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असमंजस: 12 फरवरी से बोर्ड परीक्षा, उसी दिन संस्था प्रधानों की वाकपीठ

​शिक्षा विभाग के शिविरा पंचांग में बड़ी चूक सामने आई है। इससे संस्था प्रधान असमंजस में है। 12 फरवरी को बोर्ड परीक्षाएं है। इसी दिन ​शिक्षकों की वाकपीठ संगोष्ठी है। एक ही दिन होने से अब वह किसमें शामिल हो, इसे लेकर परेशान है।

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बीकानेर. शिक्षा विभाग का शिविरा पंचांग स्कूल संचालन की रीढ़ माना जाता है, लेकिन समयानुसार संशोधन नहीं होने से एक बार फिर व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। 12 फरवरी से माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की दसवीं और बारहवीं की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं, जबकि शिविरा पंचांग में 12 व 13 फरवरी को संस्था प्रधानों की दो दिवसीय वाकपीठ अभी भी निर्धारित है। इससे संस्था प्रधान असमंजस की स्थिति में हैं कि वे बोर्ड परीक्षाओं का दायित्व निभाएं या वाकपीठ में भाग लें।

संशोधन आधे-अधूरे, पुनरावलोकन नहीं

विभाग की ओर से अगले शैक्षणिक सत्र को 1 अप्रेल से शुरू करने की कवायद के तहत शिविरा पंचांग में कुछ गतिविधियों और कार्यक्रमों की तिथियां तो संशोधित की गईं, लेकिन पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों का समग्र पुनरावलोकन नहीं किया गया।स्थिति यह है कि जब-जब शिक्षक संगठनों ने ध्यान दिलाया, तब-तब विभाग ने आनन-फानन में संशोधन जारी किए।

पहले भी चूकी व्यवस्था

शिक्षक संगठनों की मांग पर विभाग ने अर्द्धवार्षिक, वार्षिक परीक्षाओं और तृतीय परख की तिथियों में तो संशोधन किया, लेकिन संस्था प्रधानों की वाकपीठ की तिथियां उस समय भी नजरअंदाज रह गईं। यदि उसी समय सभी कार्यक्रमों की समीक्षा कर ली जाती, तो आज यह स्थिति नहीं बनती।

बोर्ड परीक्षा के दिन ही वाकपीठ तय

शिविरा पंचांग के अनुसार 12 व 13 फरवरी को संस्था प्रधानों की वाकपीठ है। 12 फरवरी से दसवीं व बारहवीं बोर्ड परीक्षाएं हैं।ऐसे में संस्था प्रधानों के सामने सबसे बड़ी दुविधा खड़ी हो गई है।

शिक्षक संघ ने उठाया सवाल

राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश वरिष्ठ महासचिव महेंद्र पांडे ने बताया कि 21 नवंबर को विभाग ने संशोधित आदेश जारी किए थे, लेकिन तब भी तृतीय परख और वाकपीठ की तिथियों पर ध्यान नहीं दिया गया। बाद में तृतीय परख की तिथियां तो बदली गईं, लेकिन वाकपीठ का मुद्दा फिर छूट गया।

या तो तिथि बदले या वाकपीठ स्थगित हो

शिक्षक संगठनों की मांग है कि बोर्ड परीक्षाओं को देखते हुए संस्था प्रधानों की सत्रांत वाकपीठ की तिथियों में तत्काल संशोधन किया जाए या अगले सत्र को 1 अप्रेल से शुरू करने की नीति के तहत सत्रांत वाकपीठ स्थगित करने के आदेश जारी किए जाएं, ताकि संस्था प्रधानों की असमंजस की स्थिति समाप्त हो सके।

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