
हनुमान मंदिर की परिक्रमा करने वाले कुत्ते की ‘घर वापसी’ तय..
Temple dog returns after treatment Bijnor: बिजनौर जिले के नगीना क्षेत्र स्थित गांव नंदपुर में हनुमान जी की मूर्ति की परिक्रमा कर चर्चा में आए कुत्ते की सेहत अब पहले से बेहतर बताई जा रही है। करीब दो सप्ताह तक नोएडा के शिवालय एनिमल शेल्टर में चले इलाज के बाद पशु चिकित्सकों ने उसे गांव वापस ले जाने की अनुमति दे दी है।
इस खबर के मिलते ही पूरे गांव में खुशी और उत्साह का माहौल बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह कुत्ता अब केवल एक जानवर नहीं, बल्कि गांव की आस्था और संवेदनशीलता का प्रतीक बन चुका है।
गत 18 जनवरी को कुत्ते की हालत बिगड़ने पर बिजनौर के एक एनजीओ की टीम उसे दिल्ली के मैक्स पेट जेड अस्पताल लेकर पहुंची थी। जांच के दौरान डॉक्टरों ने उसकी आंतों में गंभीर संक्रमण और टिक फीवर की पुष्टि की।
इसके बाद उसे बेहतर देखभाल के लिए नोएडा के शिवालय एनिमल शेल्टर में शिफ्ट किया गया, जहां मैक्स पेट जेड अस्पताल के पशु चिकित्सकों की निगरानी में लगातार इलाज चलता रहा। उपचार के दौरान उसकी प्लेटलेट्स और हीमोग्लोबिन स्तर पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
इलाज के बाद धीरे-धीरे कुत्ते की हालत में सकारात्मक बदलाव दिखने लगा। एनजीओ प्रेमपथ एनिमल शेल्टर से जुड़े आनंद चैरिटेबल ट्रस्ट, बिजनौर के ट्रस्टी अश्वनी चित्रांश ने बताया कि हाल की जांच रिपोर्ट में कुत्ते की सेहत पहले से काफी बेहतर पाई गई है।
मैक्स पेट जेड अस्पताल की डॉक्टर अंकिता सिंह ने भी उसकी जांच कर संतोष जताया और कहा कि फिलहाल कम से कम तीन सप्ताह तक दवाएं जारी रखना जरूरी होगा, ताकि संक्रमण पूरी तरह समाप्त हो सके और वह पूरी तरह स्वस्थ हो जाए।
इलाज के दौरान कुछ दिनों पहले यह अफवाह भी फैल गई थी कि कुत्ते के दिमाग का ऑपरेशन किया गया है। इस पर एनजीओ और डॉक्टरों ने साफ किया कि ऐसी कोई सर्जरी नहीं हुई है। अश्वनी चित्रांश ने ग्रामीणों से अपील की कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। उन्होंने बताया कि शिवालय एनिमल शेल्टर में कुत्ते की हर जरूरत का ध्यान रखा जा रहा है और उसकी देखभाल पूरी संवेदनशीलता के साथ की जा रही है।
डॉक्टरों की सहमति के बाद अब कुत्ते की गांव वापसी की तारीख तय कर दी गई है। यदि सब कुछ ठीक रहा तो मंगलवार को उसे नंदपुर लाया जाएगा। गांव पहुंचने के बाद भी उसकी दवा और खान-पान पर विशेष ध्यान रखा जाएगा, ताकि इलाज का असर बना रहे। ग्रामीणों ने बताया कि उसकी वापसी को लेकर गांव में एक तरह का उत्सव जैसा माहौल है और लोग बेसब्री से उसके लौटने का इंतजार कर रहे हैं।
कुत्ते की सेहत में सुधार और उसकी वापसी की खबर के बाद ग्रामीणों ने एक बैठक आयोजित की, जिसमें मंदिर परिसर में प्रत्येक शनिवार को बालाजी का दरबार लगाने की घोषणा की गई। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहल गांव में धार्मिक एकता और सामाजिक सहयोग को और मजबूत करेगी। उनका मानना है कि कुत्ते की यह कहानी न केवल आस्था की मिसाल बनी है, बल्कि इंसान और जानवर के बीच करुणा और जिम्मेदारी के रिश्ते को भी उजागर करती है।
Published on:
02 Feb 2026 11:11 pm

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