
आरोपी को 5 साल की जेल और जुर्माना | Image Source - Pexels
Bijnor News Today Hindi: यूपी के बिजनौर की विशेष पॉक्सो अदालत ने सात वर्षीय मासूम बच्ची से दुष्कर्म के प्रयास के मामले में अहम और सख्त फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी सलीम को दोषी करार देते हुए पांच साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी पर 20 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। इस फैसले को बच्चों के खिलाफ अपराधों पर न्यायपालिका के कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
पॉक्सो कोर्ट की स्पेशल जज कल्पना पांडे ने मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद बुधवार को अपना फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले अपराध समाज के लिए गंभीर खतरा हैं और ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती। कोर्ट ने आरोपी को दोषसिद्ध मानते हुए कानून के तहत अधिकतम प्रभावी सजा दी।
विशेष लोक अभियोजक भालेंद्र सिंह राठौड़ के अनुसार, यह घटना 28 अक्टूबर 2025 को हल्दौर थाना क्षेत्र में हुई थी। पीड़िता के पिता ने थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि उनकी सात वर्षीय बेटी मोहल्ले में स्थित सलीम पुत्र गुलूशाह की दुकान से सब्जी लेने गई थी। सब्जी लेकर लौटते समय आरोपी ने बच्ची को 50 रुपये और देने का लालच देकर अपने ऊपर बने कमरे में चलने को कहा।
जब बच्ची ने आरोपी के साथ कमरे में जाने से इनकार किया, तो सलीम ने उसे जबरन खींचकर ऊपर के कमरे में ले गया। वहां आरोपी ने बच्ची के कपड़े उतारने का प्रयास किया। इस दौरान बच्ची ने साहस दिखाते हुए आरोपी के हाथ में काट लिया, जिससे वह छूट गई और जान बचाकर अपने घर की ओर भागी।
घर पहुंचने के बाद बच्ची ने रोते हुए अपनी मां को पूरी घटना की जानकारी दी। मासूम की आपबीती सुनकर परिवार के होश उड़ गए। इसके बाद परिजनों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
मामले की सूचना मिलते ही हल्दौर थाना पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपी सलीम को गिरफ्तार कर लिया और उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। पुलिस ने मामले में आवश्यक साक्ष्य जुटाकर समय पर चार्जशीट अदालत में दाखिल की।
अदालत में सुनवाई के दौरान पीड़िता, उसके परिजन और अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए। मेडिकल रिपोर्ट और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने अभियोजन पक्ष के आरोपों की पुष्टि की। अदालत ने सभी तथ्यों और सबूतों के आधार पर आरोपी को दोषी माना।
कोर्ट के इस फैसले को बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों पर सख्त चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। न्यायपालिका ने साफ किया कि ऐसे मामलों में अपराधियों को कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी, ताकि समाज में भय और अपराध पर अंकुश लगाया जा सके।
Published on:
07 Jan 2026 11:19 pm
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