
हाईकोर्ट (photo-patrika)
Naxal Funding Case: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नक्सल गतिविधियों से जुड़े फंडिंग और सहायता के गंभीर मामले में आरोपी मोहन गावड़े को जमानत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि आरोपी की भूमिका सह-आरोपियों के समान है और ट्रायल प्रगति पर होने के कारण उसे रिहा नहीं किया जा सकता। यह आदेश क्रिमिनल अपील में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने पारित किया।
अभियोजन के अनुसार, थाना मदनवाड़ा जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में वर्ष 2024 में दर्ज अपराध में यह सामने आया कि नक्सलियों द्वारा उपलब्ध कराए गए पैसों से ट्रैक्टर और ट्रॉली खरीदी गई, जिनका उपयोग प्रतिबंधित नक्सली गतिविधियों में किया जा रहा था।
जांच में सामने आया कि, नक्सली फंड से ट्रैक्टर खरीदने के लिए 7.50 लाख रुपए नकद दिए गए। राशि को बैंक खाते में डालकर ट्रैक्टर डीलर को भुगतान किया गया। खरीदे गए वाहन को नक्सली गतिविधियों में सक्रिय आरोपी सौंपा गया। वर्तमान अपीलकर्ता मोहन गावड़े पर आरोप है कि उसने नक्सली फंड से खरीदी गई ट्रैक्टर ट्रॉली का उपयोग कर नक्सलियों की मदद की।
हाईकोर्ट ने इस मामले में जांच अधिकारी के पेश न होने पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने निर्देश दिए कि, पुलिस महानिदेशक यह सुनिश्चित करें कि जांच अधिकारी और आवश्यक पुलिसकर्मी ट्रायल कोर्ट में उपस्थित हों। यदि लापरवाही हुई तो कार्रवाई की जाएगी।
अपीलकर्ता की ओर से कहा गया कि, उसे झूठा फंसाया गया है। ट्रॉली के दस्तावेज न मिलने के आधार पर उसे आरोपी बना दिया गया। उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और 26 गवाहों की गवाही हो चुकी है, जिन्होंने उसका समर्थन नहीं किया। राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि, यह मामला यूएपीए जैसे गंभीर कानून के तहत दर्ज है। इसी केस में अन्य सह-आरोपियों की जमानत पहले ही हाईकोर्ट खारिज कर चुका है। अपीलकर्ता की भूमिका भी उसी प्रकृति की है। ट्रायल अंतिम चरण में है, इसलिए जमानत नहीं दी जा सकती।
डिवीजन बेंच ने कहा कि, आरोप गंभीर और राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़े हैं। सह-आरोपियों को पहले ही राहत नहीं मिली है। ट्रायल कोर्ट में 26 गवाहों की गवाही हो चुकी है। ऐसे में आरोपी को जमानत देना उचित नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यूएपीए मामलों में प्रथम दृष्ट्या संतोष होने पर ही जमानत दी जा सकती है, जो इस प्रकरण में संभव नहीं है।
Published on:
24 Jan 2026 02:18 pm
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