31 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नफा नहीं, नीयतः 110 वर्षों से मानव सेवा का आयुर्वेदिक मॉडल, यहां इलाज सेवा है और दवा संस्कार

जब कोई अनजान राही बीमारी से टूटकर स्टेशन के बाहर कदम रखता है। जेब खाली हो। चेहरे पर बेबसी लिखी हो, तब भी बीकानेर में एक जगह है, जहां उसे दवा से पहले भरोसा मिलता है। रेलवे स्टेशन के ठीक सामने खड़ी मोहता रसायन शाला और मोहता धर्मशाला पिछले 110 वर्षों से इंसानियत का यही […]

3 min read
Google source verification
एक रुपये के पंजीकरण से शुरू होने वाली यह यात्रा निशुल्क औषधियों, सहारे और संवेदना तक पहुंचती है। और यहीं से मोहता रसायन शाला की वह परंपरा आगे बढ़ती है, जो एक सदी से अधिक समय से बीमार और जरूरतमंद के साथ खड़ी है।

मोहता रसायनशाला।

जब कोई अनजान राही बीमारी से टूटकर स्टेशन के बाहर कदम रखता है। जेब खाली हो। चेहरे पर बेबसी लिखी हो, तब भी बीकानेर में एक जगह है, जहां उसे दवा से पहले भरोसा मिलता है। रेलवे स्टेशन के ठीक सामने खड़ी मोहता रसायन शाला और मोहता धर्मशाला पिछले 110 वर्षों से इंसानियत का यही चेहरा दिखा रही है। यहां इलाज कभी व्यापार नहीं बना, और सेवा कभी शर्तों में नहीं बंधी। एक रुपये के पंजीकरण से शुरू होने वाली यह यात्रा निशुल्क औषधियों, सहारे और संवेदना तक पहुंचती है। और यहीं से मोहता रसायन शाला की वह परंपरा आगे बढ़ती है, जो एक सदी से अधिक समय से बीमार और जरूरतमंद के साथ खड़ी है।

यात्रियों की जरूरत से जन्मी सेवा परंपरा

उस दौर में जब रेल यात्रा के दौरान चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं, तब दूरदर्शी सोच के साथ पहले यात्रियों के ठहराव के लिए मोहता धर्मशाला और फिर उपचार के लिए मोहता चिकित्सालय की स्थापना की गई। यहीं से बीकानेर और आसपास के नागरिकों के लिए सेवा की एक ऐसी नींव पड़ी, जो समय के साथ जीवनदायिनी व्यवस्था बन गई।

1915 से अब तक निरंतर चल रही रसायनशाला

सन 1915 में स्थापित मोहता रसायनशाला बीकानेर की एकमात्र ऐसी संस्था है, जो 110 वर्षों से बिना रुके सेवा दे रही है। कठिन परिस्थितियों और बदलते दौर के बावजूद यहां कभी उत्पादन नहीं रुका। प्रारंभ में सीमित औषधियों से शुरू हुई यह रसायनशाला आज आधुनिक मशीनों और शोध के माध्यम से सैकड़ों आयुर्वेदिक दवाइयों का निर्माण कर रही है।

महिलाओं को रोजगार, सेवा को सम्मान

एक समय ऐसा भी था, जब यहां केवल विधवाओं और गरीब महिलाओं को ही रोजगार दिया जाता था। आज भी लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं रसायन शाला में कार्यरत हैं, जो इसे सामाजिक सशक्तीकरण का मजबूत उदाहरण बनाता है।

एक रुपये में इलाज, दवाइयां पूरी तरह निशुल्क

मोहता चिकित्सा ट्रस्ट के अधीन संचालित सात औषधालयों में प्रतिदिन मरीजों की लंबी कतारें लगती हैं। यहां मरीज से मात्र एक रुपये का पंजीकरण शुल्क लिया जाता है और पांच से सात दिन की औषधियां पूरी तरह निशुल्क दी जाती हैं। औषधियों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए रसायन शाला परिसर में ही जड़ी-बूटियों के पौधे उगाए जाते हैं।

आयुर्वेदिक चिकित्सा का संपूर्ण समाधान

मोहता रसायनशाला में तीव्र और दीर्घकालिक दोनों प्रकार की बीमारियों का आयुर्वेदिक समाधान उपलब्ध है। यहां तंत्रिका व न्यूरोलॉजिकल रोग, हड्डी-जोड़ों के रोग, त्वचा, पाचन व गुदा रोग, तनाव व जीवनशैली रोग, पंचकर्म, महिला व बाल स्वास्थ्य, रसायन एवं इम्युनिटी बूस्टिंग उपचार पूर्णतया आयुर्वेदिक पद्धति से किए जाते हैं। बीकानेर के सात प्रमुख क्षेत्रों में अलग-अलग चिकित्सालय और वैद्य भी सेवा दे रहे हैं।

यह है खास मोहता रसायन शाला में

500 से अधिक आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण होता है, जिनमें 80 से अधिक पेटेंट दवाइयां संस्था की रिसर्च एवं डेवलपमेंट टीम की देन हैं। चिकित्सा से आगे समाजसेवा की मिसाल मोहता ट्रस्ट केवल इलाज तक सीमित नहीं है। आयुर्वेद अध्ययनरत तीन विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, संसाेलाव तालाब के पास तीन हजार गज भूमि पर छात्रावास, परीक्षा देने आए विद्यार्थियों के लिए धर्मशाला में निशुल्क ठहराव, और लगभग 180 कर्मचारियों को रोजगार, यह सब इसकी सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

सेवा ही मुख्य ध्येय

ट्रस्ट का उद्देश्य सदैव कमजोर और गरीब वर्ग की सेवा रहा है। बिना नफा-नुकसान के संचालित यह संस्था आगे भी बीकानेर के विकास और समाजसेवा के लिए कार्य करती रहेगी। - शशिकुमार मोहता, संस्था प्रमुख

शुद्धता से कोई समझौता नहीं

यहां बनने वाली औषधियां सौ फीसदी शुद्ध होती हैं। जड़ी-बूटियां परिसर में ही तैयार की जाती हैं, जबकि बाहर से आने वाले कच्चे माल की पूरी जांच के बाद ही उपयोग किया जाता है। - राजेन्द्र कुमार गर्ग, (45 सालों से कार्यरत वैद्य)

Story Loader