावित होता है। सरकार को चाहिए कि स्थानीय व्यापारियों के लिए समान अवसर उपलब्ध कराए, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर छोटे दुकानदारों की भागीदारी को प्रोत्साहित करें ।
महेश सोमानी, रेडीमेड वस्त्र व्यापारी
निर्माण सामग्री पर लगने वाले कर, परिवहन की लागत और बाजार क्षेत्रों में अव्यवस्थित ट्रैफिक व्यापार में बाधा बनते हैं। बाजारों में बेहतर सड़क व्यवस्था, पार्किंग सुविधा और लोडिंग-अनलोडिंग के लिए निर्धारित स्थान बनाने की आवश्यकता बताई। साथ ही, छोटे हार्डवेयर व्यापारियों के लिए कार्यशील पूंजी ऋण की व्यवस्था की मांग भी की। शंकरलाल तीर्थयानी, हार्डवेयर व्यापारी
राजस्थान की पहचान पारंपरिक वस्त्र और साडिय़ों से जुड़ी है, लेकिन आधुनिक बाजार व्यवस्था में यह व्यापार पीछे छूटता जा रहा है। बजट में हथकरघा, पारंपरिक वस्त्र और स्थानीय कारीगरों को सब्सिडी, प्रचार और विपणन सहायता दी जानी चाहिए ताकि यह विरासत सुरक्षित रह सके।
प्रदीप रंगवानी, वस्त्र व्यापारी
कई बाजारों में साफ-सफाई, सुरक्षा और पार्किंग की समस्या ग्राहकों को दूर कर देती है। बजट में बाजार क्षेत्रों के सौंदर्यीकरण, सीसीटीवी कैमरे, स्ट्रीट लाइट और स्वच्छता पर विशेष प्रावधान किए जाने चाहिए ताकि बाजार सुरक्षित और आकर्षक बन सकें। राजू, पैठावाला
गत कुछ वर्षों में कच्चे माल, परिवहन और श्रम लागत में वृद्धि हुई है, लेकिन उपभोक्ता की क्रय शक्ति सीमित होने के कारण मुनाफा अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ पा रहा है। बजट में छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए विशेष राहत पैकेज, करों में छूट और स्थानीय बाजारों को सशक्त करने के उपाय शामिल किए जाने चाहिए। अश्विनी चावला, बैग व्यापारी
सरकार सोने चांदी के भावों में स्थिरता लाने के लिए इसे ऑन लाइन व्यापार से मुक्त करवाए, ताकि बाजार में ग्राहक लौट सके तथा ज्वैलर्स व्यवसाय से जुड़े लोगों को नुकसान नहीं हो। महंगाई, जीएसटी की जटिल प्रक्रिया और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से स्वर्ण व्यवसाय प्रभावित हुआ है। बजट में सोने-चांदी पर जीएसटी दरों में सरलीकरण, छोटे व्यापारियों के लिए कर राहत और आसान ऋण व्यवस्था की घोषणा होनी चाहिए। साथ ही पारंपरिक कारीगरों के लिए कौशल विकास, बीमा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार आवश्यक है।
माणक सोनी, स्वर्णकार
अधिकतर छोटे दुकानदार असंगठित क्षेत्र से जुड़े होते हैं, जिनके पास स्वास्थ्य बीमा, पेंशन या दुर्घटना बीमा जैसी सुविधाएं नहीं होतीं। बजट में ऐसी योजनाएं सरल प्रक्रिया के साथ लागू की जानी चाहिए ताकि व्यापारी वर्ग को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सके।
विजय नरवानी, जूता व्यापारी
Published on:
22 Jan 2026 05:23 pm
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