
बूंदी.रामगंजबालाजी. चंबल कमांड सिंचित क्षेत्र में धान उत्पादन के कारण बूंदी जिले के बासमती चावल ने देश विदेश में अलग पहचान बनाई। बूंदी के बासमती चावल की महक व गुणवत्ता का गुणगान होने से यहां धान उत्पादक किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। कृषि विभाग के अनुसार जिले में इस वर्ष 81 हजार 875 हेक्टेयर में धान की रोपाई व बुवाई की गई थी। इस वर्ष अच्छी बरसात होने के बाद धान का औसत उत्पादन 3 लाख 76 हजार 625 मैट्रिक टन हुआ। हालांकि गत वर्ष से इस बार भाव कम होने से किसानों में निराशा है।
इन देशों में होता है चावल निर्यात
बूंदी व कोटा जिले में बनने वाले चावल सभी खाड़ी देशों दुबई, इराक, ईरान, सऊदी अरब, तुर्की, यूरोप, कनाडा, यूएसए भेजा जाता है। इसके साथ ही भारत के कई राज्यों में चावल मांग के अनुरूप भेजा जाता है।
लागत के अनुरूप मिले दाम
राजस्थान में धान का कटोरा कहे जाने वाले जिले की विदेश में पहचान बनाने वाले धान को लेकर दामों को लेकर सरकार को अन्य राज्यों के मुताबिक यहां पर भी धान का दाम तैयार किया जाए। ताकि किसानों को संबल मिल सके।इस वर्ष धान के दामों में सात सौ से लगभग 12सौ रुपए तक की गिरावट के चलते किसानों को कई जगह पर लागत मूल्य निकालने में भी पसीने छूट गए। अलग अलग किस्म के अनुसार धाम के दाम तय होते है। जिले मेें धान के प्रति किसानों की रुचि बढऩे से रकबा भी बढ़ा है, वहीं मौसम भी साथ देरहा है। वर्तमान में किसानों के बीज के दाम भी सताने लगे हैं। किसानों को सौ से सवा सौ रुपए अधिक तक के धान के बीज के सभी वैरायटी धान के दाम देने पड़ रहे हैं।
कोटा- बूंदी में है 31 मिलें
चावल उत्पादन के लिए बूंदी जिले में 27 मिल हैं, जिसमें 26 मिल बूंदी में व एक मिल तालेड़ा में स्थित है। 4 मिल कोटा में है। रोजाना इन मिलों 50 हजार से 1 लाख बोरी धान की कुटाई कर चावल तैयार किया जा रहा है।
Published on:
12 Jan 2026 11:54 am
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