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इन 9 लक्षणों से समझ जाएं, आपके बच्चे को जन्म से है ‘दिल की बीमारी’

World Congenital Heart Defect Awareness Day: 1000 जीवित शिशुओं में से 8-10 शिशुओं को जन्मजात हृदय रोग हो सकता है...

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Heart Defect Awareness Day

Heart Defect Awareness Day (Photo Source: AI Image)

World Congenital Heart Defect Awareness Day: जन्म के साथ ही दिल में मौजूद खामी अगर समय रहते पहचान में न आए, तो वह मासूम की जिंदगी के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। जन्मजात हृदय दोष शिशुओं में पाई जाने वाली सबसे सामान्य जन्म स्थितियों में शामिल हैं, लेकिन जागरूकता और शुरुआती जांच से इन्हें समय रहते रोका और नियंत्रित किया जा सकता है। विश्व जन्मजात हृदय दोष जागरुकता दिवस पर ए्स भोपाल ने आम लोगों को सचेत करते हुए समय पर पहचान और उपचार कराने की सलाह दी है।

क्या है जन्मजात हृदय दोष

जन्मजात हृदय दोष वह स्थिति है, जिसमें बच्चे का दिल जन्म से ही पूरी तरह विकसित नहीं होता। कई मामलों में इसके लक्षण तुरंत दिखाई नहीं देते, जिससे बीमारी धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लेती है। जन्मजात हृदय दोष शिशुओं में होने वाली सबसे आम जन्मजात हृदय समस्याओं में से एक है।

ये होते हैं रोग

सायनोटिक जन्मजात हृदय रोग: इस स्थिति को ब्लू बेबी दोष भी कहा जाता है। यह विकार हृदय को प्रभावित करता है और शरीर को मिलने वाली ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर देता है।

एसियानोटिक जन्मजात हृदय रोग: इस स्थिति में, रक्त में पर्याप्त ऑक्सीजन होती है, लेकिन यह शरीर में असामान्य रूप से प्रवाहित होती है। इन दोषों से हस्तक्षेप किए बिना रक्त और ऑक्सीजन शरीर के बाकी हिस्सों में पहुंचाए जाते हैं।

एसियानोटिक हृदय रोग: यह विकार हृदय में छेद, बड़ी वाहिकाओं, वाल्व की समस्याओं या हृदय के कामकाज में किसी समस्या के कारण हो सकता है। सभी दोषों में से, निचले सेप्टम, यानी वेंट्रिकुलर सेप्टम में छेद सबसे आम है। एक बार इलाज हो जाने पर, एसियानोटिक हृदय रोग सामान्य रूप से जीवित रहता है।

होते हैं ये लक्षण

सांस लेने में दिक्कत
तेज धड़कन
वजन नहीं बढ़ना
वायुमार्ग और फेफड़ों में बार-बार संक्रमण होना
बेहोशी होना
दूध पीने में कठिनाई
माथे पर पसीना आना
अत्यधिक चिड़चिड़ापन
हाथ और पैरों की त्वचा और नाखूनों का नीला पड़ना

समय पर जांच से बच सकती है जान

हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. विक्रम वट्टी के अनुसार गर्भावस्था के दौरान जांच, नवजात स्क्रीनिंग और शुरुआती चिकित्सकीय हस्तक्षेप से कई बच्चों का जीवन सुरक्षित किया जा सकता है। सही समय पर इलाज मिलने से उनकी जीवन गुणवत्ता भी बेहतर होती है।

परिवार की जागरूकता है सबसे बड़ी ताकत

विशेषज्ञों के अनुसार परिवारों को सही और वैज्ञानिक जानकारी मिलना जरूरी है, ताकि वे इलाज से जुड़े फैसले समझदारी से ले सकें। आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ उपचार ने आज जन्मजात हृदय दोष से प्रभावित बच्चों के लिए स्वस्थ जीवन की उम्मीद मजबूत की है।