
फिल्म 'रोजा' ने दुनिया के '10 बेस्ट साउंडट्रैक' में बनाई जगह (सोर्स: X )
Oscar Winning Film Roja:भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ ऐसी फिल्में हैं जो समय के साथ पुरानी नहीं होतीं, बल्कि और भी बेहतरीन हो जाती हैं। बता दें, साल 1992 में रिलीज हुई मणिरत्नम की फिल्म 'रोजा' इसी लिस्ट में आती है। 3 दशक से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी ये फिल्म आज भी उतनी ही Relevant लगती है जितनी अपनी रिलीज के समय पर थी।
अगर 'रोजा' की कहानी की बात करें, तो तमिलनाडु के एक छोटे से गांव की महिला (मधु) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी दुनिया तब उजड़ जाती है जब उसके पति (अरविंद स्वामी) को जम्मू-कश्मीर में एक खुफिया ऑपरेशन के दौरान आतंकवादी किडनैप कर लेते हैं। ये फिल्म एक पत्नी के अपने पति को वापस लाने के संघर्ष, अटूट प्रेम और उम्मीद की दास्तां है। बता दें, मणिरत्नम ने इस फिल्म में राजनीति और इमोशन्स के बीच एक ऐसा संतुलन बनाया गया है, जिससे दर्शक इससे सीधे जुड़े। इतना ही नहीं, मणिरत्नम की 'रोजा' ने उनकी फेमस पॉलिटिकल ट्रायोलॉजी की नींव रखी। इसके बाद 'बॉम्बे' (1995) और 'दिल से..' (1998) जैसी फिल्में आईं। इन तीनो फिल्मों ने दिखाया कि कैसे देश में बढ़ता तनावपूर्ण माहौल का सीधा असर आम लोगों के निजी रिश्तों पर पड़ रहा है।
बता दें, 'रोजा' फिल्म का जिक्र ए.आर. रहमान के बिना तो अधूरा ही है। आज दुनिया जिस 'म्यूजिक उस्ताद' को जानती है, उसका जन्म इसी फिल्म से हुआ था। उस समय मणिरत्नम ने अपने पुराने साथी इलैयाराजा की जगह एक नए लड़के (रहमान) को मौका देकर एक रिस्क लिया था, लेकिन रहमान के जादुई आवाज ने साबित कर दिया कि मणिरत्नम का फैसला बिल्कुल सही था। फिल्म के गाने जैसे 'छोटी-सी आशा' (चिन्ना चिन्ना आसाई), 'भारत हमको जान से प्यारा है' और 'ये हसीन वादियां' आज भी लोगों की प्लेलिस्ट में पसंदीदा हिस्सा हैं। 'ये हसीन वादियां' के खूबसूरत सीन ने तो कश्मीर को हनीमून कपल्स की पहली पसंद ही बना दिया था।
फिल्म 'रोजा' ना केवल भारत में बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर भी सराही गई। साथ ही, साल 2005 में टाइम मैगजीन ने इसके साउंडट्रैक को दुनिया के '10 बेस्ट साउंडट्रैक' की लिस्ट में शामिल किया था। ये फिल्म संगीत के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड जीतने वाले ए.आर. रहमान के करियर का पहला कदम थी, जिन्होंने बाद में 'स्लमडॉग मिलियनेयर' के लिए 2 ऑस्कर जीते। बता दें, फिल्म ने राष्ट्रीय अखंडता पर बेस्ट फीचर फिल्म के लिए 'नरगिस दत्त अवॉर्ड ' समेत कई राष्ट्रीय और फिल्मफेयर पुरस्कार अपने नाम किए।
इस फिल्म की सफलता का सबसे बड़ा राज इसकी सादगी और रियलिटी है और मधु का किरदार ये दिखाता है कि कैसे एक आम इंसान बड़ी व्यवस्था और लड़ाइयों के बीच खुद को खड़ा करता है। आज भी जब हम 'रोजा' देखते हैं, तो वो संगीत, वो देशभक्ति और वो प्यार हमें उसी शिद्दत से महसूस होता है, जैसा 1992 में हुआ था।
Published on:
10 Jan 2026 10:14 am
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