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Bundi : रास्ता बंद, नहर का पानी खेतों में घुसा, किसान परेशान

क्षेत्र के ग्राम पापड़ी के किसानों की मेहनत इन दिनों संकट के साये में खड़ी है। खेतों में लहलहाती फसल, जिनसे किसानों ने पूरे साल की उम्मीदें जोड़ रखी थीं, अब पानी में डूबने के खतरे से जूझ रही है।

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बूंदी

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pankaj joshi

Mar 10, 2026

Bundi : रास्ता बंद, नहर का पानी खेतों में घुसा, किसान परेशान

बड़ाखेडा. समस्या को लेकर ज्ञापन सौंपते पापड़ी गांव के किसान।

बडाखेडा. क्षेत्र के ग्राम पापड़ी के किसानों की मेहनत इन दिनों संकट के साये में खड़ी है। खेतों में लहलहाती फसल, जिनसे किसानों ने पूरे साल की उम्मीदें जोड़ रखी थीं, अब पानी में डूबने के खतरे से जूझ रही है। परेशान किसान अब अपनी पीड़ा लेकर प्रशासन के दरवाजे तक पहुंचने को मजबूर हो गए हैं।

सोमवार को पापड़ी गांव के किसान उपखंड कार्यालय लाखेरी पहुंचे और उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्या से अवगत कराया। किसानों ने बताया कि पापड़ी रेलवे फाटक के पास स्थित करीब 1000 बीघा कृषि भूमि तक जाने वाला एकमात्र रास्ता रेलवे विभाग द्वारा गेट लगाकर बंद कर दिया गया है। यह रास्ता वर्षों से किसानों के खेतों तक पहुंचने का मुख्य मार्ग था। रास्ता बंद होने के बाद किसानों को अब अपने खेतों तक पहुंचने के लिए करीब 5 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे खेती के काम में भारी परेशानी हो रही है और समय व खर्च दोनों बढ़ गए हैं।

किसानों का आरोप है कि सीएडी विभाग द्वारा नहर के पानी की अवैध निकासी कर दी गई, जिससे नहर का पानी खेतों में भरने लगा है। इसके कारण किसानों की तैयार खड़ी सरसों की फसल बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नहर के पानी की निकासी पास की मेज नदी की ओर कर दी जाए, जो करीब एक किलोमीटर दूरी पर है, तो पूरी समस्या का समाधान हो सकता है।

लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण पानी खेतों में ही फैल रहा है और रास्ता भी बाधित हो गया है। इस समस्या को लेकर गांव के किसानों भवानी सिंह, महावीर मीणा, ज्ञानचंद, लेखराज, नन्द किशोर धमैन्द, मोनू सहित अन्य किसानों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर जल्द समाधान की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो उनकी सालभर की मेहनत और फसल दोनों पानी में बह सकती हैं। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि मौके का निरीक्षण कर बंद रास्ते को खुलवाया जाए और नहर के पानी की उचित निकासी की व्यवस्था की जाए, ताकि किसानों की फसल और आजीविका को बचाया जा सके।